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प्रेगनेंसी में Mood swings से बिगड़ सकते हैं कई काम, कैसे करें कंट्रोल

कभी गुस्‍सा तो कभी प्‍यार, कभी ऐसा मन करता है कि किसी से खूब झगड़ा करें तो अगले ही पल लगता है कि ऐसा फील क्‍यों हुआ। मूड में बार बार इस तरह के बदलाव आने को मूड स्विंग्‍स कहते हैं और प्रेगनेंसी में Mood swings होना आम बात है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 3 Sep 2020, 10:19 am
प्रेगनेंसी के सबसे प्रमुख लक्षणों में से एक है मूड स्विंग्‍स, जो कि आमतौर पर गर्भवती महिलाओं को परेशान करता है। शारीरिक लक्षणों से तो फिर भी निपट लिया जाए लेकिन ये जो बार बार मूड बदलता है ना, वो ज्‍यादा परेशान कर देता है।
नवभारतटाइम्स.कॉम mood swings during pregnancy


अगर आपको गर्भावस्‍था में बार बार मूड बदलने की शिकायत हो रही है तो पहले इसका कारण जान लें और फिर इससे निपटने के तरीकों पर गौर फरमाएं।

प्रेगनेंसी में मूड स्विंग्‍स होने के कारण
गर्भावस्‍था में मूड स्विंग्‍स होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे कि हार्मोंनल बदलाव, नींद की कमी, एंग्‍जायटी और थकान
  • हार्मोनल बदलाव : प्रेगनेंसी की शुरुआत में एस्‍ट्रोजन और प्रोजेस्‍टेरोन हार्मोन के बढ़ने की वजह से ऐसा होता है। एस्‍ट्रोजन मस्तिष्‍क के उस हिस्‍से में एक्टिव होता है जो मूड को नियंत्रित करता है। यह हार्मोन चिंता, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन से संबंध रखता है। वहीं, प्रोजेस्‍टेरोन दुखी और थका हुआ महसूस करवाता है।
  • थकान और नींद की कमी : प्रेगनेंसी की पहली तिमाही और आखिरी तीन महीनों में नींद की कमी के कारण चिड़चिड़ापन हो सकता है। पहले तीन महीनों में आप कितना भी सो लें, थकान जाती नहीं है। इसी तरह गर्भावस्‍था की तीसरी तिमाही में भी नींद आने में दिक्‍कत होती है।
  • मॉर्निंग सिकनेस : यह शारीरिक के साथ मानसिक लक्षणों पर भी गहरा असर डाल सकती है। मॉर्निंग सिकनेस की वजह से बार बार उल्‍टी करने के लिए काम छोड़कर टॉयलेट जाने का असर मूड पर पड़ता है।
  • शारीरिक बदलाव : गर्भावस्‍था में शरीर के अंदर इतने बदलाव आते हैं कि आप परेशान हो जाती हैं। दर्द और बढ़ता हुआ वजन मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को प्रभावित करता है जिससे मूड पर भी असर पड़ता है।
  • एंग्‍जायटी : मां बनने और बच्‍चे की परवरिश को लेकर एंग्‍जायटी हो जाती है। लेबर पेन (प्रसव पीड़ा) की वजह से भी चिंता हो सकती है। भविष्‍य की चिंताओं का असर आपके मूड पर भी पड़ता है।
प्रेगनेंसी में कब होती है मूड स्विंग्‍स की शुरुआत
आमतौर पर महिलाओं को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही और आखिरी तीन महीनों में मूड स्विंग्‍स की परेशानी होती है। गर्भावस्‍था के पहले सप्‍ताह में ही मूड स्विंग्‍स की शुरुआत हो जाती है।

मूड स्विंग्‍स कैसे करें कंट्रोल
ऐसे कई तरीके हैं जिनकी मदद से आप प्रेगनेंसी में बार-बार मूड बदलने की समस्‍या से छुटकारा पा सकती हैं :
  • पर्याप्‍त नींद : प्रेगनेंसी में शारीरिक बदलावों और अधिक मेहनत करने की वजह से थकान जल्‍दी हो जाती है। ऐसे में भरपूर आराम करें और नींद लें।
  • एक्‍सरसाइज : डॉक्‍टर की सलाह पर प्रेगनेंट महिलाएं कुछ हल्‍की एक्‍सरसाइज कर सकती हैं। एक्‍सरसाइज से एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज होता है जो रिलैक्‍स और खुश महसूस करवाता है। यह भी पढ़ें : प्रेगनेंट महिलाओं को एक्‍सरसाइज से कब बना लेनी चाहिए दूरी
  • डायट : भोजन का सीधा असर आपके मूड पर पड़ता है। कैलोरी वाला फूड शरीर में शुगर लेवल को प्रभावित करता है जिससे मूड स्विंग्‍स ट्रिगर होते हैं। इसलिए इस समय पौष्टिक आहार लें।
  • मालिश : डिलीवरी के बाद मालिश करवाई जाती है लेकिन आप प्रेगनेंसी स्‍ट्रेस को कम करने के लिए भी मालिश की मदद ले सकती हैं। इसके प्रेगनेंसी में पैदल चलना भी फायदेमंद होता है।

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