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तिहाड़ में बनेगी मल्टीस्टोरी जेल, 3-5 मंजिला होगी

तिहाड़ जेल में पहले से ही क्षमता से दो गुना से भी अधिक कैदी बंद हैं। इस जेल कॉम्प्लेक्स में 5200 कैदियों को रखने की क्षमता है। लेकिन वर्तमान में यहां 11 हजार से भी अधिक कैदी बंद हैं। ऐसे में एक साथ तीन-चार जेलों को तोड़कर उन्हें मल्टीस्टोरी में बदलने का काम चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

Authored byमनीष अग्रवाल | नवभारत टाइम्स 9 Feb 2021, 11:42 am
नई दिल्ली: तिहाड़ जेल में कैदियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एक बार फिर से यहां मल्टीस्टोरी जेल बनाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। लेकिन इस बार एक साथ तीन जेलों को तोड़कर इन्हें मल्टीस्टोरी जेल में ना बदलकर किसी एक जेल को मल्टीस्टोरी जेल बनाने के बारे में सोचा जा रहा है। जो अन्य जेलों के लिए भी एक मॉडल के रूप में काम कर सके। यह जेल तीन से पांच मंजिला हो सकती है।
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तिहाड़ जेल (फाइल फोटो)


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सूत्रों का कहना है कि जिस जेल को मल्टीस्टोरी जेल बनाने के बारे में विचार किया जा रहा है। वह तिहाड़ की जेल नंबर-2 है। इसके कई कारण है। पहला तो इस जेल में वर्तमान में करीब 600 कैदी बंद हैं। दूसरा, यह अन्य जेलों से छोटी है। ऐसे में इस जेल के कैदियों को रोहिणी और मंडोली जेल समेत तिहाड़ की अन्य जेलों में आसानी से शिफ्ट किया जा सकता है। क्योंकि, एक साथ कई जेलों को मल्टीस्टोरी बनाने में सबसे बड़ी समस्या यह आ रही है कि इस बीच इन जेलों के कैदियों को कहां शिफ्ट किया जाएगा।

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तिहाड़ जेल में पहले से ही क्षमता से दो गुना से भी अधिक कैदी बंद हैं। इस जेल कॉम्प्लेक्स में 5200 कैदियों को रखने की क्षमता है। लेकिन वर्तमान में यहां 11 हजार से भी अधिक कैदी बंद हैं। ऐसे में एक साथ तीन-चार जेलों को तोड़कर उन्हें मल्टीस्टोरी में बदलने का काम चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में सूझाव दिया गया है कि तिहाड़ की 65 साल से भी अधिक पुरानी जेल नंबर-1,2 और 3 को एक साथ मल्टीस्टोरी में ना बदलकर इनमें सबसे छोटी जेल नंबर-2 को सबसे पहले मल्टीस्टोरी में बदला जाए। इसे तीन से पांच मंजिला बनाई जा सकती हैं। यह कैसी होगी। इस बारे में अभी कुछ स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह सिंगापुर की चांगी जेल जैसी हो सकती है। वैसे, सूत्रों का यह भी कहना है कि तिहाड़ में मल्टीस्टोरी जेल कॉन्सेप्ट लाने से पहले कुछ ऐसे देशों की जेल की स्टडी जरूर की जानी चाहिए, जहां की मल्टीस्टोरी जेल का कॉन्सेप्ट कामयाब है। इससे अन्य जेलों को बनाने में काफी फायदा होगा।
लेखक के बारे में
मनीष अग्रवाल
मनीष अग्रवाल, नवभारत टाइम्स में असिस्टेंट एडिटर हैं। वह केंद्रीय गृह मंत्रालय, रेलवे और एविएशन मिनिस्ट्री के अलावा केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, पैरामिलिट्री फोर्स, सीबीआई, एनआईए, ईडी और भारतीय चुनाव आयोग भी कवर करते हैं। इससे पहले वह क्राइम, कस्टम और तिहाड़ जेल कवर करते थे। वह एनबीटी में 20 साल से भी अधिक समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।... और पढ़ें

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