ऐपशहर

बच्‍चे के रोना शुरू करने पर, मां दिमाग में चलती हैं कुछ ऐसी बातें

शिशु के रोने पर मां का दिल दुखता है और कई मांओं को यह लॉजिक समझ नहीं आ पाता है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 16 Feb 2021, 8:55 am
छोटे बच्‍चे रोकर ही अपनी बात और जरूरत समझाते हैं। बच्‍चे दो साल की उम्र तक ही बोलकर अपनी बात कहना शुरू करते हैं लेकिन इससे पहले उनके बात करने का जरिया सिर्फ रोना ही होता है।
नवभारतटाइम्स.कॉम what happens in mothers brain when her child cries in hindi
बच्‍चे के रोना शुरू करने पर, मां दिमाग में चलती हैं कुछ ऐसी बातें


वहीं शिशु का रोना अक्‍सर पेरेंट्स को इमोशनली कमजोर कर देता है और बच्‍चे के रोने पर उनकी खुद की आंखों में भी आंसू आ जाते हैं। आमतौर पर बच्‍चा भूख लगने, थकान होने, बोर होने, डर लगने, पेट में दर्द होने पर रोता है और मां को अपनी बात कहने की कोशिश करता है लेकिन शिशु के रोने का असर मां पर पड़ता है। यहां पर हम आपको बता रहे हैं कि शिशु के रोने पर मां के दिमाग में क्‍या चलता है।

​शिशु को क्‍यों रोता नहीं देख सकतीं मांएं

डिलीवरी के बाद मां के शरीर में ऑक्‍सीटोसिन हार्मोन उच्‍च मात्रा में होता है और इस हार्मोन को मदरहुड हार्मोन भी कहा जाता है क्‍योंकि यह डिलीवरी में अहम भूमिका निभाता है। यही हार्मोन मां को उसके बच्‍चे से सबसे ज्‍यादा प्‍यार करने के लिए भी होता है। खून में इस हार्मोन की वजह से शिशु के रोने पर मां का दिमाग ज्‍यादा संवेदनशील हो जाता है।

आसान शब्‍दों में कहें तो दिमाग का वो हिस्‍सा, जिससे सुनते हैं, वो बच्‍चे के रोने पर ज्‍यादा रिसेप्टिव और रिएक्टिव हो जाता है। इसलिए जब बच्‍चा रोता है, तो मां के दिमाग को उसकी देखभाल करने का सिग्‍नल मिलता है।

यह भी पढ़ें : अक्‍सर इन कारणों से रोता है शिशु, जान लेंगे तो नहीं होगी कोई दिक्‍कत

​मां के सोने पर बच्‍चा रोए तो

कई मांओं को शिकायत रहती हैं कि उनका बच्‍चा रात में रोता है तो उसकी आवाज सुनकर वो अचानक से उठ जाती हैं। इसका कारण यह है कि मांएं अपने शिशु को ज्‍यादा देर रोता हुआ नहीं देख सकती हैं और उसके रोने की आवाज शायद उनके दिमाग को भी बर्दाश्‍त नहीं होती है।

ऑक्‍सीटोनिस की वजह से आपको ज्‍यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि शिशु के रोने पर दिमाग अपने आप आपको जगा देता है और आप उठते ही शिशु को अपनी बांहों में उठा लेती हैं। शिशु के रोने की आवाज से दिमाग के कुछ हिस्‍सों में एलर्टनेस हो जाती है।

यह भी पढ़ें : नवजात शिशु रोजाना 3 घंटे से ज्यादा रोए तो हो जाएं सावधान

​शिशु के रोने पर क्‍या-क्‍या होता है

कुछ महिलाओं का कहना है कि शिशु के रोना शुरू करने पर वो बिना-सोचे समझे अपने आप ही उसे स्‍तनपान करवाने लगती हैं। शरीर अपने आप ही मां को ऐसे संकेत देता है कि वो शिशु के रोने पर उसे दूध पिलाने लगती हैं।

शिशु हमेश किसी ना किसी वजह से रोता है। अब अगर आपको भी शिशु के रोने पर डर या बेचैनी सी महसूस हो रही है, तो चिंता ना करें यह नैचुरली हो रहा है।

मां बनने के बाद आपका दिमाग और शरीर इस तरह से तैयार हो चुका होता है कि उसे शिशु की हर जरूरत समझ आने लगती है और बच्‍चे का रोना, उन्‍हें इमोशनली तकलीफ देने लगता है।

इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको ज्‍यादा सोचने की जरूरत नहीं है कि बच्‍चे के रोने पर आपका मन बेचैन क्‍यों हो उठता है।

अगला लेख

Lifestyleकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग