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'मुझे तलाकशुदा कहा गया और गाली दी गई' काम्या पंजाबी को जब सुनने पड़े थे ताने, क्यों अक्सर महिलाओं पर ही लगती है ऐसी तोहमत?

काम्या पंजाबी (Kamya Punjabi) ने पिछले दिनों बताया था कि उन्हें बिग बॉस के घर में तलाकशुदा होने के ताने मिलते थे, जो अक्सर औरतों को ही झेलना पड़ता है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 20 Oct 2021, 5:47 pm
इस बात में कोई दोराय नहीं है कि समाज में महिलाओं को दोहरी मानसिकता का सामना अब भी करना पड़ता है। शादी के बाद होने वाली हर एक घटना के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराने से लेकर बच्चा पैदा करने जैसे सवालों से उनका स्वागत करने तक, यह सब बातें बताती हैं कि किस तरह आज भी औरतें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में लगातार संघर्ष करते हुए जी रही हैं। ऐसा ही कुछ पिछले दिनों काम्या पंजाबी ने भी बताया था कि उन्हें अपनी पहली शादी के टूटने और तलाक को लेकर कैसे ताने सुनने पड़े थे। काम्या ने जो बताया उसमें उनका दर्द साफ झलक रहा था, हालांकि अब वह अपनी दूसरी शादी में पति शलभ डांग के साथ बेहद ही खुश हैं। (फोटोज साभार - इंडिया टाइम्स)
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'मुझे तलाकशुदा कहा गया और गाली दी गई' काम्या पंजाबी को जब सुनने पड़े थे ताने, क्यों अक्सर महिलाओं पर ही लगती है ऐसी तोहमत?



तलाकशुदा होने के मिले थे ताने

दरअसल, पिछले दिनों बिग बॉस 15 में जय भानुशाली और प्रतीक सहजपाल के बीच भयंकर लड़ाई और अपशब्दों का प्रयोग देखने को मिला था। जिसके बाद काम्या ने अपने विचार रखे और एक ट्विटर यूजर ने उनके और अरमान की कुछ बातों को जिक्र कर दिया। इसके बाद जवाब में एक्ट्रेस ने भी ट्वीट करते हुए लिखा, अरमान ने सिर्फ तलाकशुदा नहीं कहा था, बल्कि कई सारी मां-बहन की गाली भी दी थी। मैं उस वक्त उस पर हंस रही थी, लेकिन बाद में अकेले में काफी रोई थी।'

काम्या ने अपने साथ हुए बुरे बर्ताव का जो जिक्र किया, ऐसा सहने वाली सिर्फ वह ही नहीं बल्कि ज्यादातर महिलाएं हैं। जिन्हें अक्सर तलाक होने, दूसरी शादी का फैसला लेने या बच्चा न होने के कारण ताने दिए जाते हैं। समाज में अब भी महिलाओं को कटघरे में खड़ा किया जाता है, वहीं पुरुषों को अपनी तरह से किसी भी तरह का फैसला लेने का पूरा अधिकार है। यह बताता है कि पुरुषवादी समाज में महिलाओं को उनके हिस्से का सम्मान मिलना कितना दूर है।

​तलाकशुदा महिला होने में नहीं कोई बुराई

एक रिश्ते को संभालने और चलाने की जिम्मेदारी पति और पत्नी दोनों की होती है, लेकिन तलाक होने के बाद तानों की बारिश महिलाओं के हिस्से ही आती है। समाज आज भी एक कपल के तलाक को आसानी से एक्सेप्ट नहीं कर पाता है। इस बात में कोई शक नहीं है कि किसी भी रिश्ते के टूटने का दुख सबसे ज्यादा उन दो पार्टनर्स को होता है, जिन्होंने एक-दूसरे के साथ कई सारे सपने संजोए होते हैं।

