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Birbal Death Anniversary : आज ही के दिन हुई थी बीरबल की मौत, क्या आपको पता है कैसे?

अपनी काबिलियत की वजह से ही वह बादशाह के अत्यंत प्रिय होने के साथ ही सबसे करीबी भी हो गए थे। साल 1586 में बागी कबीलों से लड़ाई के दौरान बीरबल की मौत हो गई थी।

नवभारतटाइम्स.कॉम 25 Feb 2021, 11:37 am

हाइलाइट्स

  • अकबरों के नवरत्नों में शामिल बीरबल का असली नाम महेश दास था
  • अकबर ने बीरबल के मरने की खबर के बाद छोड़ दिया था खाना-पीना
  • अकबर ने अपने खास बीरबल के लिए कराया था किले का निर्माण

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नवभारतटाइम्स.कॉम birbal
नई दिल्ली
आपने अकबर-बीरबल की कहानियां और हंसी मजाक के किस्से तो बहुत सुने होंगे। अकबर के खास नवरत्नों में शामिल बीरबल अपनी हाजिरजवाबी और बुद्धिमता के लिए जाने जाते थे। बीरबल का असली नाम महेश दास था। बीरबल की मौत आज ही के दिन बादशाह अकबर जब भी किसी परेशानी में होते तो सबसे पहले बीरबल को ही याद करते। बीरबल भी बादशाह को कभी निराश नहीं करते थे। अपनी काबिलियत की वजह से ही वह बादशाह के अत्यंत प्रिय होने के साथ ही सबसे करीबी भी हो गए थे। दोनों के बीच दोस्ती इतनी गहरी हो गई थी कि बीरबल की मौत के बाद अकबर बिल्कुल टूट गए थे। साल 1586 में बागी कबीलों से लड़ाई के दौरान बीरबल की मौत हो गई थी।
अफगान बागियों से लड़ाई में गई जान
शाज़ी ज़मां की किताब अकबर के अनुसार 1586 ईसवी, में जै़न ख़ां कोका को यूसुफ़ज़ई क़बीले को शिकस्त देने के लिए तैनात किया गया था। जब उन्होंने और फ़ौज मांगी तो बादशाह ने बीरबल को वहां मदद के लिए भेजा। फिर एहतियातन उन्होंने पीछे-पीछे हकीम अबुल फ़तह को भी भेज दिया। बीरबल की जै़न ख़ां कोका और हकीम अबुल फ़तह दोनों से नहीं बनती थी। राजा बीरबल, हकीम अबुल फ़तह, जैन ख़ां कोका और पूरा लश्कर संकरे पहाड़ी रास्ते पर आगे बढ़ा तो पहले से भी ज़्यादा घमासान हुआ। बागी कबिलाइयों ने हथियार और पत्थरों से चौतरफ़ा हमला किया। इस जंग में राजा बीरबल ऐसे घिरे कि उनकी लाश तक नहीं मिली।

जब अकबर ने खाना पीना छोड़ दिया था
राजा मान सिंह की शान में लिखी गई मानचरित्र रासो में कहा गया कि कई अमीर उमरा ने वीर गति पाई; जो भागे वो कलंकित हुए और ख़ुद ब्रह्मदास ब्रह्मा में मिले क्योंकि वो तो माया के वश में नहीं थी। बीरबल की मौत की खबर मिलने के बाद बादशाह की आंखों की नींद उड़ चुकी और उन्होंने खाना पीना छोड़ दिया ऐसे में राजा मान सिंह ने वायदा किया कि वो उस इलाके के राजा को बांध कर धकेलते हुए उनके सामने लाएंगे और उसके क़िले को गिरा कर शहर को जला देंगे। उन्हें विदा करते वक़्त बादशाह ने कहा कि बीरबल उनका ब्राह्मण मित्र था, उसकी देह को ढूंढ कर गंगा में विसर्जित कर देना।

बीरबल के लिए कराया था किले का निर्माण
जब फतेहपुर सीकरी का निर्माण हो रहा था, तब अकबर ने बीरबल के लिए भी एक किला बनवाने को कहा था ताकि वह रोज बीरबल से मुलाकात कर सकें। मुगल साम्राज्य के इतिहासकार अब्दुल कादिर बदायुनी ने भी अकबर-बीरबल की दोस्ती के बारे में लिखा। बदायुनी ने लिखा कि अपने अनोखे स्वभाव की वजह से बीरबल दिनोंदिन बादशाह का चहेता होता गया और उनका सबसे ज्यादा विश्वसनीय हो गया।

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