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ताकि आम न पहुंचाएं आपकी सेहत को नुकसान...

खरीदते समय इसकी चमकदार त्वचा पर न जाएं बल्कि इसकी खुशबु और बाहरी रूप-रंग से पहचानने की कोशिश करें...

नवभारतटाइम्स.कॉम 12 Jul 2017, 1:10 pm
हम सभी ने बचपन में सीखा है- चमकने वाली हर चीज़ सोना नहीं होती! तो इस सबक को आम खरीदते समय भी अपनाएं! गलत तरीके से पकाए गए फल अपना स्वाद, खुशबू, और पोषण खो देते हैं। आम खाने का सबसे उपयुक्त तरीका यह है कि अधपके या कच्चे आम को खरीदा जाए और इसे घर में प्राकृतिक तरीकों से पकाया जाए।
नवभारतटाइम्स.कॉम ​कैसे चुनें सही आम​
कैसे चुनें सही आम


सबसे आसान तरीका बेहतरीन आम जांचने का यह है कि आम के उपरी हिस्से को ठीक तरीके से परखा जाए। यह थोडा फूला हुआ होना चाहिए। इसके अलावा आप जिस भी आम का चयन करते हैं वो कीट से मुक्त, ओलों से चोटिल, कटा-फटा नहीं होना चाहिए।

खरीदते समय इसकी चमकदार त्वचा पर न जाएं बल्कि इसकी खुशबु और बाहरी रूप-रंग से पहचानने की कोशिश करें।

देखें: आम रखता है आपकी सेहत का ख्याल

ऐसे पकाएं प्राकृतिक तरीकों से आम
इसके लिए चारों ओर से बंद और सामान्य तापमान वाले कमरे में आम को कागज में लपेटकर एक तश्तरी या डिब्बे में रख देना चाहिए। इसके बाद इसको चारों तरफ से पुराने अखबार या कपड़े से ढक देना चाहिए। 3 दिनों तक आम को इसी अवस्था में रखने के बाद आप सुरक्षित और प्राकृतिक तरीकों से पकाए गए आम का स्वाद चख सकते हैं।

FSSAI फल पकाने के लिए 'एथीलीन' के इस्तेमाल की अनुमति देता है जो फलों को पकाने वाला प्राकृतिक कारक है। एथीलीन का स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता, इससे पका फल उपभोग के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है।


कितना पोषक है आपका आम
आम पोषक तत्वों जैसे विटामिन-ए से भरपूर होने के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से डिटॉक्सिफाई एजेंट से युक्त भी है। इसके रेशेदार पाचक फाइबर और शर्करा का सही मात्रा में संतुलन है। इसके अलावा आम में फाइटोन्यूट्रिशन और विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इन पोषक तत्वों के अलावा आम 25 तरीके के विभिन्न कारीटोनाइड से युक्त है जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को दुरूस्त रखते हैं और रोगों को जन्म देने वाले कीटाणुओं से सुरक्षा भी प्रदान करते हैं।

कार्बाइड से पके आम से सेहत का नुकसान
बाज़ार की मांग के अनुसार आम की पर्याप्त मात्रा समय पर पक कर तैयार नहीं हो पाती, ऐसे में इसे एक रसायन कैल्शियम कार्बाइड की मदद से पकाया जाता है। हालांकि इससे पकाने में आम में आर्सेनिक एवं फॉस्फोरस के अंश रह जाते हैं। यह बेहद प्रतिक्रियाशील रसायन है, जो नमी के सम्पर्क में आने पर एसीटिलीन गैस पैदा करता है। एसीटिलीन मनुष्य के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और मस्तिष्क को होने वाली ऑक्सीजन की आपूर्ति कम कर देता है, यह मुंह में अल्सर, पेट में जलन और यहां तक कि फूड पॉइज़निंग का कारण भी बन सकता है।

दरअसल, आम जब प्राकृतिक तरीके से पकता है तो इसमें नमी की मात्रा तकरीबन 7-10 फीसदी तक कम हो जाती है और आम का वज़न भी कम हो जाता है। इस नुकसान से बचने के लिए भी कार्बाइड से आम पकाने का इस्तेमाल किया जाने लगा है जो सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है।
शान्तनु भट्टाचार्यजी

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