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आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने वाली 100 साल की दादी से सीखें, जीना किसे कहते हैं

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनों के साथ ही क्या बल्कि खुद की ही जिंदगी को खुलकर जीना भूल से जाते हैं। ऐसे में ये 100 साल की दादी हम सभी के लिए प्रेरणा हैं।

नवभारतटाइम्स.कॉम 19 Jan 2021, 10:41 am
'पिज्जा को भला कौन मना कर सकता है?' 100 साल की उम्र में 20 की लड़की जैसे बिंदास ऐटिट्यूड के साथ जीने वाली दादी इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई है। लाइफ से लेकर रिलेशनशिप को लेकर उनकी बिंदास बातें सुन लगेगा ही नहीं कि वह आज से 100 साल पहले जन्मी थीं। इनकी कहानी और जीने का अंदाज ऐसा है, जिससे आप और हम सभी बड़ी सीख लेते हुए, हैपी लाइफ का असली मंत्र सीख सकते हैं। (फोटो साभार: इंस्टाग्रामhumansofbombay)
नवभारतटाइम्स.कॉम 100 year old dadi is an example of how life should be lived happily and with love
आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने वाली 100 साल की दादी से सीखें, जीना किसे कहते हैं


आजादी की जंग में लिया हिस्सा

ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे के पेज पर शेयर की गई पुणे की दादी की स्टोरी, लोगों का दिल छू रही है। इस 100 साल की महिला ने गांधी जी को जेल जाते देखा है, तो उन्होंने आजादी की जंग में भी हिस्सा लिया है। उन्होंने कोरोना से पहले भी ऐसे हालात देखे हैं, जो मौजूदा समय से काफी ज्यादा खराब थे। यह वह समय था जब उन्हें पहली बार पता चला कि 'महामारी' क्या होती है?

लोग क्या कहेंगे से फर्क नहीं पड़ा

एक ओर जहां व्यक्ति 'लोग क्या कहेंगे?' सोच-सोचकर चिंता में पड़ा रहता है, तो दूसरी ओर इस दादी ने कभी इसकी फिक्र नहीं की। अपनी कहानी शेयर करते हुए उन्होंने बताया कि उनके पति थोड़े कड़क मिजाज के थे और बच्चों को भी अनुशासन में रखते थे, लेकिन वह इसके ठीक उलट थीं। वह अपने बच्चों को खुलकर जीने देना चाहती थीं। इस वजह से उनके आसपास की महिलाएं उन्हें बातें भी सुनाती थीं।

यहां तक कि जब उन्होंने घर में टीवी लाने का फैसला किया, तब भी उन्हें कहा गया कि वह बच्चों को बिगाड़ देंगीं। हालांकि, उन्होंने किसी की बातों पर ध्यान नहीं दिया और जो चाहती थीं वही किया।

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समय के साथ चलना और ढालना

दादी ने बताया कि वह एक चीज में विश्वास रखती हैं और वह है 'समय के साथ चलना और उसके मुताबिक ढलना'। उन्होंने साझा किया कि कैसे वह अपने बच्चों के साथ नए जमाने के मुताबिक खुद को ढालती रहीं और उनके साथ कदम मिलाती रहीं। एक उदाहरण देते हुए दादी ने बताया कि उनके पति को डिनर के लिए बाहर जाना पसंद नहीं था, लेकिन उन्होंने इस पर जोर दिया और बच्चों के साथ पिज्जा व बर्गर इंजॉय किए। दादी ने कहा कि 'भला पिज्जा को कोई ना कैसे कह सकता है?' (सांकेतिक तस्वीर:istockfromgettyimages)

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कास्ट को प्यार के आड़े न आने देना

दादी ने अपने बेटे से जुड़ा किस्सा भी शेयर किया। उन्होंने बताया कि पहले के समय में दूसरी कास्ट में शादी करने की सोचना भी मुद्दा बन जाता था। ऐसे में जब उनके बेटे ने अन्य कास्ट की लड़की पसंद की, तो वह सीधे उनके पास आया। दादी ने बताया कि उनके लिए प्राथमिकता थी कि उनका बेटा खुश रहे और वह जानती थीं कि उसने अच्छी लड़की ही चुनी होगी। इसलिए उन्होंने किसी और की परवाह किए बगैर 6 महीने में दोनों की शादी करवा दी। (सांकेतिक तस्वीर:istockfromgettyimages)

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जियो और जीने दो

जीवन के हर रंग में खुद को ढाल लेने वाली इस दादी का जीने का सिद्धांत भी साधारण लेकिन प्रेरणा देने वाला है। वह 'जियो और जीने दो' की सोच में विश्वास रखती हैं। उन्होंने बताया कि यही वजह है कि उनके बच्चों से लेकर ग्रैंडकिड्स तक उनसे इतना प्यार करते हैं। दादी ने ये भी बताया कि इस साल ही वह 100 की हुई हैं और इस मौके पर उन्हें महीनेभर के लिए चॉकलेट्स दी गईं। उन्होंने अपने बेटे से प्रॉमिस भी लिया है कि 101 की होने पर उन्हें बड़ी पार्टी दी जाए। दादी ने आखिर में कहा कि 'आखिर जिंदगी बड़ी और लंबी, दोनों होनी चाहिए'।(सांकेतिक तस्वीर:istockfromgettyimages)

ये दादी है बड़ी प्यारी

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