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एम्स में नई तकनीक से आंख का ऑपरेशन

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Navbharat Times 6 Sep 2017, 8:00 am

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एम्स में कॉर्निया की केवल भीतरी परत से कॉर्निया ट्रांसप्लांट कर आंखों की रोशनी वापस दिलाई जा रही है। जहां सामान्य प्रक्रिया में कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए पूरे टिशू की जरुरत होती है, अब एम्स के आरपी सेंटर के डॉक्टर केवल अंदर वाले लेयर से ही ट्रांसप्लांट कर रहे हैं। इस नई तकनीक में स्टीच की जरुरत नहीं होती है, रिकवरी जल्दी होती है, आंखों की रोशनी बेहतर आती है, इन्फेक्शन नहीं होता है और मरीज जल्दी घर चला जाता है।

एम्स के डॉ. जे. एस. टिटियाल ने कहा कि हम समय के साथ नई-नई तकनीक को यूज कर रहे हैं, ताकि मरीजों को ज्यादा-से-ज्यादा फायदा हो। हम एक कॉर्निया को दो-तीन मरीजों में यूज कर रहे हैं। पहले एक कॉर्निया एक मरीज में यूज होता था। जब नई तकनीक आई तो हम भी एक कॉर्निया को काट कर दो-तीन मरीजों में इस्तेमाल करने लगे। यह तभी संभव होता है, तब दान में मिले कॉर्निया के बाद उसी समय दो-तीन मरीज उपलब्ध हो। एक बार अगर कॉर्निया काट दिया तो उसे तुरंत इस्तेमाल करना होता है, उसे प्रिजर्व कर नहीं रखा जा सकता है।

डॉ. राधिका टंडन ने बताया कि अब कॉर्निया का सबसे अंदर वाला लेयर ही लेते हैं और उसे ट्रांसप्लांट कर देते हैं। एक महीने पहले इस तकनीक का इस्तेमाल पहली बार एम्स में शुरू किया गया है। अब तक 30 मरीजों में इस तकनीक से सर्जरी की जा चुकी है। इसमें रिजेक्शन बिल्कुल नहीं होता है, क्योंकि लेयर में ब्लड वेसेल्स नहीं होते हैं। यह काफी छोटा 15 माइक्रोन का होता है, इसलिए इसमें स्टीच करने की भी जरुरत नहीं होती है। इसे मेडिकली DMEK प्रोसीजर कहा जाता है।

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आरपी सेंटर के चीफ डॉ. अतुल कुमार ने कहा कि कॉर्निया ट्रांसप्लांट को बढ़ावा देने के लिए एम्स हेल्थ मिनिस्ट्री के साथ मिलकर एक कोर्स तैयार कर रहा है। यह कोर्स तीन महीने का होगा, जिसमें बी.एससी पास लोग ट्रेनिंग पा सकते हैं। ट्रेनिंग किए हुए लोग दूसरे सेंटर में जाकर ट्रेनिंग देंगे, ताकि एम्स से मरीज का बोझ कम हो और दूसरे सेंटर भी कॉर्निया ट्रांसप्लांट कर सकें। इसी तरह डायबिटीज की वजह से आंखों में खराबी का पता लगाने के लिए एम्स ने एक प्रोजेक्ट शुरू किया है। यह प्रोजेक्ट तीन साल का होगा, जिसमें रूरल और अर्बन इलाके के लोगों को शामिल किया जाएगा। हमारा मकसद यह है कि मरीज की सही स्क्रीनिंग हो और लोग यह जान सकें कि आंखों पर डायबिटीज का कितना बुरा इफेक्ट हो रहा है।

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