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Lung cancer के लक्षणों को स्टेज 1 में ही दबा देंगे 7 उपाय, डॉ. ने माना-फेफड़ों की गंदगी निकाल देंगे ये 4 फूड

How can i improve lung health: उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारे फेफड़ों के लिए काम करना मुश्किल होता जाता है। वृद्ध लोगों में निमोनिया, कोविड-19, फेफड़े का कैंसर, दमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी फेफड़े की अन्य बीमारियां होने का खतरा भी काफी अधिक होता है।

Authored byउस्मान खान | नवभारतटाइम्स.कॉम 7 Oct 2022, 10:31 am
साल 2020 में कैंसर दुनिया भर में होने वाली मौतों में से एक प्रमुख कारण रहा। अन्य प्रकार के कैंसर की तरह फेफड़े का कैंसर (Lung Cancer) तब ही विकसित होता है जब कोशिकाओं के विभाजन और वृद्धि की सामान्य प्रक्रिया में बाधा आती है जिसकी वजह से असामान्य और अनियंत्रित वृद्धि होती है। कोशिकाओं के बढ़ते जाने से ट्यूमर की तरह दिखने वाला कोशिकाओं का एक समूह विकसित हो जाता है।
नवभारतटाइम्स.कॉम doctor share 7 easy tips how to cure lung cancer stage 1 and 5 foods for healthy and strong lungs
Lung cancer के लक्षणों को स्टेज 1 में ही दबा देंगे 7 उपाय, डॉ. ने माना-फेफड़ों की गंदगी निकाल देंगे ये 4 फूड


फेफड़ों का कैंसर कैसे होता है? फेफड़े का कैंसर कई वर्षों के दौरान विकसित हो सकता है। धूम्रपान, फेफड़े के कैंसर का सबसे प्रमुख कारण होता है। कई लोग जिन्हें सिगरेट पीने की आदत होती है या वे उन लोगों के संपर्क में रहते हैं या इसके कुछ तत्वों की वजह से व्यक्ति के फेफड़ों में पैथोलॉजिकल बदलाव होने लगते हैं जो लंबे समय तक जारी रहते हैं। इन बदलावों की वजह से कैंसर वाला ट्यूमर फेफड़े में विकसित हो सकता है।

दिल्ली स्थित अपोलो कैंसर सेंटर इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ पीके दास आपको बता रहे हैं कि फेफड़ों के कैंसर से कैसे बचा जा सकता है और उन्हें कैसे स्वस्थ व मजबूत बनाया जा सकता है।

स्मोकिंग के बिना भी होता है लंग कैंसर

दुनिया भर में हुए अध्ययनों से पता चलता है कि 25 फीसदी ऐसे लोगों को फेफड़े का कैंसर हो जाता है जो धूम्रपान नहीं करते हैं। 65 वर्ष से ज़्यादा उम्र के तीन में से दो लोग फेफड़े के कैंसर से पीड़ित हैं। व्यक्ति के जीवन को लेकर पैदा हुए खतरे को कम करने के लिए ज़रूरी है कि फेफड़े के कैंसर का उचित जांच के माध्यम से जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी पता लगाया जा सके।

फेफड़ों की जांच है जरूरी

फेफड़ों की जांच कैसे की जाती है? फेफड़ों की जांच से मौत के मामलों को कम किया जा सकता है। इससे बीमारी का पता उस चरण में लगाया जा सकता है जब उसका उपचार संभव हो। 80 फीसदी मामलों में फेफड़े के कैंसर का पता बिल्कुल शुरुआती स्तर पर ही लगाया जा सकता है। जांच की वजह से कैंसर का पता पहले ही लगा लेना और पीड़ित व्यक्ति का उपचार करना संभव हो पाएगा।

उपचार में न करें देरी

फेफड़ों के कैंसर का निदान क्या है? शुरुआती उपचार से कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी कराने की ज़रूरत कम हो जाएगी। हो सकता है कि कई लोगों को जोखिम भरी चीज़ों से दूर रहने की सलाह दी जाए जिससे कैंसर विकसित होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है या फिर उन्हें बीमारी की गंभीरता का पूरी तरह अहसास होने से बचाया जा सकता है।

डॉक्टर से राय लें

यह वास्तविकता है कि फेफड़े का कैंसर जानलेवा हो सकता है, लेकिन जिन लोगों में इस बीमारी का पता समय से चल जाता है, उनके बचने की उम्मीद काफी बढ़ जाती है। जिन लोगों में फेफड़े का कैंसर होने का खतरा अधिक होता है वे समय-समय पर अपनी जांच कराने पर विचार कर सकते हैं। इससे लक्षणों का समय से पता लगाने में मदद मिल सकती है और कैंसर के फैलने से पहले ही थेरेपी कराई जा सकती है। ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसे यह चिंता हो कि उसे फेफड़े का कैंसर हो सकता है, उन्हें मार्गदर्शन के लिए किसी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

इन चीजों को डाइट में करें शामिल

इसके अलावा, फेफड़ों को स्वस्थ्य रखने के लिए सेहतमंद जीवनशैली जीना बहुत ही ज़रूरी है। अधिक एंटीऑक्सीडेंट्स वाली चीज़ें जैसे कि ब्लूबेरी, ऐस्पैरेगस, सेब और बोरोकली का सेवन करने से खराब तत्वों को बाहर निकालने और फेफड़ों को सेहतमंद बनाए रखने में मदद मिलती है।

एक्सरसाइज भी है जरूरी

व्यायाम करने का समय बढ़ाएं। व्यायाम करने से पूरा कार्डियो-रेस्पिरेटरी सिस्टम मज़बूत होता है। इससे फेफड़े के काम करने में पूरी तरह सुधार नहीं होता है, लेकिन इससे आपको अपने फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी, आपके लिए सांस लेना आसान हो जाएगा और आपको ज़्यादा ऑक्सीजन लेने का मौका मिलेगा।

शराब और स्मोकिग से बचें

धूम्रपान करना छोड़ दें क्योंकि अनुमानों के मुताबिक सिगरेट पीने से पुरुषों में फेफड़े के कैंसर का खतरा 90 फीसदी और महिलाओं में 70-80 फीसदी तक बढ़ जाता है। लगातार धूम्रपान करने से व्यक्ति में हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

लेखक के बारे में
उस्मान खान
"उस्मान खान नवभारत टाइम्स में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। डिजिटल मीडिया में 12 सालों से काम कर रहे हैं। समाचार और मनोरंजन से अपना करियर शुरू किया और और पिछले 7 साल से हेल्थ जर्नलिज्म से जुड़े हुए हैं। इन्हें हेल्थ और फिटनेस पर लिखना पसंद है। हेल्थ एंड फिटनेस के मामले में हमेशा नई चीजें सीखने के लिए उत्सुक रहते हैं। डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, यूरिक एसिड, ओरल हेल्थ, कैंसर, थाइरोइड, किडनी डिजीज, हार्ट डिजीज, लीवर डिजीज, गैस्ट्रिक प्रॉब्लम्स और रियल वेट लॉस स्टोरीज जैसे डेली लाइफस्टाइल से जुड़े टॉपिक्स पर लिखना ज्यादा पसंद है। हर मर्ज का इलाज दवा नहीं है और यही वजह है कि ये अपने घरेलू, प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उपचारों पर आधारित लेखों के जरिये पीड़ितों का ध्यान इस ओर खींचने का प्रयास करते हैं। दवाओं के विकल्प के तौर पर लिखे गए इनके सभी लेख वैज्ञानिक शोधों, विशेषज्ञों और चिकित्सकों की राय पर आधारित होते हैं। अगर बात करें निजी जीवन की, तो इन्हें खाली समय में फिल्में देखना और पहाड़ों की सैर करना पसंद है। किसी को भी अपने आर्टिकल को पढ़ने पर मजबूर कर देना इनकी सबसे बड़ी ताकत है।"... और पढ़ें

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