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दिल्लीः 18 मिनट में 86 साल के बुजुर्ग को दोबारा पैरों पर किया खड़ा!

Delhi News: 18 मिनट में हिप बॉल रिप्लेसमेंट सर्जरी कर डॉक्टर ने 86 साल के बुजुर्ग मंजूर उस्मानी को न केवल अपने पैरों पर फिर से खड़ा कर दिया है, बल्कि उन्हें नई जिंदगी भी दी है।

नवभारत टाइम्स 25 Jan 2021, 7:14 am

हाइलाइट्स

  • 60 से 75 मिनट में होने वाली सर्जरी सिर्फ 18 मिनट में पूरी
  • हार्ट के डॉक्टर ने हाई रिस्क के साथ सर्जरी की अनुमति दी थी
  • हिप की सर्जरी के बिना मरीज फिर से अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता था

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राहुल आनंद/नई दिल्ली
60 से 75 मिनट में जो सर्जरी की जाती है, उस सर्जरी को सिर्फ 18 मिनट में पूरा कर दिल्ली के डॉक्टर ने इतिहास रच दिया है। 18 मिनट में हिप बॉल रिप्लेसमेंट सर्जरी कर डॉक्टर ने 86 साल के बुजुर्ग मंजूर उस्मानी को न केवल अपने पैरों पर फिर से खड़ा कर दिया है, बल्कि उन्हें नई जिंदगी भी दी है। सर्जरी जितनी लंबी, बुजुर्ग की जान को उतना ही खतरा था। हार्ट के डॉक्टर ने हाई रिस्क के साथ अनुमति दी थी, इसलिए डॉक्टर ने पहला चीरा लगाने से लेकर बॉल रिप्लेसमेंट कर स्टीच करने तक में सिर्फ 18 मिनट लिया और मरीज को फिर से अपने पैरों पर खड़ा कर दिया।
सर्जरी करने वाले फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. कौशलकांत मिश्रा ने बताया कि मरीज की जान बचाने के लिए यह सर्जरी कम से कम समय में पूरा करने की चुनौती थी। डॉक्टर का दावा है कि यह अब तक की सबसे कम समय में की गई हिप बॉल रिप्लेसमेंट सर्जरी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के 86 साल के मंजूर उस्मानी गिर गए थे, जिसकी वजह से उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। परिवार वाले उन्हें लेकर इमरजेंसी में पहुंचे। जांच में पाया गया कि उनकी 25 साल पहले एंजियोप्लास्टी हुई थी। अभी उनका हार्ट सिर्फ 25 पर्सेंट ही काम कर रहा था। सिगरेट की वजह से वो लंबे समय से सीओपीडी से पीड़ित थे और उन्हें कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारी भी थी। हिप की सर्जरी के बिना मरीज फिर से अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता था, इसलिए सर्जरी जरूरी थी।

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डॉक्टर कौशल ने बताया कि सबसे बड़ा खतरा था कि मरीज का हार्ट 25 पर्सेंट काम कर रहा था। दिल के डॉक्टर ने हाई रिस्क के साथ सर्जरी की अुनमति दी। मरीज की जान बचाना और उन्हें फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने की इस चुनौती को स्वीकार किया और कम से कम समय में सर्जरी करने की प्लानिंग के तहत सर्जरी की गई।

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डॉक्टर ने कहा कि हमने प्लान के अनुसार सर्जरी शनिवार को की गई। सर्जरी के लिए स्किन में चीरा लगाने से लेकर बॉल बदलने और फिर चीरा को स्टीच (सिलाई) करने का काम 18 मिनट में पूरा किया। इसकी पूरी विडियो रिकॉर्डिंग है। सर्जरी इतनी जल्दी पूरी की गई कि ब्लड लॉस कापी कम हुआ और सर्जरी पूरी हो गई। शनिवार को सर्जरी की गई, रविवार को मरीज बैठ पा रहा था और सोमवार को छुट्टी मिल जाएगी। डॉक्टर कौशल ने बताया कि मरीज में नॉनसीमेंटेड बॉल लगाया गया। सीमेंट वाला लगाते तो उससे निकलने वाला केमिकल्स दिल को नुकसान पहुंचा सकता था। फिर उनको खतरा हो जाता। यही वजह है कि मरीज रिकवर भी जल्द हुए।

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