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हर्ड इम्युनिटी की तरफ दिल्ली? विशेषज्ञ बोले- एंटीबॉडी नहीं टिक रहा, अब सीरो सर्वे की जरूरत नहीं

Corona in Delhi: राजधानी दिल्ली में कोरोना के दूसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। इस बीच, विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों में अब एंटीबॉडी टिक नहीं रहा है इसलिए राज्य में अब सीरो सर्वे की जरूरत नहीं है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि कोरोना का संक्रमण कम्युनिटी स्तर पर फैल चुका है, इसलिए जरूरी मरीजों के इलाज पर ध्यान देने की जरूरत है।

Authored byराहुल आनंद | नवभारत टाइम्स 1 Oct 2020, 8:30 am

हाइलाइट्स

  • राजधानी दिल्ली के लोगों नहीं टिक रहा है एंटीबॉडी
  • विशेषज्ञों की सलाह, अब राजधानी में सीरो सर्वे की जरूरत नहीं
  • कोरोना से ठीक होने वाले के शरीर में 2-3 महीने में खत्म हो रही है एंटीबॉडी
  • कुछ विशेषज्ञ की राय, हर्ड इम्युनिटी की तरफ बढ़ रही है दिल्ली
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नई दिल्ली
दिल्ली में तीसरे सीरो सर्वे की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। पिछले दो सर्वे में जहां एंटीबॉडी पाए गए लोगों में इजाफा हुआ था, वहीं तीसरे में यह कम हो गया है। यही वजह है कि एक्सपर्ट का कहना है कि अब दिल्ली में सीरो सर्वे की अहमियत कम हो गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर संक्रमण के विस्तार का सही आकलन संभव नहीं है।
एंटीबॉडी कम होने की वजह के बारे में डॉक्टर का कहना है कि जो लोग कोविड से ठीक हो रहे हैं, उनमें से कुछ में 2-3 महीने से ज्यादा एंटीबॉडी नहीं टिक रहा है यानी वह खत्म हो जा रहा है। यही वजह है कि सीरो सर्वे में एंटीबॉडी मिलने का प्रतिशत बढ़ने के बजाए कम हो गया है।

विशेषज्ञ बोले, अब सीरो सर्वे का फायदा नहीं

एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन के डॉक्टर संजय राय ने बताया कि सीरो सर्वे संक्रमण के विस्तार का पता लगाने के लिए किया जाता है, जब संक्रमण शुरू होता है तब ऐसे सर्वे से फायदा है। अब इसका बहुत ज्यादा फायदा नहीं है। हम सभी जानते हैं कि संक्रमण कम्युनिटी स्तर पर पहुंच चुका है और अब इसे रोक पाना संभव नहीं है। दिल्ली के तीसरे सीरो सर्वे ने इस बात का संकेत दे दिया है कि इसका बहुत ज्यादा फायदा नहीं है। सफदरजंग के कम्युनिटी मेडिसिन के एचओडी डॉक्टर जुगल किशोर ने कहा कि अब ऐसे सर्वे की जरूरत नहीं है, जब एंटीबॉडी ज्यादा समय तक नहीं टिक रहा है तो सही आकलन का पता नहीं चलेगा। ऐसे में सर्वे पर समय और पैसा खर्च करना सही नहीं है।

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एंटीबॉडी में आई 4% की कमी
डॉक्टर जुगल ने कहा कि दिल्ली में हुए पहले सीरो सर्वे में जो एनसीडीसी द्वारा किया गया था, उसमें 23.48 पर्सेंट में एंटीबॉडी पाया गया था। उस समय 27 जून से लेकर 5 जुलाई के बीच सैंपल लिया गया था। इस सर्वे में कुल 21,387 सैंपल लिए गए थे। दिल्ली में दूसरा सीरो सर्वे दिल्ली सरकार ने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की अगुवाई में कराया गया। इस सर्वे में 1 से 7 अगस्त के बीच कुल 15,239 सैंपल लिया गया था और 29.1 पर्सेंट सैंपल में एंटीबॉडी पाया गया था। तीसरे सर्वे में यह 25.1 पर्सेंट आ गया है। यानी लगभग 4 पर्सेंट की कमी आई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अगस्त में 257 ऐसे लोगों के भी सैंपल लिए गए थे, जो कोरोना से ठीक हो गए थे। 30.73 पर्सेंट लोगों में ठीक होने के बाद एंटीबॉडी ही नहीं मिली है। इसमें 79 ऐसे लोग थे, जिनमें एंटीबॉडी नहीं मिला था।

'हर्ड इम्युनिटी की ओर बढ़ रही दिल्ली'
डॉक्टर जुगल ने कहा कि संकेत बिल्कुल साफ है। जून के बाद जिन लोगों में संक्रमण हुआ उनका एंटीबॉडी सितंबर में मिला, जिसका औसत 25 पर्सेंट के आसपास है। यानी जो लोग जून से पहले संक्रमित हुए, उनमें अब एंटीबॉडी नहीं है। अगर जून और सितंबर के रिजल्ट को मिला दें तो लगभग 49 से 50 पर्सेंट तक लोग संक्रमित हो चुके हैं। यानी दिल्ली बहुत हद तक हर्ड इम्युनिटी की तरफ बढ़ चुकी है।

‘बहुत ज्यादा टेस्ट की जरूरत नहीं’
डॉक्टर संजय राय ने कहा कि अब बहुत ज्यादा टेस्ट की जरूरत नहीं है। इससे कुछ हासिल नहीं होगा, सिर्फ मरीजों की संख्या बढ़ती नजर आएगी। अभी 60 हजार टेस्ट हो रहे हैं और तीन से चार हजार के बीच पॉजिटिव मामले आ रहे हैं। इसे 80 हजार कर देंगे तो यह 5 हजार से ज्यादा हो जाएगा। फायदा कुछ नहीं होगा। अब हमारा मकसद संक्रमण फैलने से रोकना नहीं है, क्योंकि यह फैल चुका है। अब हमारा मकसद बीमार मरीजों की पहचान करके उसे बेहतर इलाज प्रदान करना है। ऐसे लोगों की जांच कराएं, जिसे जरूरत है और उस पर खर्च करें। अभी लाखों करोड़ों रुपये टेस्ट पर खर्च हो रहे हैं। इससे कुछ हासिल नहीं हो रहा है। साइंस को साइंस के तरीके से समझें और काम करें, तभी फायदा होगा।
लेखक के बारे में
राहुल आनंद

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