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लॉकडाउन के दौरान संक्रमण का खतरा मोल लेकर भी की पुलिसवालों ने ड्यूटी

मजदूरों के पलायन को रोकने, कंटेंटमेंट जोन में ड्यूटी देने, बुजुर्गों और बीमारों तक दवाइयां और जरूरत का अन्य सामान पहुंचाने, अस्पतालों में ड्यूटी देने, दिल्ली में फंसे लोगों को दूसरे शहरों में उनके घरों तक पहुंचाने में मदद करने और जरूरतमंद लोगों को नियमित रूप से राशन, खाना, व अन्य जरूरी सामान मुहैया कराने जैसी कई नई चुनौतियों का सामना पुलिस को करना पड़ा।

Authored byप्रशांत सोनी | नवभारत टाइम्स 24 Mar 2021, 10:33 am
पिछले साल 23 मार्च की रात को जब प्रधानमंत्री ने पूरे देश में लॉकडाउन घोषणा की, तो सबसे बड़ी चुनौती दिल्ली पुलिस के सामने ही आकर खड़ी हुई। पुलिस को एक तरफ लॉकडाउन का सख्ती से पालन सुनिश्चित करवाना था, तो दूसरी तरफ यह भी सुनिश्चित करना था कि जरूरी चीजों की सप्लाई पर असर ना पड़े। ऊपर से खुद पुलिस फोर्स को संक्रमण के खतरे से बचाने की भी चुनौती थी। साथ में मजदूरों के पलायन को रोकने, कंटेंटमेंट जोन में ड्यूटी देने, बुजुर्गों और बीमारों तक दवाइयां और जरूरत का अन्य सामान पहुंचाने, अस्पतालों में ड्यूटी देने, दिल्ली में फंसे लोगों को दूसरे शहरों में उनके घरों तक पहुंचाने में मदद करने और जरूरतमंद लोगों को नियमित रूप से राशन, खाना, व अन्य जरूरी सामान मुहैया कराने जैसी कई नई चुनौतियों का सामना पुलिस को करना पड़ा। एक साल पूरे होने पर कुछ पुलिसवालों से बात की प्रशांत सोनी ने:
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लॉकडाउन के एक साल बाद फिर से रफ्तार पकड़ने की कोशिश में जिंदगी
चांदनी महल थाने के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर विनोद कुमार सिंह बताते हैं कि मरकज वाले एपिसोड के बाद जब हमें पता चला कि वहां से निकले कई लोग हमारे थाना क्षेत्र में रह रहे हैं, तो हमने उनको ट्रेस किया। इसके बाद उन सबको पहले वहीं रखा गया, जहां वे रह रहे थे। बाद में उन्हें दिल्ली सरकार के शेल्टर होम में भिजवाया। उसी दौरान थाने के आधे से ज्यादा स्टाफ के संक्रमित होने की आशंका को देखते हुए 26 लोगों को क्वारंटीन करना पड़ा और 8-9 पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव भी पाए गए। हालांकि, हमें होटल में क्वांटरीन करने का ऑप्शन मिला था, लेकिन अगर हम इतने सारे लोग एक साथ चले जाते, तो थाने का काम चलाना मुश्किल हो जाता, क्योंकि हमारे इलाके में कोरोना के काफी केस आ रहे थे। ऐसे में हमने थाने में रहकर ही काम किया और वहीं पर क्वारंटीन में रहे। हमने पूरे थाना क्षेत्र को 29 जगहों से सील करके सिर्फ एक जगह एंट्री खुली छोड़ी। पूरे इलाके में ड्रोन से निगरानी करके लॉकडाउन का पालन सुनिश्चित किया। साथ में लोगों तक जरूरत का सारा सामान भी पहुंचाया। दो ढाई महीने तक हम लोग अपने घर भी नहीं गए। जब वह पूरा दौर निकल गया, तब पता चला कि हमने कितनी बड़ी चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया। बाद में हमारे हमें सम्मानित भी किया था।
लॉकडाउन का एक सालः सबकी जिंदगी घरों में सिमट गई थी और हमारी अस्पताल में
मयूर विहार थाने में तैनात हेड कॉन्स्टेबल योगेंद्र ढाका बताते हैं कि उनकी बीट में कई बुजुर्ग रहते हैं, जो लॉकडाउन लगने की वजह से अचानक चिंता में पड़ गए थे। हम लोगों ने सबसे पहले उनसे मिलकर उन्हें भरोसा दिलाया कि वे किसी तरह की चिंता ना करें। उसके बाद रोज सबको दवाइयां और अन्य जरूरी चीजें मुहैया कराई। सिक्योरिटी गार्डों, लेबर व अन्य जरूरतमंद लोगों को राशन और खाना भी मुहैया कराया। हमारे यहां कुछ कंटेंटमेंट जोन में थे, तो उसमें भी हमने लगातार निगरानी रखी। पुलिसकर्मियों के लिए वह बहुत कठिन समय था, मगर उस दौरान लोगों की मदद करने का जो अवसर मिला, उससे मन को बहुत संतोष मिला।

लॉकडाउन के एक सालः स्टूडेंट्स बोले-स्थिति बेहतर नहीं, लेकिन हमें ऑनलाइन क्लासेज की आदत हो गई अब
डीसीपी (साउथ) अतुल कुमार ठाकुर के मुताबिक, लॉकडाउन हम सभी के लिए एक नया अनुभव था। हमारे सामने कई तरह की ऐसी चुनौतियां थीं, जिनका हमने पहले कभी सामना नहीं किया था। मगर पूरी दिल्ली पुलिस ने हर चुनौती को सकारात्मक रूप से लेकर बेहतरीन काम किया। यहां तक सोशल मीडिया के माध्यम से भी बहुत लोगों की मदद की। इस दौरान पुलिसिंग में भी तकनीकी रूप से कई बदलाव आए। हमारी मीटिंग्स विडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होने लगीं, सोशल मीडिया का इस्तेमाल बढ़ गया, ड्रोन कैमरों की मदद से निगरानी रखी गई, सेल्फी स्टिक्स पर मोबाइल लगाकर डॉक्युमेंट्स का वेरिफिकेशन किया गया, पुलिस की कई सेवाएं कॉन्टैक्टलेस और पेपरलेस हो गईं।
लेखक के बारे में
प्रशांत सोनी
प्रशांत सोनी, नवभारत टाइम्स, दिल्ली में वरिष्ठ संवाददाता हैं। वह 2006 से संस्थान से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली के ट्रांसपोर्ट विभाग, ट्रैफिक, मेट्रो, डीटीसी, ऑटो-टैक्सी आद\u200cि से जुड़े मुद्दों को कवर करते हैं। स्पीड न्यूज़ में वह इन विषयों से जुड़ी खबर संक्षेप में आपसे शेयर करेंगे। यदि आपके पास इन विषयों से जुड़ी कोई सूचना हो तो उनसे इस ईमेल अड्रेस पर संपर्क किया जा सकता है - \nprsoni@ gmail.com... और पढ़ें

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