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थायराइड से ग्रस्‍त प्रेगनेंट महिलाएं जरूर खाएं ये सुपरफूड्स

महिलाओं के शरीर में थायराइड हार्मोन बहुत महत्‍वपूर्ण होता है। गले में स्थित थायराइड ग्रंथि पूरे शरीर में हार्मोंस को संतुलित करती है। जब ये ग्रंथि कम मात्रा में थायराइड हार्मोन बनाने लगे तो इस स्थिति को हाइपोथायराइड कहते हैं, वहीं अधिक हार्मोन बनने पर हायपरथायराइड की स्थिति उत्‍पन्‍न हो जाती है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 7 Jul 2020, 2:02 pm
कुछ महिलाएं गर्भधारण से पहले ही हाइपोथायराइड का शिकार होती हैं तो कुछ महिलाओं को गर्भावस्‍था के दौरान हाइपोथायराइड हो जाता है। गर्भस्‍थ शिशु के विकास के लिए थायराइड हार्मोन बहुत जरूरी होता है। ये शिशु के मस्तिष्‍क के विकास में अहम भूमिका निभाता है।
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थायराइड से ग्रस्‍त प्रेगनेंट महिलाएं जरूर खाएं ये सुपरफूड्स


हाइपोथायराइड से ग्रस्‍त प्रेगनेंट महिलाएं अपनी डायट में कुछ सुपरफूड्स को शामिल कर थायराइड हार्मोन को संतुलित एवं शिशु के सही विकास को सुनिश्चित कर सकती हैं।

​हाइपोथायराइड का प्रेग्‍नेंसी पर प्रभाव

प्रेग्‍नेंसी में हाइपोथायराइड की वजह से शिशु के विकास में देरी आ सकती है। पहले हुए कई अध्‍ययनों में पाया गया है कि जिन प्रेगनेंट महिलाओं में हायपोथायराइड गंभीर रूप ले चुका होता है या इलाज नहीं किया जाता है, उन महिलाओं के बच्‍चों का आईक्‍यू लेवल और मानसिक विकास धीमा होता है।

वहीं हाइपोथायराइड को कंट्रोल करने पर शिशु पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है और बच्‍चा बिल्‍कुल स्‍वस्‍थ रहता है।

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​हाइपोथायराइड का फर्टिलिटी पर असर

हाइपोथायराइड ओवरी से एग को रिलीज होने से रोक सकता है। नियमित मासिक चक्र के दौरान हर महीने ओवरी से एग रिलीज होता है लेकिन हाइपोथायराइड से ग्रस्‍त महिलाओं की ओवरी में हर महीने एग रिलीज नहीं होते हैं। ये फर्टिलाइज एग के विकास को भी प्रभावित कर सकता है।

इससे मिसकैरेज का खतरा बढ़ जाता है। यदि प्रेगनेंट महिला हाइपोथायराइड का इलाज न करवाए तो बच्‍चे की डिलीवरी नौ महीने से पहले, जन्‍म के समय कम वजन और मानसिक अक्षमता हो सकती है।

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​प्रेग्‍नेंसी में थायराइड और डायट

थायराइड ग्रंथि थायराइड हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन का इस्‍तेमाल करती है। गर्भावस्‍था में आयोडीन एक महत्‍वपूर्ण खनिज पदार्थ होता है। प्रेग्‍नेंसी के दौरान मां की डायट से ही शिशु को आयोडीन मिलता है। प्रेगनेंट महिला को दिनभर में 250 माइक्रोग्राम आयोडीन की जरूरत होती है।

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​आयोडीन के स्रोत

दूध से बने उत्‍पाद, सीफूड, अंडे, मीट और आयोडाइज्ड नमक आयोडीन का बेहतर स्रोत होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीनैटल विटामिन के साथ 150 माइक्रोग्राम आयोडीन लेना चाहिए। वहीं स्‍तनपान के दौरान महिलाओं को और ज्‍यादा आयोडीन की जरूरत होती है क्‍योंकि शिशु को मां के दूध से आयोडीन मिलता है।

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​अनाज

ओट्स, बकव्‍हीट और क्‍यूनोआ आपके लिए बेहतर विकल्‍प हैं। आपको अपने आहार में गेंहू और गेंहू से बनी चीजों को शामिल करना चाहिए। चावल और ब्राउन राइस कम खाएं।

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​दालें

सभी दालों को प्रेग्‍नेंसी डायट में शामिल करना फायदेमंद रहेगा। दालों में प्रोटीन होता है जो गर्भस्‍थ शिशु के विकास में मदद करेगा।

दालों के अलावा संतरा, चकोतरा, मौसंबी और एवोकैडो जैसे फल भी खाएं। नाशपाती, आडू, स्‍ट्रॉबेरी और पपीता न खाएं। प्रेग्‍नेंसी में हाइपोथायराइड के मरीजों को ये फल खाने से फायदा होता है।

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​सब्जियां और दूध के उत्‍पाद

ब्रोकली, फूलगोभी, पत्तागोभी, केल, पालक और टरनिप जैसी सब्ज्यिों को छोड़कर आप सभी सब्जियां खा सकती हैं। हाइपोथायराइड में इन सब्जियों को खाना सही नहीं माना जाता है। इसके अलावा हाई या लो फैट डेयरी प्रोडक्‍ट भी आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

प्रेगनेंट महिला के वजन बढ़ने, हाइपोथायराइड की गंभीरता के आधार पर डॉक्‍टर आपको डेयरी प्रोडक्‍ट लेने की सलाह देते हैं।

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