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Private Ambulance Delhi News : दिल्ली में प्राइवेट एंबुलेंस वाले ले रहे मनमाना रेट, केजरीवाल सरकार ने तय कर दी सीमा

दिल्ली में एंबुलेंस वाले कोरोना काल में मनमाना दाम लेने लगे थे। शिकायतें दिल्ली सरकार ही नहीं, कोर्ट तक भी पहुंच गईं। ऐसे में अब केजरीवाल सरकार ने सख्त फैसला लेते हुए सीमा तय कर दी है।

भाषा 6 May 2021, 9:45 pm

हाइलाइट्स

  • दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़े तो एंबुलेंस वालों ने बढ़ा दिए रेट
  • अब दिल्ली सरकार ने प्राइवेट एंबुलेंस सेवा के लिए रेट तय कर दिए
  • इससे ज्यादा लेने पर एंबुलेंस ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई होगी
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नई दिल्ली
कोविड-19 महामारी बढ़ने के बीच, दिल्ली सरकार ने बृहस्पतिवार को निजी एम्बुलेंस सेवाओं द्वारा लिए जाने वाले शुल्क की सीमा 1,500 से 4,000 रुपये के बीच तय कर दी है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री ने एक ट्वीट में कहा कि अस्पतालों में कोविड-19 रोगियों की बढ़ती भीड़ के बीच कुछ निजी एम्बुलेंस संचालक अवैध ढंग से अत्यधिक शुल्क ले रहे हैं।
केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘यह हमारे संज्ञान में आया है कि दिल्ली में निजी एम्बुलेंस सेवाएं अवैध ढंग से अत्यधिक शुल्क ले रही हैं।’ उन्होंने कहा, 'इससे बचने के लिए, दिल्ली सरकार ने अधिकतम कीमतें तय की हैं, जो निजी एम्बुलेंस सेवाएं ले सकती हैं। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।'


इससे पहले दिन में दिल्ली हाई कोर्ट ने बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार से कहा कि वह राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 संकट के बीच दाह संस्कार और एंबुलेंस के लिए भारी-भरकम शुल्क लेने के आरोपों संबंधी अभिवेदन को जनहित में प्रतिवेदन के तौर ले। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि इन अभिवेदनों पर कानून, नियमों, नियामकों और ऐसे मामलों पर लागू सरकारी की नीति के आधार पर फैसला किया जाएगा।
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अदालत ने कहा कि फैसला यथा संभव शीघ्र और व्यवहारिक रूप में लिया जाए।। अदालत ने इन टिप्पणियों के साथ गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) डिस्ट्रेस मैनेजमेंट कॉलेक्टिव की याचिका का निस्तारण कर दिया। दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील अनुज अग्रवाल ने पीठ से कहा कि नगर निकायों को भी एनजीओ की याचिका में पक्षकार के तौर पर लिया जाए क्योंकि वे भी श्मशान भूमि का प्रबंधन करते हैं।

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इसी तरह की याचिका एक वकील ने दायर की थी जिसमें एंबुलेंस द्वारा भारी-भरकम शुल्क लेने का मुद्दा उठाया गया था लेकिन अदालत ने इस पर विचार करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह बगैर किसी तैयारी के दायर की गई है।

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