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प्रेग्‍नेंसी में मोबाइल पर गपशप करना बच्‍चे के लिए बन सकता है आफत, फोन की जगह ऐसे करें दोस्‍तों से बात

प्रेग्‍नेंसी में बहुत चीजों का ध्‍यान रखना पड़ता है वरना बच्‍चे पर बुरा असर पड़ने का खतरा रहता है। मोबाइल एक ऐसी आदत है जो हमें फायदे से ज्‍यादा नुकसान पहुंचाती है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 17 Jun 2021, 9:10 am
अब मोबाइल फोन सांस लेने जितने ही जरूरी हो गए हैं। एक दिन भी इसके बिना रह पाना मुश्किल क्‍या नामु‍मकिन हो गया है। हम में से आधे से ज्‍यादा लोग फोन के बिना अपनी जिंदगी की कल्‍पना भी नहीं कर सकते हैं। टीनएजर्स से लेकर बड़े बुजुर्गों तक को इसकी लत लग चुकी है और गर्भवती महिलाएं भी इससे अछूती नहीं हैं।
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प्रेग्‍नेंसी में मोबाइल पर गपशप करना बच्‍चे के लिए बन सकता है आफत, फोन की जगह ऐसे करें दोस्‍तों से बात


हम सभी जानते हैं कि मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडिएशन सेहत के लिए हानिकारक होती हैं और अगर आप प्रेगनेंट हैं तो मोबाइल का इस्‍तेमाल न सिर्फ आपको बल्कि आपके गर्भस्‍थ शिशु को भी नुकसान पहुंचाता है।

​स्‍टडी ने किया दावा

फोन की चौड़ी स्‍क्रीन और इससे निकलने वाली लाइट आंखों को नुकसान पहुंचाती है और कुछ साल पहले हुई एक स्‍टडी में यह खुलासा हुआ था कि फोन का ज्‍यादा इस्‍तेमाल करने वाली प्रेगनेंट महिलाओं के बच्‍चों में व्‍यवहार संबंधी परेशानियां होने का खतरा ज्‍यादा रहता है।
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​क्‍या है पूरी स्‍टडी

डेनमार्क के शोधकर्ताओं ने यह स्‍टडी की थी जिसमें जन्‍म के पूर्व और डिलीवरी के बाद मोबाइल का ज्‍यादा इस्‍तेमाल करने वाली मांओं के बच्‍चों और बिहेवरियल प्राब्‍लम्‍स के बीच संबंध का पता लगाया गया।

इस स्‍टडी में उन महिलाओं को शामिल किया गया था जिनके बच्‍चे लगभग सात साल के थे। इन्‍हें अपने बच्‍चों की सेहत और व्‍यवहार को लेकर कुछ सवाल पूछे गए थे। इसके साथ ही यह भी पूछा गया था कि वो फोन कितना चलाती हैं। आखिर में पता चला कि जिन महिलाओं ने गर्भावस्‍था के दौरान और डिलीवरी के बाद फोन का ज्‍यादा इस्‍तेमाल किया था, उनके बच्‍चे हाइरएक्‍टिविटी और कुछ व्‍यवहार संबंधी समस्‍याओं से ग्रस्‍त थे।

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​एक स्‍टडी से कुछ नहीं होता साफ

यह तो बस एक स्‍टडी की बात है कि फोन के ज्‍यादा इस्‍तेमाल से गर्भवती महिला के बच्‍चे को बिहेवरियल परेशानी हो सकती है और केवल एक स्‍टडी के आधार पर इस बात को पूरी तरह से सही नहीं कहा जा सकता है।

इस स्‍टडी के परिणाम को पूरी तरह से ठीक नहीं बताया जा सकता क्‍योंकि विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रोवेव, टीवी और लैपटॉप की तरह मोबाइल से भी लो लेवल की रेडियो तरंगें निकलती हैं। ये तरंगे एक्‍स-रे और सीटी स्‍कैनर से भी निकलते हैं इसलिए मोबाइल की तरंगों को गर्भस्‍थ शिशु के लिए हानिकारक नहीं कहा जा सकता है।

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​ऐसे में क्‍या करें आप

माना कि इस स्‍टडी पर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता है लेकिन अपने बच्‍चे की सलामती के लिए आप एहतियात तो बरत ही सकती हैं। इससे आप और आपका बच्‍चा दोनों स्‍वस्‍थ रहेंगे।

प्रेग्‍नेंसी में मोबाइल का इस्‍तेमाल कम से कम करने के लिए आप मैसेज या चैट की मदद से अपने दोस्‍तों और रिश्‍तेदारों से कनेक्‍ट रह सकती हैं।

सोशल मीडिया ऐप्‍स को ज्‍यादा स्‍क्रोल करने से बचें और मोबाइल की रेडिएशन से दूर रहने के लिए हैंडफ्री का प्रयोग करें। इस तरह आप प्रेग्‍नेंसी में मोबाइल के ज्‍यादा इस्‍तेमाल से बच सकती हैं।

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