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कामकाजी महिलाएं नहीं चाहतीं दूसरा बच्चा: एसोचैम रिसर्च

वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसोचैम) की एक रीसर्च में यह पाया गया है कि भारत में शहरी कामकाजी महिलायें आमतौर पर दूसरा बच्चा नहीं चाहतीं हैं। रीसर्च के मुताबिक 35 प्रतिशत शहरी नौकरी पेशा महिलाओं ने इस तरह के विचार रखे। इसके पीछे बच्चे के पालन पोषण में लगने वाला समय, माता-पिता की भाग-दौड और बढ़ता खर्च को वजह बताया।

भाषा 12 May 2017, 11:27 pm
कोलकाता
नवभारतटाइम्स.कॉम प्रतीकात्मक तस्वीर

वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसोचैम) की एक रिसर्च में यह पाया गया है कि भारत में शहरी कामकाजी महिलाएं आमतौर पर दूसरा बच्चा नहीं चाहतीं। रिसर्च के दौरान 35 प्रतिशत शहरी नौकरीपेशा महिलाओं ने इस मुद्दे पर अपने विचार रखे। उन्होंने इसके पीछे बच्चे के पालन पोषण में लगने वाले समय, माता-पिता की भाग-दौड़ और बढ़ते खर्च को वजह बताया।

एसोचैम के सोशल डिवेलपमेंट फाउंडेशन द्वारा किए गए इस रिसर्च में 500 से अधिक महिलाओं ने कहा है कि वह दूसरा बच्चा नहीं चाहतीं, जबकि अन्य महिलाओं ने कहा कि वह एक और मैटरनिटी लीव लेकर अपनी नौकरी और प्रमोशन की संभावनाओं को खत्म नहीं करना चाहती हैं। एसोचैम ने यह रिसर्च अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नै, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, कोलकाता और मुंबई सहित देश के दस प्रमुख शहरों में किया।

उद्योग मंडल का यह सर्वे इस मुद्दे पर था कि वर्किंग मदर्स आमतौर पर कितना समय अपने बच्चों के साथ गुजारतीं हैं, वह एक और बच्चा चाहतीं हैं या नहीं और उसकी क्या वजहें हैं। यह रिसर्च एक बच्चे वाली 1,500 वर्किंग मदर्स के बीच किया गया। उनके मुताबिक, मॉडर्न मैरेज़ के साथ जुड़े दबाव, नौकरी की भागदौड़ और बच्चों के पालन-पोषण पर आने वाले खर्च कुछ प्रमुख वजह हैं जिसके कारण कई माएं दूसरे बच्चे से परहेज करतीं हैं।

कुछ पैरंट्स का यह भी कहना है कि वह अपना ध्यान ज्यादा बांटना नहीं चाहते हैं इसलिए वह दूसरा बच्चा नहीं चाहते हैं। रिसर्च में सवालों के जवाब देने वालों का कहना था कि सरकार को एक बच्चे वाले परिवारों को टैक्स में कुछ राहत देनी चाहिए ताकि एक बच्चे वाले परिवार की नीति को आगे बढ़ाया जा सके।

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