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Restless legs syndrome : प्रेग्‍नेंसी में पैरों में महसूस होती है सनसनाहट, इग्‍नोर करने की नहीं है बात

कई बार गर्भवती महिलाओं को टांगों में सनसनाहट महसूस होती है लेकिन उन्‍हें पता नहीं होता कि ऐसा क्‍यों हो रहा है या इसे क्‍या कहते हैं। इस कंडीशन को रेस्‍टलेस लेग सिंड्रोम कहते हैं।

नवभारतटाइम्स.कॉम 16 Oct 2021, 5:20 pm
जरनल ऑफ मिडवाइफ्री एंड वुमेंस हेल्‍थ में प्रकाशिक एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 26 पर्सेंट गर्भवती महिलाएं रेस्‍टलेस लेग सिंड्रोम (आरएलएस) का शिकार होती हैं। इस प्रॉब्‍लम में टांगों के अंदर सनसनाहट महसूस होती है और पैर को हिलाने का मन करता है। इसकी वजह से सोने में भी दिक्‍कत आ सकती है।
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Restless legs syndrome : प्रेग्‍नेंसी में पैरों में महसूस होती है सनसनाहट, इग्‍नोर करने की नहीं है बात



गर्भवती महिलाओं को आरएलएस क्‍यों होता है

डॉक्‍टरों को भी पूरी तरह से यह पता नहीं है कि गर्भवती महिलाओं को आरएलएस क्‍यों होता है। हो सकता है कि इसका संबंध डोपामाइन असंतुलन, मिनरल की कमी या हार्मोनल बदलावों से हो। अगर आपको प्रेग्‍नेंसी के दौरान आरएलएस हो गया है, तो डिलीवरी के कुछ दिनों के अंदर इसके लक्षण खत्‍म हो जाएंगे।

NCBI के अनुसार प्रेग्‍नेंसी में होने वाली सबसे आम समस्‍याओं में से एक आरएलएस भी है। गर्भावस्‍था में इसका खतरा दो से तीन गुना ज्‍यादा होता है।

​आरएलएस के लक्षण

आरएलएस की वजह से टांगों में अजीब सी सनसनाहट महसूस होने लगती है। कुछ लोग इसमें पैर को खींचने, हथौड़े पड़ने जैसा महसूस होने या दर्द फील होने की बात कहते हैं। इसमें पैर को हिलाते रहते का मन करता है।

ज्‍यादा देर तक कोई एक्टिविटी न करने पर इसके लक्षण आ सकते हैं, जैसे कि ट्रैवल करते समय, मूवी थिएटर में बैठने पर या नींद आने की कोशिश करने के दौरान ऐसा महसूस हो सकता है।

इसकी वजह से रात को सोने में भी दिक्‍कत हो सकती है। इससे आप थका हुआ महसूस कर सकते हैं और प्रेग्‍नेंसी की तीसरी तिमाही में आपकी परेशानियां बढ़ भी सकती हैं।

​आरएलएस के कारण

वैज्ञानिकों को रात के समय पैरों में सनसनाहट महसूस होने के स्‍पष्‍ट कारण के बारे में पता नहीं है लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि मस्तिष्‍क में डोपामाइन नामक केमिकल के असंतुलन के कारण होता है। ये केमिकल मांसपेशियों की मूवमेंट को आसान बनाने में मदद करता है।

फोलिक एसिड या आयरन की कमी के कारण भी प्रेग्‍नेंसी में आरएलएस हो सकता है। इस बात के भी प्रमाण हैं कि प्रेग्‍नेंसी में एस्‍ट्रोजन लेवल बढ़ने से आरएलएस हो सकता है।

​आरएलएस का इलाज

अगर आपको इसके कारण बहुत ज्‍यादा प्रॉब्‍लम हो रही है या आपको रात में सोने में दिक्‍कत आ रही है तो आपको डॉक्‍टर को दिखाना चाहिए।

रेस्‍टलेस लेग सिंड्रोम के इलाज के लिए रिक्‍यूप और मिरापेक्‍स जैसी दवाएं दी जाती हैं। इससे भ्रूण को क्‍या और कितना नुकसान होता है, इसे लेकर ज्‍यादा रिसर्च नहीं की गई है लेकिन आप कोई भी दवा डॉक्‍टर से पूछे बिना न लें।

दवा शुरू करने से पहले डॉक्‍टर आयरन लेवल चेक करते हैं और अगर आयरन की कमी है तो ओपिओइड दवाएं दी जाती हैं। एफडीए ने भी आरएलएस के इलाज के लिए रिलैक्सिस नाम के डिवाइस को मंजूरी दे रखी है। इसे डॉक्‍टर से पूछने के बाद ही इस्‍तेमाल करें।

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