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सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कहा- प्रोग्राम कोड के उल्लंघन को लेकर Sudarshan TV को नोटिस जारी

केंद्र ने सुदर्शन टीवी (Sudarshan News) को उसके शो 'बिंदास बोल' में 'UPSC जिहाद' के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पक्षकारों की राय जानने के बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सुनवाई पांच अक्टूबर तक के लिए टाल दी है।

Authored byराजेश चौधरी | नवभारत टाइम्स 23 Sep 2020, 6:38 pm
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम .
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केंद्र सरकार ने यूपीएससी जेहाद प्रोग्राम प्रसारित करने वाले सुदर्शन TV (Sudarshan TV) को प्रोग्राम कोड के उल्लंघन के मामले में नोटिस जारी किया है और इस बारे में सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नामले की सुनवाई पांच अक्टूबर तक के लिए टाल दी है। दरअसल सुदर्शन टीवी के एक शो को लेकर विवाद हो गया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। इस शो में चैनल के प्रमुख 'सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों की घुसपैठ' का दावा कर रहे थे। इसके लिए 'UPSC जिहाद' (UPSC Jihad) शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसके 6 एपिसोड पर रोक लगा दी थी।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सुदर्शन TV के कार्यक्रम के प्रसारण को पहली नजर में प्रोग्राम कोड के उल्लंघन का मामला मानते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है लिहाजा सुनवाई टाली जानी चाहिए। तब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई‌ वाली बेंच ने कहा कि अगर अदालत का दखल न होता तो 10 एपिसोड का प्रसारण हो चुका होता। बहरहाल तमाम पक्षकारों की राय जानने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पांच अक्टूबर तक के लिए टाल दी है।

'अल्पसंख्यक समुदाय को करता है बदनाम'
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुदर्शन TV को 28 सितंबर के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है लिहाजा सुनवाई टाली जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को सुदर्शन TV के एपिसोड के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को सुदर्शन TV को उनके अगले एपिसोड के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। अदालत ने कहा था कि प्रोग्राम पहली नजर में अल्पसंख्यक समुदाय को बदनाम करने वाला लगता है।

सेल्फ रेग्युलेशन के लिए तय करें मानक
टीवी कार्यक्रम के प्रोमो में दावा किया जा रहा था कि सरकारी सेवा में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के घुसपैठ की साजिश का पर्दाफाश किया जा रहा है। अदालत ने कहा था कि पांच नागरिकों की एक कमिटी का गठन किया जा सकता है जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सेल्फ रेग्युलेशन के लिए मानक तय करे। सुप्रीम कोर्ट ने एक टीवी चैनल के प्रोग्राम पर सवाल उठाया था और कहा था कि मीडिया में सेल्फ रेग्युलेशन की व्यवस्था होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने जतायी चिंता
सुदर्शन TV के प्रोग्राम में दावा किया गया था कि सिविल सर्विसेज में एक समुदाय के मेंबरों की घुसपैठ का पर्दाफाश किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में इस कार्यक्रम के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि कुछ मीडिया ग्रुप के प्रोग्राम में आयोजित होने वाली डिबेट चिंता का विषय है।
लेखक के बारे में
राजेश चौधरी
राजेश चौधरी 2007 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, निचली अदालत और सीबीआई से जुड़े विषयों को कवर करते हैं और स्पीड न्यूज में भी आपको इस बारे में खबर देते रहेंगे। यदि आपके पास कोर्ट से जुड़े मामलों की कोई सूचना है तो आप उनसे इस ईमेल अड्रेस - journalistrajesh@gmail.com - पर संपर्क कर सकते हैं।... और पढ़ें

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