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वायु प्रदूषण से बच्चों में बढ़ रहीं मानसिक बीमारियांः स्टडी

रिसर्चर्स ने पाया कि वंचित तबके के बच्चों में वायु प्रदूषण का असर ज्यादा हो सकता है और खासकर उनमें व्यग्रता और आत्महत्या की प्रवृत्ति जैसी बीमारियां ज्यादा हो सकती हैं।

भाषा 25 Sep 2019, 7:39 pm
बचपन में वायु प्रदूषण का सामना करने से किशोरावस्था में अवसाद, व्यग्रता और अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। तीन नई स्टडीज में यह बात उभर कर आई है। 'एन्वायरमेंटल हेल्थ पर्सपेक्टिव्स' पत्रिका में छपी एक स्टडी में पाया गया कि कम समय के लिए वायु प्रदूषण की चपेट में आने से बच्चों में मानसिक समस्याएं एक से दो दिनों बाद आ सकती हैं।
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अमेरिका के सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स सहित अन्य रिसर्चर्स ने पाया कि वंचित तबके के बच्चों में वायु प्रदूषण का असर ज्यादा हो सकता है और खासकर उनमें व्यग्रता और आत्महत्या की प्रवृत्ति जैसी बीमारियां ज्यादा हो सकती हैं।

सिनसिनाटी चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल मेडिकल सेंटर के कोल ब्रोकैम्प ने कहा कि इस स्टडी में पहली बार बाहरी वायु प्रदूषण के स्तर और बच्चों में व्यग्रता एवं आत्महत्या की प्रवृत्ति जैसी मानसिक बीमारियों के बीच संबंध पाया गया।

ब्रोकैम्प ने कहा कि इन स्टडीज की पुष्टि के लिए ज्यादा अनुसंधान की जरूरत है। जिन बच्चों में मानसिक बीमारी से जुड़े संकेत दिख रहे हों, उन्हें रोकने में यह मददगार हो सकता है।

अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि हाल में सिनसिनाटी चिल्ड्रेन्स की दो अन्य स्टडी प्रकाशित हुई, जिनमें वायु प्रदूषण का संबंध बच्चों की मानसिक बीमारी से जुड़ा पाया गया।

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