ऐपशहर

ब्लैक फंगस के 84.6% मरीजों ने पहले लिया था स्टेरॉयड, एम्स की स्टडी में सामने आई जानकारी

देश में म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस को लेकर एम्स नई दिल्ली की एक स्टडी सामने आई है। स्टडी में बताया गया है कि ब्लैक फंगल के कुल मरीजों में 84.6% मरीज ऐसे थे जिन्हें पहले कोरोना के इलाज के दौरान स्टेरॉयड्स दिया गया था।

Authored byसिमरनजीत सिंह | सांध्य टाइम्स 5 Jul 2021, 12:58 pm

हाइलाइट्स

  • स्टडी में शामिल म्यूकोरमाइकोसिस के मरीजों में मृत्युदर 64.3% पाई गई
  • इनमें से 61.5 प्रतिशत मरीजों को थी डायबिटीज, इनमें मृत्युदर 75 %
  • म्यूकोरमाइकोसिस से होने वाली मौतों में औसत उम्र 49.5 साल थी
सारी खबरें हाइलाइट्स में पढ़ने के लिए ऐप डाउनलोड करें
नई दिल्ली
कोरोना वायरस की दूसरी लहर में कोरोना केस और मौतें तो बड़ी संख्या में रिपोर्ट की ही गईं थी, लेकिन इसका ग्राफ नीचे आने के साथ ही बड़ी संख्या में ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) के मामले सामने आने लगे थे। जहां पहले एक या दो दिन में एक-दो केस आ रहे थे, अब एक दिन में 12 से 15 केस आने लगे थे। कई लोगों की इसकी वजह से जान भी गई। अब इसे लेकर एम्स में एक स्टडी की गई है।

Black fungus in women: महिलाओं को ब्लैक फंगस से बचा रहा इस्ट्रोजन
कोरोना के इलाज के दौरान स्टेरॉयड दिया गया
इस स्टडी में म्यूकोरमाइकोसिस के 13 मरीजों को शामिल किया गया था जिनमें 10 पुरुष और तीन महिलाएं शामिल थीं। इनकी उम्र 5 साल से 55 साल के बीच थी। स्टडी में पाया गया कि 84.6 प्रतिशत मरीज ऐसे थे जिन्हें गंभीर कोरोना हुआ था और उन्हें इलाज के दौरान स्टेरायॅड दिया गया था। इन सभी मरीजों का कोरोना का इलाज दूसरे अस्पताल में हुआ था और वहीं स्टेरॉयड दिए गए थे। स्टेरॉयड की वजह से इम्युनिटी तेजी से कम हुई जिसकी वजह से म्यूकोरमाइकोसिस के शिकार हो गए। वहीं इन मरीजों में मृत्युदर 64.3 प्रतिशत देखी गई है।

Black fungus in Kids: म्युकोरमायकोसिस हुआ भयावह, अब बच्चे चपेट में...मुंबई के तीन बच्चों की ब्लैक फंगस के कारण निकालनी पड़ी आंख
मरने वाले लोगों की औसत उम्र 49.5 साल
उम्र के हिसाब से बात करें तो म्यूकोरमाइकोसिस की वजह से मरने वाले लोगों की औसत उम्र 49.5 साल थी। हालांकि मरने वालों में बड़ी उम्र के लोग ज्यादा थे। स्टडी में जिन मरीजों को शामिल किया गया था, उनमें से 61.5 प्रतिशत मरीज डायबिटीज के शिकार थे और इनमें मृत्युदर काफी ज्यादा देखी गई। जिन्हें डायबिटीज थी, उनमें मृत्युदर 75 प्रतिशत देखी गई है। डॉक्टर्स पहले भी कह चुके हैं कि जिन लोगों को डायबिटीज, कैंसर, एचआईवी जैसी बीमारी हैं, उनकी इम्युनिटी बेहद कमजोर हो जाती है जिस वजह से उन्हें कोरोना और म्यूकोरमाइकोसिस, दोनों होने का खतरा रहता है।

कोरोना और शुगर के मरीजों पर ब्लैक फंगस का कितना असर... पिछले साल हुई स्टडी अब आई ये रिपोर्ट
ऐसे अधिकतर मरीजों में डायबिटीज भी पाई गई थी
म्यूकोरमाइकोसिस मरीजों के अस्पताल में स्टे के बारे में बात करें तो यह 2 से 29 दिन के बीच देखा गया है। किसी व्यक्ति की दो दिन में मौत हो गई तो किसी की 29 दिन में मौत हुई। कई ऐसे थे जो 12 से 15 दिन में ठीक होकर घर चले गए। एम्स की स्टडी में यह भी पाया गया है कि केवल दो ही मरीज ऐसे थे जिन्हें अस्पताल में स्टे के दौरान म्यूकोरमाइकोसिस हुआ था। बाकी सभी मरीज ऐसे थे जो म्यूकोरमाइकोसिस के लक्षण के बाद अस्पताल में भर्ती हुए थे।

Noida Black Fungus case: नोएडा में ब्लैक फंगस के बढ़ रहे केस, इंजेक्शन के लिए लगी लाइन
डायबिटिज के मरीजों की संख्या अधिक
इस स्टडी में शामिल एम्स के एनेस्थिसियोलॉजी और क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के असोसिएट प्रफेसर डॉ. युद्धवीर सिंह का कहना है कि जिन लोगों में म्यूकोरमाइकोसिस पाया गया है, उनमें से 84.6 प्रतिशत लोगों को कोरोना के इलाज के दौरान स्टेरायॅड दिया गया था। साथ ही बड़ी संख्या में मरीजों में डायबिटीज भी पाई गई है जो कि म्यूकोरमाइकोसिस का एक बड़ा कारण साबित हुई है।


तेजी से घटती है इम्युनिटी
डायबिटीज हो या अन्य कोई बीमारी, यह व्यक्ति की इम्युनिटी को तेजी से घटाती हैं जिसकी वजह से व्यक्ति किसी अन्य तरह के वायरस या फंगल इंफेक्शन का जल्दी शिकार हो जाता है। हमने स्टडी में 13 मरीजों को शामिल किया था और इसी के आधार पर परिणाम निकाले गए हैं।


अब कम हो गए हैं म्यूकोरमाइकोसिस के मरीजवैसे बता दें कि पिछले कुछ दिनों में म्यूकोरमाइकोसिस के मरीजों में कमी आई है। गंगाराम, एम्स जैसे अस्पतालों में बड़ी संख्या में म्यूकोरमाइकोसिस के मरीज देखे जा रहे थे लेकिन अब यह कम हो गए हैं। गंगाराम अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पहले एक दिन में 12 से 15 केस आए रहे थे लेकिन अब यह आधे से भी कुछ कम हो गए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना वायरस के केस भी कम हुए हैं।
लेखक के बारे में
सिमरनजीत सिंह
पत्रकार हूं और सान्ध्य टाइम्स व नवभारत टाइम्स के लिए आर्टिकल लिखता हूं। दिल्ली में स्वास्थ्य, मेट्रो से जुडी चीजें, दिल्ली गुरुद्वारा कमिटी, एनडीएमसी आदि बीट कवर करता हूं। पत्रकारिता में पांच साल का अनुभव है और लगातार सीखने का प्रयास करता रहता हूं। यही कोशिश रहती है कि पाठकों तक तथ्यों के साथ सही जानकारी जल्द से जल्द पहुंचा सकूं।... और पढ़ें

अगला लेख

Metroकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर