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जानिए नींद में बोलने के लक्षण, कारण और इलाज

कई लोगों को नींद में बोलने की आदत होती है। उन्‍हें खुद तो इस बात का एहसास नहीं होता है लेकिन आसपास के लोगों को इसकी वजह से परेशानी झेलनी पड़ती है। अगर आप या आपके किसी करीबी को नींद में बात करने की आदत है तो इसके लक्षण, कारण और इलाज जरूर जान लीजिए।

नवभारतटाइम्स.कॉम 14 Apr 2020, 2:04 pm
नींद में बात करना या बोलना नींद से जुड़ा एक विकार है जिसे स्‍लीप डिसऑर्डर कहा जाता है। चिकित्‍सकों को नींद में बात करने के बारे में ज्‍यादा जानकारी नहीं है। वहीं जो लोग नींद में बात करते हैं उन्‍हें इस बात का एहसास ही नहीं होता है और उन्‍हें अगले दिन कुछ याद भी नहीं रहता है। हालांकि, नींद में बात करने का कोई नुकसान नहीं होता है। आइए जानते हैं नींद में बोलने के कारण और लक्षण के बारे में।
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जानिए नींद में बोलने के लक्षण, कारण और इलाज


​नींद में बात करने के कारण

तनाव, डिप्रेशन, नींद की कमी, दिन के समय थकान रहना, शराब या किसी दवा की लत, बुखार या दवा के कारण नींद में बात करने की आदत हो सकती है। अगर किसी व्‍यक्‍ति के परिवार में नींद में बोलने की आदत रही है तो इस वजह से भी यह स्‍लीप डिसऑर्डर हो सकता है। दौरे या मानसिक विकार से ग्रस्‍त व्‍यक्‍ति को भी यह दिक्‍कत हो सकती है।

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​नींद में बोलने के लक्षण

जो लोग नींद में बात करते हैं उन्‍हें दिन के समय बहुत नींद आती है और रात में आसानी से नींद नहीं आ पाती है। वहीं कुछ लोग कभी-भी सो जाते हैं जैसे कि कार चलाते समय।

इसके अन्‍य लक्षणों में सांस लेने के तरीके में बदलाव या सोने के दौरान अचानक से हिलने का एहसास होता है। समय पर नींद न आना या न उठ पाना भी स्‍लीप डिसऑर्डर का लक्षण है।

​किसे है ज्‍यादा खतरा?

यह समस्‍या किसी भी व्‍यक्‍ति को किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन बच्‍चों और पुरुषों में इसे ज्‍यादा देखा जाता है। इसके अलावा बीमार रहने वाले, बुखार, शराब पीने, तनाव और मानसिक विकार की स्थिति में भी व्‍यक्‍ति को नींद में बोलने की आदत पड़ सकती है। स्‍लीप एप्निया, नींद में चलने और बुरे सपने आने की स्थिति में भी नींद में बोलने की समस्‍या हो सकती है।

​नींद में बोलने के चरण

पहला और दूसरा चरण: इसमें व्‍यक्‍ति ज्‍यादा गहरी नींद में नहीं होता है और उसे आसानी से अपने द्वारा बोले गए शब्‍द समझ आ जाते हैं।

तीसरा और चौथा चरण: इन चरणों में व्‍यक्‍ति गहरी नींद में होता है और उसकी बात को समझना मुश्किल होता है। ऐसा लगता है कि व्‍यक्‍ति नींद में बड़बड़ा रहा है।

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​कब गंभीर होती है स्थिति

अगर महीने में एक बार से कम नींद में बात करने की दिक्‍कत हो तो इसे सामान्‍य समझा जाता है। वहीं हफ्ते में एक बार ऐसा होने को मध्‍यम मामलों में गिना जाता है। इससे बाकी लोगों को ज्‍यादा दिक्‍कत नहीं होती है। यदि रोज रात को व्‍यक्‍ति नींद में बात करे और इससे बाकी लोगों को परेशानी हो तो इस स्थिति को गंभीर मामलों में रखा जाता है।

नींद में बोलने की बीमारी का इलाज

नींद में बोलने की समस्‍या का अब तक कोई इलाज नहीं मिल पाया है लेकिन स्‍लीप एक्‍सपर्ट या स्‍लीप सेंटर की मदद से इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। स्‍लीप एक्‍सपर्ट यह सुनि‍श्चित करते हैं कि रात को व्‍यक्‍ति को पर्याप्‍त आराम मिले।

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इन बातों का ध्‍यान रखें

इसके अलावा शराब से दूर रहें, रात के समय गरिष्‍ठ भोजन न करें और रोज एक ही समय पर सोएं एवं उठें। इन बातों का ध्‍यान रखकर आप नींद में बोलने की परेशानी से बच सकते हैं।

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