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गुस्‍से में मारपीट पर उतर आता है बच्‍चा, पेरेंट्स जल्‍दी कर लें ये काम वरना बहुत पछताएंगे

बच्‍चे गुस्‍से में आकर या किसी और वजह से अपने साथ के दूसरे बच्‍चों के साथ मारपीट शुरू कर सकते हैं। किसी को काटना, धक्‍का देना, थप्‍पड़ या घूंसा मारना मारपीट कहलाता है और बच्‍चों में इस तरह का बिहेवियर होना बहुत खतरनाक होता है। पेरेंट्स को समय रहते ही इस आदत को सुधार देना चाहिए।

नवभारतटाइम्स.कॉम 5 Dec 2021, 10:49 am
भाई-बहनों में अक्‍सर छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई होती रहती है। इनकी शैतानियों से घर में रौनक रहती है, तो वहीं कभी-कभी परेशानियां भी बढ़ जाती है। किसी भी उम्र में बच्‍चों के बीच लड़ाई-झगड़ा होना आम बात है और कभी-कभी बच्‍चे लड़ाई करते समय एक-दूसरे को मार भी देते हैं। बच्‍चों को डिसिप्‍लिन में रखने के बावजूद भी उनमें इस तरह का बिहेवियर आ जाता है।
नवभारतटाइम्स.कॉम effective ways to stop a child from hitting
गुस्‍से में मारपीट पर उतर आता है बच्‍चा, पेरेंट्स जल्‍दी कर लें ये काम वरना बहुत पछताएंगे


कभी गुस्‍से तो कभी अपनी पसंद की कोई चीज सिबलिंग (भाई या बहन) के लेने पर लड़ाई हो जाती है। इस लड़ाई को सुलझाने के चक्‍कर में पेरेंट्स की अच्‍छी-खासी क्‍लास लग जाती है। उन्‍हें न सिर्फ बच्‍चों को समझाना पड़ता है बल्कि मारपीट से दूर रखने की भी सीख देनी पड़ती है।

इस तरीके से बच्‍चे अपने मन की बात कहने की कोशिश कर सकते हैं। ये उनकी डेवलपमेंट का एक हिस्‍सा हो सकता है।

काटना, घूंसा मारना या नखरे दिखाना, इस सबके जरिए बच्‍चे अपना दुख और गुस्‍सा दिखाने की कोशिश कर सकते हैं। अगर आपका बच्‍चा भी इस तरह का बिहेवियर अपना रहा है, तो आपको उसे रोकने या समझाने की कोशिश करनी चाहिए।

​जल्‍दी लें सुध

अपने बच्‍चे के बिहेवियर पर नजर रखें। जब भी आपको कुछ गलत लगता है, तो उसे तुरंत समझाएं। जल्‍दी कोई कदम उठाने से इस बुरी आदत को बढ़ने से रोका जा सकता है। जब आपको लगे कि आपका बच्‍चा किसी को मारने वाला है, तो फटाफट बचाव में आ जाएं।

​गलत है हरकत

बच्‍चों को सही और गलत का पता नहीं होता है। उसे बताएं कि किसी को मारना अच्‍छा नहीं होता है। अगर आप पहले ही बच्‍चे को समझा देंगे तो शायद उसे अपनी फीलिंग्‍स को समझने का मौका मिल जाएगा। इस तरह बच्‍चे समझ पाएंगे कि जब कुछ अपनी मर्जी का नहीं होता है तो क्‍या करना चाहिए।

​सीधी बात करें

आप बच्‍चे को अपने सामने बिठाकर उससे पूछें कि उसे क्‍या परेशानी है। इससे बच्‍चे और पेरेंट के बीच का रिश्‍ता मजबूत होता है। अगर स्‍कूल में बच्‍चे को कोई बुली कर रहा है या कोई उसके साथ मारपीट या कुछ गलत कर रहा है, तो उससे बात कर के आप उसकी परेशानी को जान सकते हैं।

​नियम तोड़ने की सजा

पेरेंट्स तो बच्‍चों के लिए रूल बना लेते हैं लेकिन बच्‍चों से उन्‍हें मनवाना बहुत मुश्किल होता है। अगर आपका बच्‍चा भी ऐसा है जो रूल्‍स के नाम से ही दूर भागता है, तो आप उसे नियम तोड़ने की सजा देना शुरू कर दें। इससे बच्‍चा जिम्‍मेदार बनेगा और उसमें अच्‍छा व्‍यवहार करने की प्रवृत्ति आ सकती है।

मान लीजिए अगर आपका बच्‍चा दूसरों के साथ या अपने भाई-बहनों के साथ मारपीट करना बंद नहीं करता है, तो आप उससे उसकी पसंद की कोई चीज या सुविधा छीन लें। लेकिन जब वो कुछ अच्‍छा करता है, तो उसकी तारीफ भी करें।

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