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बात करते हुए हकलाता है बच्‍चा, तो पेरेंट्स इन उपायों की ले सकते हैं मदद

हकलाने की समस्या 2 से 5 साल के बीच के बच्चों में ज्यादातर पाई जाती है, और ये समस्या बड़े होते-होते सामान्य होने लगती है। लेकिन, कुछ बच्चों में ये समस्या बड़े होने पर भी बनी रहती है, इस परिस्थिति में ये चिंता का विषय हो सकता है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 21 Sep 2021, 5:08 pm
सामान्यत: यह कहा जाता है कि हकलाना या तुतलाना एक स्पीच डिसऑर्डर है, जो बच्चे के आसानी से बात करने में अड़चन पैदा करता है। बच्चों में मुख्य रूप से 3 तरह का हकलाना पाया जाता है - डेवलपमेंटल हकलाना, न्यूरोजेनिक हकलाना और साइकोजेनिक हकलाना। स्टडीज में यह बात सामने आई है कि सभी बच्चों में से 5 परसेंट बच्चे जब बोलना शुरू करते हैं तो वे हकलाते हैं।
नवभारतटाइम्स.कॉम how to treat a stuttering child
बात करते हुए हकलाता है बच्‍चा, तो पेरेंट्स इन उपायों की ले सकते हैं मदद

इन 5 परसेंट में से 75 परसेंट बच्चे बड़े होते-होते ठीक हो जाते हैं और बाकी के युवावस्था आने तक सही हो जाते हैं। लेकिन, 1 परसेंट बच्चे ऐसे होते हैं जिनकी ये समस्या युवा होने के बाद भी बनी रहती है। पेरेंट्स अपने बच्चों के सबसे ज्यादा करीब होते हैं, ऐसे में वही होते हैं जो बच्चे के बोलने संबंधी होने वाली परेशानी को सुलझाने में उनकी मदद कर सकते हैं।
जानते है कि कैसे पेरेंट्स इस तरह की परिस्थिति से सामान कर बच्चे की मदद कर सकते हैं।


​बच्चे की बात हमेशा सुनें

पेरेंट्स को बच्चे की बातों को गौर से सुनने और समझने का प्रयास करना चाहिए, ना कि उनके हकलाने पर ध्यान देना चाहिए। बच्चा क्या कहना चाह रहा है?

उसे समझते हुए बच्चे को आसान शब्दों को सिखाना चाहिए, ताकि वो आसानी से अपनी बात आपको समझा सकें। ऐसा करने से बच्चा रिलैक्स और कॉन्फिडेंट महसूस करेगा और उसे लगेगा कि उसकी बातों को आप समझ रहे हैं।

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​बच्चे को आसान भाषा में बात करना सिखाएं

बच्चा बोलने में कॉन्फिडेंट फील करे, इसके लिए जरूरी है कि पेरेंट्स उनके बोलने के तरीके पर रोक न लगाए या टोके नहीं, जैसे- बच्चा अगर जल्दी-जल्दी बात कर रहा है तो धीरे बोलने या धीरे बोलने पर जल्दी बोलने के लिए दबाव न डालें। ऐसा करने से बच्चे के ऊपर किसी प्रकार का दबाव नहीं होगा तो वो कम हकलाएंगे।

आलोचक नहीं प्रशंसक बनें

सभी बच्चे ऐसे फेस से गुजरते हैं जिस समय उन्हें बहुत से शब्दों को बोलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है, या फिर बहुत से शब्दों का सही से उच्चारण नहीं कर पाते हैं, खासकर 2 से 5 साल के बीच। इस समय पेरेंट्स बच्चे को डांटे नहीं बल्कि प्यार से उन्हें सिखाते रहें।

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​क्या है इसका उपचार?

हकलाना एक मनोवैज्ञानिक समस्या है, और इसका उपचार भी मनोवैज्ञानिक तरीके से होता है। मनोवैज्ञानिक या स्पीच थेरेपिस्ट से बात करके इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है। इस समस्या को दूर करने के लिए स्पेशलिस्ट हकलाने का कारण जानने की कोशिश करते हैं, उसके बाद ही सही इलाज करते हैं।

​पेरेंट्स रखें खास ध्यान

बच्चा अगर हकलाता है तो आप न केवल खुद, बल्कि किसी और को भी बच्चे का मजाक ना उड़ाने दें। मजाक उड़ाने से बच्चे के मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है और उनका कॉन्फिडेंस लेवल कम होता जाता है। साथ ही बच्चा जब मौजूद हो तब उसके सामने इस समस्या के बारे में चर्चा करने से बचें। माता-पिता को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

माता-पिता बच्चे के सबसे करीबी होते हैं। बच्चे के किसी भी समस्या का समाधान पेरेंट्स से बेहतर कोई नहीं कर सकता, इसलिए बच्चे के परेशानी को समझते हुए उसे दूर करने का प्रयास जरूर करें।

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