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वीरभद्र ने धमकी देकर CM की उम्मीदवारी का ऐलान कराया?

कांग्रेस के वाइस प्रेजिडेंट राहुल गांधी ने हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए हाल ही में वीरभद्र सिंह को पार्टी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी आलाकमान से अपनी उम्मीदवारी का ऐलान कराने के लिए वीरभद्र सिंह ने हर पैंतरे अपनाए और जमीन-आसमान एक कर दिया...

इकनॉमिक टाइम्स 9 Oct 2017, 3:45 am
वसुधा वेणुगोपाल, नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम vb

कांग्रेस के वाइस प्रेजिडेंट राहुल गांधी ने हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए हाल ही में वीरभद्र सिंह को पार्टी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी आलाकमान से अपनी उम्मीदवारी का ऐलान कराने के लिए वीरभद्र सिंह ने हर पैंतरे अपनाए और जमीन-आसमान एक कर दिया। हिमाचल के सीएम वीरभद्र ने राज्य में पार्टी के पदाधिकारियों के खिलाफ शिकायतों पर केंद्रीय नेतृत्व से बात की और धमकी दी कि अगर उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं गया तो वह चुनाव प्रचार से हट जाएंगे।

सूत्रों ने बताया कि सीएम ने दो हफ्ते पहले ही कांग्रेस लीडरशिप से संपर्क किया था और उनके सामने प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रमुख सुखविंदर सुक्खु, पार्टी के सीनियर लीडर जी एस बाली और हाल में नियुक्त चुनाव प्रभारी सुशील कुमार शिंदे के खिलाफ शिकायतों की पोटली खोली थी। सूत्रों के मुताबिक वीरभद्र ने अपनी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिए जाने पर राज्य में पार्टी के चुनाव-प्रचार अभियान से हट जाने की धमकी भी दी। एक सूत्र ने पहचान जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर कहा कि वीरभद्र ने पार्टी लीडरशिप से शिंदे के हिमाचल दौरे से राज्य में हालात सुधरने के बजाय बिगड़ने की बात कही।

सूत्र के मुताबिक सीएम ने कहा कि शिंदे के परस्पर विरोधी बयानों से स्थानीय नेतृत्व में दुविधा और अव्यवस्था की स्थिति बन गई है। सीएम ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि वह बस इतना चाहते हैं कि उनके करियर के अंतिम चुनाव में पार्टी राज्य में चुनकर सत्ता में आए। कांग्रेस लीडरशिप के सामने वीरभद्र ने यह भी कहा कि उनकी कोई आकांक्षा नहीं है, उनकी पार्टी ने उनको पिछले 55 साल में सब कुछ दिया है। लेकिन उनको लगता है कि वह मनमाफिक नतीजे देने में नाकाम रहे हैं और उनके लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के साथ काम करना मुमकिन नहीं है। उनको तुरंत पद से हटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने अपने नोट में लिखा था, 'बहुत सीनियर लीडर होने के चलते सुशील कुमार शिंदे को हिमाचल प्रदेश के चुनाव प्रभारी बनाए जाने से हमें बहुत उम्मीदें थीं। लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि उनके हालिया दौरे से हालात बेहतर होने के बजाए बिगड़े हैं।'

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