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Post Covid Problems: हार्ट, लंग्स और ब्रेन.... कोरोना के बाद की परेशानियों का बच्चे भी बन रहे हैं शिकार

Post Covid Problems In Children: वयस्कों में तो पोस्ट कोविड प्रॉबल्म की बात पहले ही सामने आ गई थी, लेकिन अब बताया जा रहा है कि बच्चे भी इसका शिकार बन रहे हैं। समय पर इलाज न हो तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

Reported byसिमरनजीत सिंह | नवभारत टाइम्स 2 Jun 2021, 6:21 am

हाइलाइट्स

  • पीडियाट्रिशियन इसे मल्टी सिस्टम इंफ्लामेट्री सिंड्रोम कह रहे हैं
  • कोरोना रिकवरी के 3-4 हफ्ते बाद देखने को मिल रहीं परेशानियां
  • हजार में 1 बच्चे को होता है, लेकिन होने पर आईसीयू जाना पड़ता है
  • 50 प्रतिशत बच्चों में हार्ट प्रभावित होता, ब्लड प्रेशर और लंग्स पर भी असर
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नवभारतटाइम्स.कॉम Children
सांकेतिक तस्वीर
नई दिल्ली
पोस्ट कोविड समस्याएं सिर्फ व्यस्कों को ही नहीं, बल्कि बच्चों को भी खासा परेशान कर रही हैं। पोस्ट कोविड में बच्चों को हार्ट, लिवर, किडनी, लंग्स, ब्रेन फीवर, पेट में दर्द से जुड़ी परेशानियां हो रही हैं। वहीं व्यस्कों के मुकाबले इन्हें एडवांस किस्म के इलाज की जरूरत पड़ रही है। कोरोना से रिकवर होने के करीब 3 से 4 हफ्तों बाद बच्चों में इस तरह की परेशानियां देखने को मिल रही हैं।
5 से 15 साल तक के बच्चों में देखी जा रही समस्या
सर गंगाराम अस्पताल के पीडियाट्रिशियन डॉ. धीरेन गुप्ता बताते हैं कि पोस्ट कोविड में काफी बच्चों को हार्ट, लिवर, किडनी और शरीर के अन्य हिस्सों से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं। बच्चों को बुखार आता है। बुखार की वजह से हार्ट, लिवर, किडनी, लंग्स, ब्रेन समेत कई अंग प्रभावित होते हैं। इसे मल्टी सिस्टम इंफ्लामेट्री सिंड्रोम (एमआईएस-सी) कहा जाता है। यह ज्यादातर 5 से 15 साल तक के बच्चों में देखा जा रहा है। डॉ. गुप्ता का कहना है कि वैसे तो यह एक हजार में से एक बच्चे को होता है, लेकिन जिसे होता है, उसे आईसीयू की जरूरत पड़ती है।

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समय पर पहचान तो ठीक हो सकते हैं बच्चे
उन्होंने कहा कि 50 प्रतिशत बच्चे ऐसे होते हैं, जिन्हें हार्ट और ब्लड प्रेशर से संबंधित समस्याएं होती हैं। इसके बाद किसी बच्चे के लंग्स तो किसी का ब्रेन प्रभावित होता है। अच्छी बात यह है कि यदि समय पर इसकी पहचान कर ली जाए तो बच्चे ठीक हो सकते हैं। इससे होने वाली मृत्युदर बेहद कम है। पिछले 10 दिन में अस्पताल में 25 से 30 बच्चे भर्ती हुए हैं। उनमें से कुछ की स्थिति गंभीर है। कुछ सामान्य हैं। उनका कहना है कि यह स्थिति अलार्मिंग है, लेकिन घबराने की बात नहीं है।

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पिछले साल आए थे 120 केस
डॉ. गुप्ता का कहना है कि पिछले साल उन्होंने मल्टी सिस्टम इंफ्लामेट्री सिंड्रोम के 120 बच्चों का इलाज किया था, जिसमें से केवल एक बच्चे की मौत हुई थी, बाकी सभी रिकवर होकर घर गए थे। इसमें मृत्युदर 10 प्रतिशत या इससे भी कम है। जिन बच्चे में यह सिंड्रोम होता है, उन्हें व्यस्कों के मुकाबले एडवांस इलाज की जरूरत होती है। आईसीयू में बच्चों पर खासकर निगरानी रखनी पड़ती है। उनके ब्लड प्रेशर से लेकर दिल की धड़कनों तक पर नजर रखी जाती है क्योंकि बच्चे पूरी तरह से विकसित नहीं हुए होते।
पोस्ट कोविड में काफी बच्चों को हार्ट, लिवर, किडनी और शरीर के अन्य हिस्सों से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं। बच्चों को बुखार आता है। बुखार की वजह से हार्ट, लिवर, किडनी, लंग्स, ब्रेन समेत कई अंग प्रभावित होते हैं। इसे मल्टी सिस्टम इंफ्लामेट्री सिंड्रोम (एमआईएस-सी) कहा जाता है। यह ज्यादातर 5 से 15 साल तक के बच्चों में देखा जा रहा है। वैसे तो यह एक हजार में से एक बच्चे को होता है, लेकिन जिसे होता है, उसे आईसीयू की जरूरत पड़ती है। अच्छी बात यह है कि यदि समय पर इसकी पहचान कर ली जाए, तो बच्चे ठीक हो सकते हैं।
डॉ. धीरेन गुप्ता, पीडियाट्रिशियन, सर गंगाराम अस्पताल

पैरंट्स इन बातों का ख्याल रखें
  • बच्चे के कोविड से रिकवर होने के बाद 6 से 8 हफ्तों तक उनके स्वास्थ्य को लेकर अलर्ट रहें
  • यदि बच्चे में किसी तरह की परेशानी नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
  • कोविड से रिकवर होने के बाद बच्चों को हेल्दी खाना दें, ताकि रिकवरी अच्छी हो सके
  • डॉक्टर ने जो दवाएं या इलाज बताया है, उसे बीच में ना छोड़ें

लक्षण
  • लगातार बुखार रहना
  • थकान
  • चकत्ते (रैशेज)
  • लाल आंखें
  • दस्त लगना
  • पेट में दर्द रहना
लेखक के बारे में
सिमरनजीत सिंह
पत्रकार हूं और सान्ध्य टाइम्स व नवभारत टाइम्स के लिए आर्टिकल लिखता हूं। दिल्ली में स्वास्थ्य, मेट्रो से जुडी चीजें, दिल्ली गुरुद्वारा कमिटी, एनडीएमसी आदि बीट कवर करता हूं। पत्रकारिता में पांच साल का अनुभव है और लगातार सीखने का प्रयास करता रहता हूं। यही कोशिश रहती है कि पाठकों तक तथ्यों के साथ सही जानकारी जल्द से जल्द पहुंचा सकूं।... और पढ़ें

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