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MBBS में दाखिले के नाम पर ठगे 20 लाख, क्राइम ब्रांच ने मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर गैंग का भंडाफोड़ किया

एमएएमसी में दाखिला दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले गैंग का भंडाफोड़ पुलिस ने किया है। डीसीपी (क्राइम) राजेश देव ने बताया कि पीड़ित विकास पुरी में रहता हैं और सरकारी स्कूल में टीचर हैं। बेटे को कोटे से एडमिशन दिलवाने का गैंग से झांसा मिलने के बाद वह ठगे गए।

Authored byएनबीटी डेस्क | नवभारत टाइम्स 28 Jun 2022, 3:34 pm
विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (एमएएमसी) में दाखिला दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले गैंग का भंडाफोड़ पुलिस ने किया है। ठगों ने स्पूफिंग के जरिए एमएएमसी और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) के नंबर से कॉल किए, जिससे पीड़ित झांसे में आ गए। गिरोह ने 20 लाख रुपये ऐंठ लिए तो पीड़ित ने 30 मई को केस दर्ज करवा दिया। क्राइम ब्रांच ने मास्टरमाइंड विकास पारस उर्फ आशीष जायसवाल (33) को गिरफ्तार कर लिया है। इससे फर्जी आधार और पैन कार्ड समेत कई दस्तावेज रिकवर किए हैं। वह इकनॉमिक्स में पीएचडी है। पिता सरकारी कर्मचारी थे, जिनकी 2020 में कैंसर और कोविड से मौत हो गई थी।
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पकड़ा गया मास्टरमाइंड


डीसीपी (क्राइम) राजेश देव ने बताया कि इंद्र कुमार रॉय 'इंद्रेश' (52) विकास पुरी में रहते हैं। वह सरकारी स्कूल में टीचर हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि बेटे शिवम रॉय ने 2020 में नीट एग्जाम दिया था। सरकारी कॉलेज में नंबर नहीं आया तो फिर तैयारी में जुट गया। एक दोस्त के जरिए सरकारी कोटे से एडमिशन दिलाने वालों का पता चला। वो दिसंबर 2020 में आशीष जायसवाल, रोहन सिंह और रोहित से मिले। इन्होंने एमएएमसी में सरकारी कोटे से दाखिला दिलाने के नाम पर 20 लाख की डिमांड की।

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स्पूफिंग के जरिए की कॉल: भरोसा जीतने के लिए एमएएमसी और एमसीआई के नंबरों से कॉल किए गए। एमएएमसी से मेल भी भेजे। इसलिए पीड़ितों ने 20 लाख रुपये आशीष के खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपियों ने फोन बंद कर दिए और अंडरग्राउंड हो गए। पुलिस जांच में पता चला कि फोन और ई-मेल स्पूफिंग सॉफ्टवेयर के जरिए किए गए थे। बैंक में दर्ज एड्रेस भी फर्जी निकला। टेक्निकल सर्विलांस और लोकल इंटेलिजेंस के जरिए विकास पारस उर्फ आशीष जायसवाल को मालवीय नगर के शेख सराय से गिरफ्तार कर लिया।

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पूछताछ में विकास पारस ने बताया कि वो कानपुर का रहने वाला है। फर्जी आधार कार्ड के जरिए बैंक खाता खोला था। कोलकाता के एक शराबी आशीष जायसवाल से बंधन बैंक का खाता खरीदा था। साइन की चेक बुक, पेन कार्ड, आधार कार्ड और एटीएम कार्ड ले लिए। आशीष के आधार से छेड़छाड़ कर आईसीआईसीआई बैंक में खाता खोला। इसी में ठगी की रकम मंगवाई जाती थी। वह और फारूकी शिकायतकर्ता से चाणक्यपुरी के कैफे में फर्जी नाम रोहन सिंह और रोहित के तौर पर मिले। तीसरा सहयोगी लव गुप्ता स्पूफिंग के जरिए कॉल और मेल करता था। वह 2019 से एमबीबीएस के नाम पर ठगी कर रहा था। पुलिस बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।
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एनबीटी डेस्क
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