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World Environment Day: प्रेगनेंट महिलाओं के शिशु के लिए जहर का काम करती है प्रदूषित हवा, जानिए बचने का तरीका

हर साल 5 जून को विश्‍व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस बार 'वर्ल्‍ड एनवायरमेंट डे' की थीम 'टाइम फॉर नेचर' रखी गई है जिसमें पृथ्‍वी और मनुष्‍य के विकास में प्रकृति की भूमिका पर ध्‍यान दिया गया है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 5 Jun 2020, 10:40 am
आज के समय में पर्यावरण को बचाना बहुत महत्‍वपूर्ण हो गया है, खासतौर पर वायु को, क्‍योंकि इसमें हम सांस लेते हैं और दूषित वायु सीधा हमारे शरीर के अंदर जाती है। प्रेगनेंट महिलाओं के लिए तो वायु प्रदूषण और भी घातक होता है। वायु प्रदूषण का असर गर्भवती महिला के गर्भस्‍थ शिशु पर पड़ता है। मां जो भी खाती और पीती है वो सीधा बच्‍चे को मिलता है। इसी तरह दूषित हवा में सांस लेने का असर भी बच्‍चे पर पड़ता है।
नवभारतटाइम्स.कॉम effect of air pollution on pregnant woman in hindi
World Environment Day: प्रेगनेंट महिलाओं के शिशु के लिए जहर का काम करती है प्रदूषित हवा, जानिए बचने का तरीका


हवा में फैले प्रदूषण का गर्भवती महिला के स्‍वास्‍थ्‍य और शिशु के विकास पर नकारात्‍मक असर पड़ सकता है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि गर्भस्‍थ शिशु को वायु प्रदूषण किस प्रकार प्रभावित करता है।

​भ्रूण पर वायु प्रदूषण का प्रभाव

भ्रूण को मां से ही ऑक्‍सीजन मिलता है। जब मां दूषित हवा में सांस लेती है तो इसका असर बच्‍चे पर भी पड़ता है। वहीं, कंसीव करने से पहले या प्रेग्‍नेंसी के शुरुआती महीनों में वायु प्रदूषण के कारण प्री-मैच्‍योर डिलीवरी हो सकती है।

इसकी वजह से जन्‍म के समय बच्‍चे का वजन कम भी हो सकता है और इन बच्‍चों में कुपोषण का खतरा भी रहता है। इन बच्‍चों को आगे चलकर में डायबिटीज, कार्डियोवस्‍कुलर रोग एवं हाई बीपी भी हो सकता है।

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​प्रदूषण में मौजूद कण हैं हानिकारक

प्रदूषण में ठोस और तरल के रूप में कई विषाक्‍त तत्‍व मौजूद होते हैं जो हवा में बह कर कई बीमारियां पैदा करते हैं। ये किसी भी व्‍यक्‍ति को प्रभावित कर सकता है और गर्भवती महिला एवं गर्भस्‍थ शिशु के लिए ये सबसे ज्‍यादा मुश्किल होता है।

इन विषाक्‍त पदार्थों की वजह से फेफड़ों, आंखों और गले में दिक्‍कत हो सकती है, यहां तक कि सांस लेने में भी दिक्‍कत हो सकती है।

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​गर्भावस्‍था में वायु प्रदूषण के नुकसान

गर्भवती महिलाओं को वायु प्रदूषण में रहने से कई तरह के नुकसान हो सकते हैं, जैसे कि :

  • ऑटिज्‍म : हार्वर्ड की स्‍टडी के अनुसार गर्भावस्‍था की तीसरी तिमाही में अधिक प्रदूषित वायु में सांस लेने से बच्‍चे में ऑटिज्‍म का दोगुना खतरा रहता है।
  • अस्‍थमा : प्रेग्‍नेंसी में अस्‍थमा की वजह से प्रीक्‍लैंपसिया यानी हाई ब्‍लड प्रेशर हो सकता है और लिवर एवं किडनी की कार्यशीलता कम हो सकती है। यदि इलाज न किया जाए अस्‍थमा से बच्‍चे को ऑक्‍सीजन की कमी हो सकती है जो कि बच्‍चे के विकास, प्रीमैच्‍योर बर्थ और लो बर्थ वेट का कारण बन सकता है।
  • मिसकैरेज का खतरा : अध्‍ययनों की मानें तो लंबे समय तक वायु प्रदूषण में रहने का संबंध मिसकैरेज से होता है। वायु प्रदूषण से महिलाओं और पुरुषों की फर्टिलिटी भी कम होती है।

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​प्रेग्‍नेंसी में वायु प्रदूषण से कैसे बचें

हवा या हवा में फैले प्रदूषण पर तो आपका कोई बस नहीं है, लेकिन कुछ एहतियात बरत कर आप प्रेग्‍नेंसी के दौरान खुद को और अपने बच्‍चे को स्‍वस्‍थ जरूर रख सकती हैं।

  • हवा को साफ करने के लिए एयर प्‍यूरिफायर का इस्‍तेमाल करें।
  • घर में पौधे लगाएं जो प्राकृतिक रूप से हवा को साफ कर सकें।
  • ऐसे रसायनों से दूर रहें जो सांस लेने पर शरीर के अंदर जा सकते हैं जैसे कि हेयर स्‍प्रे और पेंट आदि।
  • अगर किसी दिन ज्‍यादा प्रदूषण है तो उस दिन घर से बाहर निकलने से बचें।

यदि इस प्रदूषित हवा को आप अपने गर्भस्‍थ शिशु से दूर रखना चाहती हैं तो ऊपर बताई गई बातों का जरूर ध्‍यान रखें।

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