ऐपशहर

तस्वीरों में देखें... रास्ता दिखाने के बजाए लोगों को राह से भटका रहे हैं दिल्ली के ये साइन बोर्ड

कहीं पेड़ों की टहनियों और पत्तों के पीछे छुपे, कहीं गलत दिशा बता रहे तो कहीं टूट चुके हैं साइन बोर्ड और अक्सर इस वजह से लोग रास्त भटक रहे हैं। आइए डालें एक नज़र...

Curated byसरोज सिंह | Authored byएनबीटी डेस्क | नवभारत टाइम्स 27 Sep 2021, 2:55 pm
सड़कों पर सरकारी एजेंसियां रास्ता बताने के लिए साइन बोर्ड इसलिए लगाती हैं ताकि अनजान लोगों को अपनी मंजिल तक जाने के लिए भटकना न पड़े। कुछ बोर्ड इसलिए लगाए जाते हैं ताकि गाड़ी चलाने वालों को आगे सड़क पर आने वाले स्पीड ब्रेकर, स्कूल, अस्पताल आदि की जानकारी देने के लिए भी लगाए जाते हैं। लेकिन दिल्ली में कुछ सड़कों पर ऐसे बोर्ड या तो टूट चुके हैं या खराब हो चुके हैं। कई जगह तो ऐसे महत्वपूर्ण बोर्डों के सामने पेड़ों की टहनियां आ गई हैं, जिनके पीछे बोर्ड छिप गए हैं। किन सड़कों पर लगे बोर्ड खराब हो गए हें या फिर नजर आने बंद हो गए हैं, उनका पता लगाया एनबीटी रिपोर्टर्स प्रशांत सोनी, पूनम गौड़, सुदामा यादव और शम्से आलम ने।
नवभारतटाइम्स.कॉम nbt reality check on delhi road sign borad
तस्वीरों में देखें... रास्ता दिखाने के बजाए लोगों को राह से भटका रहे हैं दिल्ली के ये साइन बोर्ड



मंडी हाउसः नाम तक मिट चुके हैं साइनेज बोर्ड से

नई दिल्ली के इलाकों में भी रोड साइनेज को लेकर कई तरह की दिक्कतें साफ नजर आती हैं। मंडी हाउस का गोल चक्कर इसका एक बड़ा उदारहण है। इस गोल चक्कर से 7 अलग-अलग जगहों पर आने-जाने के लिए सड़कें निकलती हैं, लेकिन इनमें से 5 सड़कों के मोड़ पर लगे साइनेज की लिखावट ही मिट गई है, जिसकी वजह से अनजान लोगों को पता ही नहीं चल पाता है कि उन्हें जिस रोड पर जाना है, वह कौनसी है। इसके अलावा नई दिल्ली की सड़कों पर लगे ज्यादातर साइनेज इन दिनों पेड़ों की टहनियों से ढंक गए हैं, जिसकी वजह से लोगों को अपने गंतव्य की तरफ जाने वाले सही रास्ते का पता नहीं चल पा रहा है।

मेजर दीपक त्यागी रोड: स्कूल के पास धीरे चलें को बोर्ड नहीं

पंखा रोड और नजफगढ़ रोड को कनेक्ट करने वाली मेजर दीपक त्यागी रोड पर जनकपुरी ए-ब्लॉक के पास दिल्ली सरकार का एक स्कूल है। इंफॉर्मेटीव साइन बोर्ड के तहत स्कूल के आसपास यह साइन बोर्ड लगाना जरूरी होता है कि आगे स्कूल है और गाड़ी धीरे चलाएं, लेकिन रोड के इस पूरे स्ट्रेच पर एक या दो ट्रैफिक साइन बोर्ड को छोड़कर दूसरा कोई भी साइन बोर्ड नहीं लगा है।

​नरेला-अलीपुर रोड: कई महीने से गिरा पड़ा है साइन बोर्ड

नरेला-अलीपुर रोड पर शाहपुरगढ़ी के पास पिछले कई महीने से साइन बोर्ड गिरा पड़ा है। स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत भी की है, लेकिन फिर से साइन बोर्ड को लगाया नहीं जा रहा है। बिना साइन बोर्ड के लोग यहां रास्ता भटक जाते हैं। राह चलते लोगों से लोग रास्ते की जानकारी लेते हैं। खासकर रात के समय शाहपुर गढ़ी, होलंबी खुर्द और आईटीआई नरेला की ओर जाने वाले लोगों को बिना साइन बोर्ड के भारी परेशानी होती है। लोग जल्द ही कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

