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मेरी कहानी: हां, मुझे मेरी मां बिल्कुल पसंद नहीं पर मैं गलत नहीं

एक लड़की बस इतनी सी ख्वाहिश रखती है कि उस बस थोड़ा सा प्यार मिल जाए, लेकिन उसके नसीब में तो ये भी नहीं लिखा है।

Curated byआयशा | नवभारतटाइम्स.कॉम 31 Aug 2021, 5:15 pm
आप में से कई लोग मेरे इस लेख को पढ़कर मुझसे नफरत और मेरी आलोचना कर सकते हैं। हालांकि, सच तो ये है कि मुझे इसे लिखने के लिए काफी हिम्मत की जरूरत पड़ी। हर छोटी लड़की की तरह मेरा भी यही सपना था कि मैं अच्छी पढ़ाई करके अच्छी जॉब करूं, शादी करूं, मेरे भी बच्चे हों और उसके बाद मैं एक स्टेबल लाइफस्टाइल जी सकूं। लेकिन मुझे क्या पता था कि मेरी जिंदगी इतनी सामान्य नहीं होने वाली है। मैं आज 32 साल की हूं और जल्द ही 33 की हो जाऊंगी। मैं अभी भी सिंगल हूं और दर्दनाक जिंदगी जी रही हूं। मेरे पास कोई ऐसा भी नहीं है, जिससे मैं बात कर सकूं। (सभी सांकेतिक तस्वीरें: इंडियाटाइम्स)
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मेरी कहानी: हां, मुझे मेरी मां बिल्कुल पसंद नहीं पर मैं गलत नहीं


पापा थे तो सब ठीक था

मैं चार बहनों में तीसरे नंबर की बहन हूं। मैं जब मास्टर्स के आखिरी साल में थी, तब तक मुझे मेरी जिंदगी परफेक्ट लगा करती थी, क्योंकि तब मेरे पिता मेरे साथ थे, जो हमेशा मुझे आगे बढ़ने व सपने देखने के लिए प्रेरित करते थे। मेरे कुछ दोस्त थे जो परिवार की सदस्य की तरह थे। उस दौरान मैं पढ़ाई में व्यस्त और हमेशा आत्मविश्वास से भरी रहती थी। मास्टर्स कम्प्लीट करने के बाद मैं करियर शुरू करने को लेकर काफी उत्साहित थी। हालांकि, जब मेरे पिता का अचानक निधन हुआ तो मेरे लिए वो बड़ा सदमा था। उनके जाने के बाद मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। मेरी जिंदगी पहली जैसी आसान नहीं रही।

मां मुझे प्रताड़ित करती हैं, उन्हें सिर्फ दूसरी बेटियों की फिक्र है

पिता के जाने के बाद पहली बार मेरा मेरी मां से पहली बार सीधा पाला पड़ा। अगर मैं अपने बचपन के बारे में सोचूं, तो मुझे उनके साथ कोई जुड़ाव याद नहीं आता। मुझे पूरी जिंदगी उन्होंने इग्नोर किया और सिर्फ पापा की मौजूदगी इस चीज को उभरकर सामने नहीं आने देती थी। उनके जाने के बाद मेरे लिए घर में रहना तक मुश्किल होने लगा। मेरी मैं लगातार मेरे साथ दुर्व्यवहार और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित करती रहती हैं।

मां को तो सिर्फ अपनी बड़ी बेटी की फिक्र होती है। मुझे तो ये भी याद नहीं कि उन्होंने मुझसे आखिरी बार बात कब की थी। मेरी बहन जब घर आती है, तो उसके लिए बढ़िया खाना बनाया जाता है और सब खुश दिखते हैं। वहीं मुझे कमरे में भेज दिया जाता है। बहनों के सामने मां मेरी जमकर बुराई करती हैं। दीपावली और संक्रांति पर मुझे छोड़कर मेरी सारी बहनें नए कपड़े पहनती थीं। और मैं जब कहती कि मुझे भी कपड़े चाहिए तो मां मुझसे कहतीं कि तुम कमाती हो, तो अपने लिए खुद खरीद लो।

