ऐपशहर

दिल्ली की सेहत सुधारने के लिए आज से अस्पतालों में 5 बड़े बदलाव

राजधानी दिल्ली की सेहत सुधारने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार आज 5 बड़े फैसलों पर अमल करने जा रही है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए दोपहर बाद सरकार नए आदेश जारी करने वाली है। इसके तहत दवाओं से लेकर स्टाफ की भर्ती तक पर जोर दिया जाना है।

परीक्षित निर्भय | सांध्य टाइम्स 21 Aug 2017, 3:38 pm
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम kejriwal

राजधानी दिल्ली की सेहत सुधारने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार आज 5 बड़े फैसलों पर अमल करने जा रही है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए दोपहर बाद सरकार नए आदेश जारी करने वाली है। इसके तहत दवाओं से लेकर स्टाफ की भर्ती तक पर जोर दिया जाना है।

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आज दोपहर दिल्ली सचिवालय में सीएम केजरीवाल पहले अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रहे हैं। इसी दौरान विभिन्न सरकारी अस्पतालों में कम पड़ी दवाओं का ब्यौरा उनकी टेबल पर होगा। इस मीटिंग के बाद स्वास्थ्य और वित्तीय विभाग 5 बड़े फैसलों को लेकर मुख्यमंत्री के जरिए आदेश जारी कराएगा।

बता दें कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली के सभी अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों और डायरेक्टर्स की मीटिंग ली थी, जिसमें कई अहम बिंदुओं पर चर्चा की गई थी। इस दौरान केजरीवाल ने डॉक्टरों की सलाह के बाद ये फैसले लिए थे। इन पर आज अंतिम मुहर लगनी है।

1. एक करोड़ की मंजूरी : दिल्ली सरकार ने घोषणा की थी कि सभी अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षक और डायरेक्टर अपने अस्पताल में एक करोड़ रुपये तक का काम करवा सकते हैं। इसमें जरूरी दवाओं से लेकर मशीनों की खरीद और मरम्मत शामिल है। इस फैसले को लिखित तौर पर आज से लागू किया जाना है।

2. स्टाफ की भर्ती: अस्पतालों में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए आज सरकार भर्ती की कागजी कार्रवाई शुरू करने वाली है। दोपहर बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए एलजी के पास भेजा जाएगा। वहां से अनुमति मिलने के बाद अस्पतालों में रिटायर्ड कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। यह नियुक्तियां संबंधित अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक अपने स्तर पर कर सकेंगे।

3. नोडल ऑफिसर: मरीजों को पर्याप्त दवाएं उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली सरकार हर अस्पताल में नोडल ऑफिसर तैनात करने वाली है। इसका आदेश आज स्वास्थ्य विभाग जारी करने वाला है। इसके तहत अस्पताल में दवाएं नहीं मिलने पर मरीज वहां तैनात नोडल ऑफिसर को शिकायत दर्ज करवा सकता है। इन ऑफिसर की जिम्मेदारी होगी कि ये मरीज को 100 फीसदी दवाएं सरकारी अस्पताल से मुहैया करवाए।

4. पुरानी मशीनें: एक और आदेश जारी होना है जिसमें हर अस्पताल में सालों से खराब पड़ी मशीनों को सुधरवाने या बेचकर नई मशीनें खरीदने का अधिकार चिकित्सा अधीक्षक को सौंपा जाना है। सरकार की मंशा है कि छोटी छोटी विकास की समस्याएं सरकारी सिस्टम की वजह से लंबित पड़ी रहती हैं, इसलिए अब से हर अस्पताल का अधीक्षक स्वयं इन खामियों को दूर कर सकता है।

5. GeM: सुविधाएं आसान बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने एक और फैसला लिया है। अब से कोई भी अस्पताल का सामान सरकारी ई मार्केटिंग की वजह से अधर में नहीं लटकेगा। वित्तीय विभाग आज इस संबंध में दिशा निर्देश जारी करने वाला है। मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर के बाद इसे सभी अस्पतालों को भेज दिया जाएगा। बता दें कि GeM केंद्र सरकार का ऐसा ई मंच है, जहां कई तरह के टेंडर किए जाते हैं। अभी नियम था कि अगर ई मार्केटिंग पर उपकरण मौजूद हैं तो उसके लिए अलग से खरीदी नहीं हो सकती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

100 फीसदी दवाओं का इंतजार लंबा

स्वास्थ्य विभाग के एक सीनियर ऑफिसर ने कहा, 'मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सभी अस्पतालों को 100 फीसदी दवाओं का कोटा पूरा करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि सीपीए को भी दवाओं की लिस्ट तैयार करने का आदेश दिया है। 31 अक्टूबर तक पूरी सूची तैयार करने और उन दवाओं की खरीदी करने का प्रोसेस पूरा करने की डेडलाइन दी गई है। इसके बाद एक नवंबर से दिल्ली के हर एक अस्पताल में मरीज को 100 फीसदी दवा उपलब्ध होगी। अगर ऐसा नहीं है तो मरीज अस्पताल के खिलाफ शिकायत दे सकता है।'

सान्ध्य टाइम्स व्यू

मरीजों को बेहतर चिकित्सीय सेवाएं देने की दिशा में दिल्ली सरकार के ये फैसले सुकून भरे दिख रहे हैं, बशर्ते इन पर अमल भी इसी मुस्तैदी से हो। पहले भी न जाने कितनी बार सरकार ने आम आदमी को बेहतर सुविधाएं दिलाने के वादे और प्लानिंग लॉन्च की हैं, लेकिन हकीकत यह है कि सरकारी अस्पतालों में आज भी समस्याओं का जमघट है और मरीज भगवान भरोसे हैं। वहां जाने से लोग डरते हैं। रुपयों के अभाव में ही लोग सरकारी अस्पतालों का रुख करते हैं। योजनाओं को सफल करने के लिए ऐसा खूंटा गाड़ना पड़ेगा कि जब तक ये अमल में न आ जाएं, सरकार चैन से न बैठे।

अगला लेख

Metroकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर