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तालिबान के साथ बातचीत के पक्ष में नहीं डॉनल्ड ट्रंप, भारत के लिए क्यों है अच्छी खबर?

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप तालिबान के साथ बातचीत करने के मूड में नहीं हैं। इसे भारत के लिए एक अच्छे संकेत के तौर पर देखा जा सकता है, जो लंबे समय से कहता रहा है कि आतंकियों के साथ किसी तरह की बातचीत ठीक नहीं है...

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 30 Jan 2018, 6:16 pm
शैलजा नीलकंठन, नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम डॉनल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
डॉनल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप तालिबान के साथ बातचीत करने के मूड में नहीं हैं। इसे भारत के लिए एक अच्छे संकेत के तौर पर देखा जा सकता है, जो लंबे समय से कहता रहा है कि आतंकियों के साथ किसी भी तरह की बातचीत तर्कसंगत नहीं है। भारत के लिए यह अच्छी खबर है कि अब तालिबान के साथ वार्ता की दिशा में बन रहे पाकिस्तान-चीन और रूस के गठजोड़ के खिलाफ अमेरिका खड़ा हो गया है। गौरतलब है कि अफगानिस्तान के मसले पर इन देशों द्वारा भारत को अलग रखा जा रहा था क्योंकि भारत 'आतंकियों के साथ वार्ता नहीं' के रुख पर कायम है।

भारत का कहना है कि तालिबान को हिंसा का रास्ता छोड़ अफगानिस्तान के संविधान को स्वीकार करते हुए अल कायदा के साथ सभी संबंध खत्म करने चाहिए। भारत इसे 'रेड लाइन्स' कहता है, इसके बाद ही वार्ता होनी चाहिए। भारत यह भी कहता रहा है कि इस बात का फैसला काबुल को करने दिया जाए कि वह सुलह और शांति के लिए किस रास्ते पर चलना चाहता है। देश में पिछले 16 वर्षों से अशांति की स्थिति बनी हुई है। खास बात यह है कि अफगानिस्तान भी भारत की तरह ही 'रेड लाइन्स' की शर्तों को मानता है और इसके बाद ही शांति वार्ता करने के पक्ष में है।

पिछले साल जून में वॉइस ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट में बताया गया था कि अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा था कि तालिबान के साथ शांति वार्ता के लिए उनके प्रशासन की शर्त यह है कि अफगान संविधान को माना जाए, शिक्षा व महिलाओं के मानवाधिकारों पर सुधार जारी रहे, हिंसा और आतंकियों से नाता खत्म किया जाए।

अब यह साफ हो गया है कि ट्रंप भी इस 'रेड लाइन्स' को मानकर चल रहे हैं। यही वजह है कि पिछले 10 दिनों में काबुल में एक के बाद एक हुए आतंकी हमलों के बाद ट्रंप ने एक दिन पहले कहा कि बस बहुत हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, 'वे निर्दोष लोगों की हत्या कर रहे हैं। वे बच्चों और परिवारों पर हमले कर रहे हैं। अफगानिस्तान में हर तरफ बमबारी हो रही है। हम इसे खत्म करने जा रहे हैं।' हालांकि ट्रंप ने साफतौर पर यह नहीं बताया कि उनके दिमाग में क्या योजना है लेकिन उनके रुख से साफ था कि वह बड़ी सैन्य कार्रवाई के मूड में हैं।

पाक-चीन-रूस का गठजोड़
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब एक महीने के भीतर ही तालिबान की ओर से यह खुलासा किया गया था कि उसके प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान, चीन और कतर के साथ इस्लामाबाद में वार्ता की है, जिससे अफगान युद्ध का समाधान निकाला जा सके। इसी महीने ऐसी खबरें आई थीं कि रूस ने अफगानिस्तान की सरकार और तालिबान के बीच सीधी वार्ता की मेजबानी करने की इच्छा जताई है।

इन घटनाक्रमों से भारत को कोई खुशी नहीं हुई। भारत पहले से ही पाकिस्तान और चीन के गठजोड़ का सामना कर रहा है। रूस के भी शामिल होने से अब अफगानिस्तान के लिए समाधान तलाशने में भारत की भूमिका को अलग-थलग किया जाने लगा था। हालांकि ट्रंप के 'बस बहुत हुआ' की घोषणा से बाजी पलट गई है।

पाक को पहले ही चेता चुके हैं ट्रंप
ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि पाकिस्तान हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकियों को सुरक्षित ठिकाना मुहैया करा रहा है। यह नेटवर्क तालिबान का ही सहयोगी है, जो वर्षों से अफगानिस्तान में हमले कर रहा है। हक्कानी नेटवर्क अफगानिस्तान के नागरिकों, सैनिकों ही नहीं बल्कि अमेरिका और नाटो के सैनिकों को भी निशाना बना रहा है।

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