हालांकि अगर किसी कारणवश कपल्स के बीच दूरियां आ जाएं और वे एक साथ रहने में कम्फर्ट न महसूस करें तो उनका अलग हो जाने में कोई बुराई नहीं। मगर इसके लिए किसी को भी जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह से गलत होगा। ऐसे में महिलाओं को तलाकशुदा का ताना देना पूरी तरह से बेईमानी जैसा है। आपको यह समझना होगा कि डिवोर्सी होना कोई बुरा नहीं है फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष हो, यह सिर्फ एक फैसला है जो दो लोगों द्वारा अपने भविष्य की भलाई की लिए लिया जाता है।

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​औरतों के चरित्र पर सवाल क्यों?

ऐसा तो आपने अक्सर देखा होगा कि जब भी पति-पत्नी के बीच बड़ा लड़ाई-झगड़ा होता है, तो सबसे पहले उस महिला पर सवाल उठाए जाते हैं। ससुरालवाले, रिश्तेदार और समाज के लोग औरतों के कैरेक्टर को जज करने लगते हैं। वहीं अगर बात तलाक की हो, तब तो तानों की बौछार करके उस महिला का जीना दूभर कर देते हैं। हालांकि ऐसा जरूरी नहीं कि अगर हस्बैंड-वाइफ ने अलग होने का फैसला लिया हो, तो उसमें महिला ही जिम्मेदार हो। किसी भी रिश्ते को संभालने की जिम्मेदारी दोनों पार्टनर्स की होती है, ऐसे में हर बार सिर्फ महिलाओं को दोषी ठहराना या उनके चरित्र पर सवाल उठाना कहीं से भी ठीक नहीं होता।

पुरुषों से दोस्ती पर होती है परेशानी

भले ही आज स्कूलों में लड़का-लड़की सब एक साथ पढ़ते हैं, मगर उन्ही की दोस्ती से समाज को अब भी ऐतराज है। खासतौर से शादी के बाद ऐसा होने पर सोसाइटी और ससुरालवाले महिलाओं की बुरी श्रेणी में डाल देते है। पति भले ही ऑफिस की अपनी किसी महिला दोस्त को डिनर पर इनवाइट कर लें, मगर पत्नी द्वारा ऐसा किए जाने पर उन्हें तुरंत गलत नजरों से घूरा जाने लगता है। समाज की इसी दोहरी मानसिकता के कारण हमेशा महिलाओं को एक प्रेशर में जीना पड़ता है। वहीं कई बार तनाव, डिप्रेशन और रिश्तों में दूरी का कारण भी यही बातें और ताने बन जाते हैं।

​महिलाओं से ढेरों उम्मीद है कारण

इंडियन सोसाइटी में मैरिड विमन के लिए कई दायरे तय किए गए हैं। शादी के बाद एक लड़की की जवाबदेही उसके पति से लेकर ससुराल वालों तक को रहती है। उससे ढेरों उम्मीदें की जाती हैं, जिसमें खाना बनाने से लेकर पुरानी लाइफस्टाइल को बदलना भी शामिल है। सास-ससुर बहू से यह उम्मीद करते हैं कि वह सुबह के नाश्ते से लेकर रात के डिनर तक सब कुछ संभाले। अपने कामकाज को प्राथमिकता न देते हुए सारा ध्यान पति और परिवार पर दे। वही सूट-साड़ी में रहे, दोस्तों के साथ पार्टी न करे और अपने पति की हर एक बात माने।

इन उम्मीदों के बाद जब कपल्स अपने रिश्ते को नहीं निभा पाते हैं, तो सबसे पहले उस महिला का निशाना बनाया जाता है। उसे ढेरों उम्मीदों पर खरे न उतरने के आरोपों से गुजरना पड़ता है। जबकि यहां यह समझने की जरूरत है कि शादी के पहले हो या बाद, एक महिला की अपनी एक सोच, विचारधारा, पहनावा और लाइफस्टाइल भी होता है जिसे बदलने का अधिकार सिर्फ उसे ही होता है।

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