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Delhi Seemapuri Fire: मम्मी-पापा, भाई और बहन को आवाजें देता रहा लेकिन पलटकर जवाब नहीं आया...

फायर ब्रिगेड और पुलिस आई, जिसने भीतर जाकर देखा तो पिता, मां, भाई और बहन सबकी मौत हो चुकी थी। साहिबाबाद की एक फैक्ट्री में काम करने वाले अक्षय घर के सामने बने वाल्मीकि मंदिर में दोस्तों के साथ बैठे थे। एक काली रात ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल कर रख दी।

Reported byशंकर सिंह | Edited byVineet Tripathi | नवभारत टाइम्स 27 Oct 2021, 6:56 am
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम New Delhi: Family members and relatives mourn after a massive fire broke out on ...

'तड़के करीब तीन बज रहे होंगे। सामने वाली आंटी मेरी मां का नाम लेकर आवाजें लगा रही थीं। मैं हड़बड़ा कर उठा। खिड़की से झांका तो आंटी कहने लगी, जरा ऊपर देखो खिड़की का शीशा टूटा है और आग लग रही है। मैं तुरंत सीढ़ियों से ऊपर भागा। दो-तीन पड़ोसी भी आए। कमरे का दरवाजा खोला तो वह धुएं से भरा था। कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। भीतर से काफी हीट आ रही थी। हम लोग चाह कर भी भीतर नहीं घुस पा रहे थे। मम्मी-पापा, भाई और बहन को आवाजें देता रहा, लेकिन पलटकर जवाब नहीं आया। सभी भीतर तड़प रहे होंगे और हम कुछ नहीं कर पा रहे थे।'

यह कसक और टीस पुरानी सीमापुरी में मंगलवार तड़के लगी आग के धुएं में दम घुंटने से बुजुर्ग माता-पिता, जवान भाई और छोटी बहन को खोने वाले 22 साल के अक्षय की है। पल भर में उनका भरा-पूरा परिवार उजड़ गया था। इसी इलाके में पैदा हुए और यहीं पले-बढ़े अक्षय ने बताया कि अचानक सब कुछ हो गया। पड़ोसियों के साथ वह खुद ही आग बुझाने की कोशिश करते रहे। बाल्टियों से पानी भी डाला, लेकिन धुआं कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। लिहाजा पड़ोस में किसी ने पुलिस को कॉल कर जानकारी दी।

परिवार को न बचा पाने का मलाल
उन्होंने बताया कि तीसरी मंजिल पर पिता जी पलंग पर सोते थे, जबकि मां-बहन और भाई जमीन पर ही बिस्तरा लगाए करते थे। वह दूसरी मंजिल पर सो रहे थे। आग की खबर लगी तो ऊपर भागे, लेकिन कमरे के भीतर इतना धुंआ भरा हुआ था कि कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था। वह और पड़ोसी भीतर जाने की कोशिश करते तो घुसा नहीं जा रहा था। आधे घंटे तक सभी मशक्कत करते रहे, लेकिन अंदर नहीं जा सके। जब धुआं हटा तो चारों मृत हालत में पड़े मिले।

भाई की शादी तय, डेट होनी थी फिक्स
शास्त्री भवन में चपरासी का काम करने वाले होरी लाल मूल रूप से मथुरा जिले के रहने वाले थे। पत्नी भी ईस्ट एमसीडी में सफाई कर्मचारी थी। वह घर के पास वह एक छोटी दुकान भी चलाया करती थीं। होरी लाल रिटायर होने वाले थे। लिहाजा वह अपने बड़े बेटे आशु (24) की शादी करने की तैयारी कर रहे थे। अक्षय ने बताया कि महिपालपुर में लड़की देख ली थी और रिश्ता पक्का हो चुका था। वह दिसंबर या जनवरी की डेट फिक्स करना चाहते थे, लेकिन उससे पहले ही परिवार पर कहर टूट पड़ा।

चार साल पहले ही खरीदे थे दो फ्लोररिश्तेदार संजय कुमार ने बताया कि होरी लाल के पिता भारतीय विद्या भवन स्कूल, कर्जन रोड नई दिल्ली में काम करते थे। वहीं स्टाफ क्वॉर्टर में रहते थे, जो रिटायरमेंट के बाद 1990 के आसपास सीमापुरी इलाके में आ गए। उनके चार बेटे थे, जिसमें होरी लाल दूसरे नंबर के थे। इससे पहले तीनों भाइयों की मौत हो चुकी है, जिनके परिवार नई सीमा पुरी इलाके में रहते हैं। होरी लाल का परिवार पहले किराए पर रहता था, जिन्होंने करीब चार साल पहले ही एक 25 गज के मकान का सेकंड और थर्ड फ्लोर खरीदा था।
लेखक के बारे में
शंकर सिंह
बीते 22 साल से पत्रकारिता में। पंजाब केसरी, दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता के बाद अब एनबीटी में सहायक संपादक। लोकल रिपोर्टिंग से शुरू हुआ सफर, जो एक दशक से ज्यादा वक्त खेल पत्रकारिता में बीता। राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर भी खूब लिखा। अब कर रहे हैं क्राइम से दो-दो हाथ।... और पढ़ें

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