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बच्‍चों के लिए Pre school चुनने से पहले इन बातों पर करें गौर

प्री-स्‍कूल चुनते समय माता-पिता को कई बातों का ध्‍यान रखना चाहिए क्‍योंकि ये आपके भविष्‍य की पहली सीढ़ी होती है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 13 Jun 2020, 9:28 am
पैरेंट्स बनने के बाद आपका सारा ध्‍यान सिर्फ अपने बच्‍चे पर होता है। बड़े होकर बच्‍चे कैसे और क्‍या बनेंगे , ये काफी हद तक माता-पिता पर निर्भर करता है। बच्‍चों को एक अच्‍छा और कामयाब इंसान बनाने के लिए शिक्षा बहुत महत्‍व रखती है और इसका पहला कदम होता है प्री-स्‍कूल।
नवभारतटाइम्स.कॉम how to choose pre school


प्री-स्‍कूल में बच्‍चा अपनी उम्र के दूसरे बच्‍चों से मिलता है और नई-नई चीजें सीखता है। ऐसा कह सकते हैं कि प्री-स्‍कूल से बच्‍चों को स्‍कूल जाने की ट्रेनिंग दी जाती है और ये बच्‍चे के बौद्धिक विकास में अहम भूमिका निभाता है।

चूंकि, प्री-स्‍कूल आपके बच्‍चे के भविष्‍य में अहम योगदान देते हैं इ‍सलिए इसका चुनाव करते समय आपको कई बातों का ध्‍यान रखना चाहिए, जैसे कि :
  • प्री-स्‍कूल के जरिए आपके बच्‍चे को बाहरी दुनिया देखने का मौका पहली बार मिलेगा। टीचर के साथ बच्‍चे की की क्षमता, समस्‍या और जरूरतों आदि के बारे में खुलकर बात करें।
  • प्री-स्‍कूल में पढ़ाने वाली टीचरों पर थोड़ी रिसर्च जरूर कर लें। जिस स्‍कूल में आप अपने बच्‍चे को भेज रहे हैं, वहां की टीचर कैसी हैं, ये जानना आपके लिए बहुत जरूरी है।
  • ऐसा नहीं होना चाहिए कि प्री-स्‍कूल में बच्‍चे को घंटों तक बैठाकर रखा जाए। इतने छोटे बच्‍चों को खेलने के लिए भी समय चाहिए होता है। स्‍कूल जाने के टाइम पर भी ध्‍यान दें। स्‍कूल सुबह के समय ही अच्‍छे रहते हैं।

  • आपका बच्‍चा आपसे दूर कई घंटों तक स्‍कूल में रहेगा। ऐसे ये आपका फर्ज बनता है कि आप स्‍कूल में मिल रही सुविधाओं और सुरक्षा के बारे में पुख्‍ता जानकारी बटोर लें।
  • स्‍कूल का करिकुलम जानना भी बेहद जरूरी है। ऐसा न हो कि स्‍कूल में बच्‍चे को एक कुर्सी पर बैठाकर रखा जाए। स्‍कूल के करिकुलम पर ही निर्भर करता है कि आपका बच्‍चा कैसे सीखेगा। स्‍कूल के अंदर बच्‍चे को कई अलग-अलग एक्टिविटीज से चीजें सिखानी चाहिए।
  • पढ़ाई की बात हो और पैसों का नाम न आए, ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। आजकल शिक्षा को व्‍यापार बना दिया गया है। एड‍मिशन से पहले ही फीस और खर्चों के बारे में बात कर लें। अपने बजट से महंगा प्री-स्‍कूल चुनने की गलती न करें क्‍योंकि इसके बाद आपको अपने बच्‍चे को आगे की पढ़ाई भी करवानी है।

  • बच्‍चों की सुरक्षा के लिहाज से आपको उन्‍हें घर के किसी नजदीक प्री-स्‍कूल में ही भेजना चाहिए। इससे आपका समय भी बचेगा और बच्‍चे को थकान भी नहीं होगी।
  • स्‍कूल में किताबे पढ़ने और खेलने दोनों के लिए समय होना चाहिए, वरना आपका बच्‍चा बोर हो जाएगा और फिर आखिर यही तो उसकी खेलने की उम्र है।
  • सबसे अहम बात है बच्‍चों के प्रति स्‍कूल की अप्रोच। बच्‍चे शरारती, जिद्दी और नखरे दिखाने वाले होते हैं। ऐसे में बच्‍चों को स्‍कूल का स्‍टाफ कैसे संभालता है ये जानना आपके लिए बहुत जरूरी है।
प्री-स्‍कूल में बच्‍चे ही नहीं बल्कि टीचर का भी प्रभाव पड़ता है। आपको समझना चाहिए कि आप अपने बच्‍चे को प्री-स्‍कूल अपने आने वाली जिंदगी के लिए तैयार करने के लिए भेज रहे हैं। स्‍कूल ऐसा होना चाहिए जहां बच्‍चे को सहज, सुरक्षित और कॉन्फिडेंट महसूस हो। अपनी और अपने बच्‍चे की जरूरतों को ध्‍यान में रखकर ही प्री-स्‍कूल चुनें।

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