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Weather News: मॉनसून बदल रहा ट्रेंड...दिल्ली में उमस और गर्मी, मुंबई में बारिश के आसार

Weather Update Today: देश में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। दिल्ली में बारिश के बादल छंटते दिख रहे हैं। वहीं, महाराष्ट्र के कई इलाकों में मध्यम से तेज बारिश की संभावना जताई गई है। कोलकाता से बेंगलुरु तक आसमान में बादलों का डेरा है। कई स्थानों पर मध्यम से तेज बारिश की संभावना जताई गई है।

Edited byराहुल पराशर | नवभारत टाइम्स 9 Aug 2022, 5:20 am
नई दिल्ली: मॉनसून इस बार टेढ़ी चाल चल रहा है। कई इलाकों में मॉनसून का असर देखने को मिल रहा है। वहीं, देश के कई इलाकों में लोगों को अब भी तेज बारिश का इंतजार है। बारिश के कारण खरीफ फसलों को खासा नुकसान झेलना पड़ रहा है। पिछले सप्ताह दिल्ली में बारिश जैसी बनी स्थिति के बाद इस पूरे सप्ताह में आसमान में बादल कम ही दिखने का अनुमान है। नतीजा लोगों को उमस वाली गर्मी झेलनी पड़ेगी। 35 से 36 डिग्री के बीच रहने वाला तापमान लोगों के पसीने छुड़ाएगा। वहीं, भारतीय मौसम विभाग ने महाराष्ट्र में बारिश की संभावना जताई है।
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मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, प्रदेश के कई हिस्सों में मध्यम से तेज बारिश के आसार जताए गए हैं। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा भी चलेगी। बारिश का प्रभाव ठाणे, मुंबई, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग इलाके में सबसे अधिक देखने की भविष्यवाणी की गई है। दूसरी तरफ, दिल्ली में मंगलवार को गर्मी और उसम का प्रभाव बढ़ने की आशंका जताई गई है। दिल्ली और एनसीएआर के इलाके में 8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हवा भी धूप और 94 फीसदी ह्यूमिडिटी के प्रभाव को कम नहीं कर पाएगी। इससे लोगों को उमस जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा। दिल्ली में मंगलवार को अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

नोएडा और गाजियाबाद में भी उमस के आसार
नोएडा और गाजियाबाद में भी एक बार फिर उमस जैसी स्थि उत्पन्न होने की संभावना है। बारिश की संभावना घटकर महज 14 फीसदी रह गई है। आसमान में बादल दिखेंगे, लेकिन धूप निकलने के बाद दिन में अधिकतम तापमान 36 डिग्री के पार जा सकता है। यह 40 डिग्री से अधिक तापमान जैसी गर्मी का अहसास कराएगा। 94 फीसदी ह्यूमिडिटी इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है। दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में अब 15 अगस्त के बाद तक ही बारिश जैसी स्थिति बनने के आसार जताए जा रहे हैं। दोनों शहरों में न्यूनतम तापमान 29 डिग्री के आसपास रह सकता है।

अलग ही अंदाज दिखा रहा मॉनसून
जुलाई के मुकाबले अगस्त में बारिश कुछ अलग अंदाज दिखा रही है। राजधानी में पिछले महीने जहां अधिक बारिश हुई, अगस्त में उन इलाकों में कम बारिश दर्ज की जा रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार अगस्त के शुरुआती दस दिनों में तो कुछ ऐसा ही पैटर्न दिखाई दे रहा है। एक्सपर्ट के अनुसार मॉनसून का पैटर्न राजधानी में हर बार बदल रहा है और इसकी वजह जलवायु परिवर्तन के साथ शहर में बन रहे अर्बन हीट आइलैंड भी हैं।

सफदरजंग में कम हुई बारिश
जुलाई की बात करें तो राजधानी के सफदरजंग में 286.3 एमएम बारिश हुई, जो सामान्य से 37 प्रतिशत अधिक रही। वहीं लोदी रोड में 274.6 एमएम बारिश हुई, यह भी सामान्य से 31 प्रतिशत अधिक रही। वहीं अगस्त के शुरुआती आठ दिनों में इन दोनों जगहों पर बारिश सामान्य से कम हुई है। सफदरजंग में इस महीने अब तक 20.1 एमएम बारिश ही हुई, जो सामान्य से 67 प्रतिशत कम है।

लोदी रोड में भी सिर्फ 13.7 एमएम बारिश हुई है, यह सामान्य से 46 प्रतिशत कम है। यदि पालम की बात करें तो यहां जुलाई में 207.1 एमएम बारिश हुई थी। यह सामान्य से महज दो प्रतिशत अधिक है। यानी यहां मॉनसून लगभग सामान्य ही रहा था, लेकिन अगस्त में यहां 8 दिनों में 57.9 एमएम बारिश हो गई। यह सामान्य से 42 प्रतिशत अधिक है।

अर्बन हीट ने बढ़ाई परेशानी
स्काईमेट के महेश पलावत का कहना है कि बारिश में अलग-अलग इलाकों में यह विविधता जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) और अबर्न हीट आइलैंड की वजह से हो रही है। अब राजधानी में मॉनसून के दौरान भी बादल बरस नहीं पाते। बरसने से पहले ही वह इन अर्बन हीट आइलैंड की वजह से सूख जाते हैं। वहीं इस विविधता भरी बारिश के लिए पूरी राजधानी को तैयार करना भी चुनौती बन गया है। अब यह बताना मुश्किल होता है कि राजधानी के कौन से हिस्से बारिश या गर्मी के लिहाज से अति संवेदनशील हैं। इसलिए कभी पीतमपुरा में बारिश होती है तो कभी पालम में, कभी सफदरजंग में बारिश देखने को मिलती है तो कभी मयूर विहार में जलभराव होता है।

क्या होता है अर्बन हीट आइलैंड
जब किसी शहर में उसके आसपास के इलाकों से अधिक तापमान होता है, तो उसे अर्बन हीट आइलैंड कहते हैं। इसकी बड़ी वजह इंसानी गतिविधियां हैं। इसके लिए इमारतें, कंक्रीट का बढ़ता इस्तेमाल, हरियाली कम होना, जलाशयों का कम होना, एसी से निकलने वाली गर्मी, ट्रैफिक, शीशे और स्टील का इस्तेमाल बढ़ना आदि जिम्मेदार होते हैं।
लेखक के बारे में
राहुल पराशर
नवभारत टाइम्स डिजिटल में सीनियर डिजिटल कंटेंट क्रिएटर। पत्रकारिता में प्रभात खबर से शुरुआत। राष्ट्रीय सहारा, हिंदुस्तान, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर से होते हुए टाइम्स इंटरनेट तक का सफर। डिजिटल जर्नलिज्म को जानने और सीखने की कोशिश। नित नए प्रयोग करने का प्रयास। मुजफ्फरपुर से निकलकर रांची, पटना, जमशेदपुर होते हुए लखनऊ तक का सफर।... और पढ़ें

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