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Umbilical Cord Care : जन्‍म के बाद तुरंत नहीं गिरती शिशु की गर्भनाल, कुछ दिनों तक ऐसे रखना होता है ध्यान

गर्भनाल जन्म के एक सप्ताह बाद बच्चों से अलग होता है और उससे बना घाव ठीक होने में भी थोड़ा समय लगता है। ऐसे में उन्हें नहलाते समय विशेष सावधानियों की जरूरत होती है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 18 Oct 2021, 3:31 pm
एक छोटे बच्चे के जीवन में आते ही बच्चों के उचित देखभाल को लेकर चिंता शुरू हो जाती है। बहुत से ऐसे काम होते है, जिन्हें बड़ी सावधानी से किया जाना जरूरी है। जैसे बच्चों को पहली बार नहलाना। नवजात शिशु अम्बिकल कॉर्ड या गर्भनाल के साथ पैदा होता है।
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Umbilical Cord Care : जन्‍म के बाद तुरंत नहीं गिरती शिशु की गर्भनाल, कुछ दिनों तक ऐसे रखना होता है ध्यान

अम्बिकल कॉर्ड माता और बच्चे को गर्भ में एक दूसरे से जोड़े रखता है। गर्भनाल जन्म के एक सप्ताह बाद बच्चों से अलग होता है और उससे बना घाव ठीक होने में भी थोड़ा समय लगता है। ऐसे में उन्हें नहलाते समय विशेष सावधानियों की जरूरत होती है। लेकिन इसके साथ-साथ बच्चों की साफ सफाई का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।

​गर्भनाल की देखभाल

गर्भनाल के झड़ने तक इसका विशेष ख्याल रखना जरूरी है। यह लगभग 1 से 3 सप्ताह के अंदर अलग हो जाता है। लेकिन तब तक इसे पूरी तरह से साफ रखना जरूरी होता है। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है कि आप रुई के एक हिस्से को गीला करें और उससे धीरे-धीरे गर्भनाल को साफ करें। फिर रुई के दूसरे हिस्से से इसे सुखाएं।

यदि साफ -सफाई के बावजूद भी अगर इसमें बच्चे को दर्द हो रहा हो, पीले रंग का मवाद आ रहा हो, बदबू आ रही हो, तो यह संक्रमण की निशानी है, और ऐसे में तुरंत चिकित्सक की सलाह आवश्यक होती है।

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​नवजात शिशु और डायपर

डायपर हमेशा गर्भनाल से नीचे पहनाए। या ऐसे डायपर का उपयोग करें जो नवजात शिशु के लिए खास तौर पर आते हैं। ऐसे डायपर में गर्भनाल के लिए अलग से जगह बनी होती है। इसके साथ ही बच्चों को हल्के कपड़े पहनाए।

​बच्चों को रखे साफ सुथरा

गर्भनाल के निकलने तक बच्चों को स्पंज बाथ देना चाहिए। ऐसे में बच्चे साफ भी रहते हैं और गर्भनाल को सूखा भी रखा जा सकता है। नवजात शिशुओं को स्पंज बाथ के जरिए एक हफ्ते में एक से दो बार साफ करें। इससे ज्यादा साफ करने से उनकी त्वचा शुष्क हो सकती हैं।

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​स्पंज बाथ

बच्चों को स्पंज बाथ के जरिए साफ करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। मौसम बहुत ठंडा हो तो नहलाने से पहले कमरे के तापमान को थोड़ा गर्म कर ले। सभी जरूरी चीजें जैसे तोलिया, सौम्य साबुन, बच्चों के कपड़े, डायपर आदि इकट्ठा कर ले। सभी चीजों को इस तरह से व्यवस्थित रखे कि आपको आसानी से मिल जाए।

नवजात शिशु को नहलाने के लिए एक नरम सतह पे कोई मोटा तौलिया या स्पंज बिछाकर उसके ऊपर बच्चों को लेटा कर भी नहलाया जा सकता हैं। बच्चों को हमेशा सिर से शुरू करके पैर तक साफ करना चाहिए। साबुन बिल्कुल सौम्य होना चाहिए। बच्चों के आंख, कान, नाक, मूंह, नाभी जैसे संवेदनशील अंगो का ध्यान रखना भी जरूरी है।

​रखें खास ख्याल

नहलाते समय गर्दन के नीचे, कानों के पीछे, उंगलियों के पोर को हल्के हाथों से साफ करे। नहलाने के तुरंत बाद बच्चों को दूसरे नरम बाथ टॉवल के जरिए सुखाए और उन्हें तुरंत हल्के गर्म कपड़े से लपेट दे।छोटे बच्चे अपनी गर्दन नहीं संभाल पाते हैं।

इसलिए उन्हें नहलाते समय उनके सिर और गर्दन का खास तौर पर ख्याल रखें। इसके साथ ही गर्भनाल को साफ करने के तुरंत बाद सूखे कपड़े से हल्के हाथों से दबाकर अच्छी तरह से सुखाएं।

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​विशेष सावधानी

गर्भनाल को अपने हाथों से बिल्कुल भी खींच कर निकालने की कोशिश ना करें। अगर आपको लगता हो कि यह पूरी तरह से सूख गया है तब भी इसे खींचकर नहीं निकालना चाहिए। इसका अपने आप ही झड़कर निकलना सुरक्षित होता है।

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