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मैं बस बिल भरने के लिए हूं

एक बार मेरी मां ने मुझसे बहन की प्रेग्नेंसी भी छिपाई। मैंने जब पूछा कि उनका पेट क्यों बढ़ा हुआ है, तो वह कहतीं कि ये सिर्फ ब्लोटिंग है। अपनी ही दूसरी बेटी से भला ये सब कौन छिपाने की कोशिश करता है? मैं घर से जुड़ी किसी चीज में शरीक नहीं की जाती। मेरा बस इतना ही काम है कि मैं वहां रहूं और सबके बिल भरती रहूं।

अगर मैं खुद से शामिल होने की कोशिश करूं, तो मेरी मां मुझे बुराभला सुनाती हैं। मेरी बहनों को एक-एक चीज बताई जाती है और वे जो कहती हैं घर में वही होता है। एक बार मुजे कीड़े ने काट लिया और मेरा हाथ नीला पड़ गया। मुझे तुरंत अस्पताल ले जाए जाने की जरूरत थी, लेकिन मां ने मेरी नहीं सुनी। उन्होंने पहले दूसरी बेटी को फोन लगाया और जब उसने कहा कि हॉस्पिटल ले जाना होगा, तब मुझे इलाज मिला।

मैं गलत व्यक्ति तक चुनने को तैयार हो गई

मां मुझे कभी किसी फंक्शन या शॉपिंग आदि पर साथ लेकर नहीं जातीं। मेरे पास तो उनसे जुड़ी कोई ऐसी याद तक नहीं है। वहीं मेरी बहनों को वह हर जगह लेकर जाती हैं। एक बार तो वह मुझे मेरी भांजी के जन्मदिन तक में लेकर नहीं गईं और कहा कि 'आना है तो खुद आओ नहीं तो घर पर बैठो'। मैं जब 30 साल की हुई, तब मैंने निर्णय लिया कि मैं शादी करना चाहती हूं ताकि मेरा खुद को ऐसा परिवार हो जो मुझे प्यार और सम्मान दे। लेकिन मां ने इसमें जरा भी रुचि नहीं दिखाई।

मेरा कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं, जिस वजह से मैं परिवारवालों पर ही कहीं बात करने को लेकर निर्भर हूं। मैंने खुद ही साइट पर रजिस्टर किया और एक शख्स ने संपर्क किया। मुझे वह सही नहीं लगा, लेकिन मैं घर से दूर जाने को इतनी बेताब थी कि मैंने उसे स्वीकार किया और घर आकर मिलने को कहा। बाद में साफ हुआ कि वह एक धोखेबाज है और सिर्फ पैसा चाहता है। ऐसे में रिश्ता टूट गया। अब मैं तीन साल से कोशिश कर रही हूं, लेकिन कोई भी नतीजा सामने नहीं आ रहा।

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इतनी बेताब हो तो खुद जाकर ढूंढ लो लड़का

स्थिति तब और बुरी हुई, जब मुझे पता चला कि मेरी मां खुद से मेरी छोटी बहन के लिए रिश्ता तलाश रही हैं। मैंने जब इसे लेकर उनसे बात की तो उन्होंने कहा कि 'हम तुम्हें हमेशा हर चीज करके नहीं दे सकते। अगर तुम शादी के लिए इतनी बेताब हो, तो खुद जाकर किसी को ढूंढ लो, किसने तुम्हें रोका है? मैं तुम्हारे चक्कर में छोटी वाली को नहीं रोककर रख सकती'।

अब मैं 32 साल की हो चुकी हूं और जल्द ही 33 की हो जाऊंगी। मैं अभी भी सिंगल, इग्नोर्ड, बिना प्यार के और नफरत का शिकार बनी बैठी हूं। मुझे समझ नहीं आता कि आखिर मैंने ऐसा किया क्या है, जो मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है? मुझे सिर्फ थोड़ा सा प्यार और शांति ही तो चाहिए। जब लोग इन साधारण सी उम्मीदों तक को पूरा ही नहीं कर सकते, तो वे बच्चे पैदा ही क्यों करते हैं?

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लेखक के बारे में
आयशा
आयशा बतौर कंटेंट राइटर नवभारत टाइम्स की लाइफस्टाइल टीम के साथ जुड़ी हुई हैं। फैशन, रिलेशनशिप और ब्यूटी जैसे विषयों पर ये अच्छी पकड़ रखती हैं। इन्हें इन टॉपिक्स पर पढ़ते रहना और लिखना पसंद है।... और पढ़ें

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