बेगमपुर: टूट गए साइन बोर्ड, भटक जाते हैं रास्ता

बेगमपुर पुलिस स्टेशन रोड से रोहिणी सेक्टर-24 की ओर जाने वाली सड़क पर लगे साइन बोर्ड लंबे समय से टूटे पड़े हैं। टूटे बोर्ड पर आधे-अधूरे जानकारी के कारण लोग रास्ता भटक जाते हैं, या फिर लोगों को रास्ता पूछना पड़ता है। इस रोड से रोहिणी, बवाना, नरेला के अलावा दिल्ली के कई इलाकों में लोग निकलते हैं। डीसीपी रोहिणी ऑफिस, कंझावला रोड, बेगमपुर पुलिस स्टेशन और महाराजा अग्रसेन अस्पताल और कॉलेज के लिए भी लोगों का इसी रोड से आना-जाना होता है। पीडब्ल्यूडी की इस सड़क पर कई जगहों पर साइन बोर्ड ही गायब हो चुके हैं, वहीं जहां साइन बोर्ड की जरूरत है, वहां बोर्ड ही नहीं लगे हैं।

कंझावला रोड: टहनियों से छिपे साइन बोर्ड

कंझावला रोड से रोहिणी सेक्टर-24 की ओर जाने वाली सड़क पर लगे साइन पेड़ो की टहनियों से छिपे हुए हैं, लंबे समय से इस रोड पर पेड़ो की टहनियों की छंटाई ना होने के कारण ऐसा है। दूर से लोगों को साइन बोर्ड का पता ही नहीं चलता। करीब में आने पर साइन बोर्ड दिखता है, ऐसे में गाड़ियां ड्राइव कर रहे लोग अचानक ब्रेक लगाकर साइन बोर्ड देखते हैं, जिससे हादसे का डर बना हुआ है। पेड़ों की छंटाई ना होने से अन्य कई साइन बोर्ड भी टहनियों के बीच छिप गए हैं। जिससे वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी होती है। पहली बार इस रोड से गुजरने वालों को साइन बोर्ड का बिल्कुल भी पता नहीं चलता है, जिससे लोग कई बार रास्ता भटक जाते हैं, फिर लोगों की मदद से अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं।

द्वारका सेक्टर-22: यहां गूगल ही बता सकता है रास्ता

सेक्टर-22-23 रोड पर द्वारका से गुरुग्राम जाने वाले रास्ते पर साइनेज टूटे हुए और जंग लगे हैं। उस पर दर्शाए गए सभी साइनेज मिट चुके हैं। ऐसे में यह साइनेज लोगों के लिए परेशानी बन गया है। खास तौर पर ऐसे लोगों के लिए तो स्मार्ट फोन का इस्तेमाल नहीं करते या गूगल मैप के इस्तेमाल से बचते हैं।

नोएडा लिंक रोड: दिखते नहीं है यहां भी बोर्ड

शकरपुर चुंगी से चिल्ला बॉर्डर के बीच स्थित नोएडा लिंक रोड पर भी साइनेज खस्ता हाल नजर आए। यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन के अपोजिट लगे एक साइनेज सामने नीचे की तरफ रेहड़ी-पटरी वाले ने अपना सामान सजा रखा है, तो ऊपरी हिस्से को पेड़ की टहनियों ने ढंका हुआ है, जिसकी वजह से साइनेज ठीक से नजर ही नहीं आता है। आगे चलें तो अक्षरधाम के सामने से एनएच-24 की तरफ जाने के मोड़ पर लगा साइनेज भी पेड़ की टहनियों के नीचे छुप गया है। शकरपुर चुंगी से आईटीओ और राजघाट की तरफ जाने की लूप रोड के किनारे लगा साइनेज भी आपको दूर से नजर ही नहीं आएगा। मयूर विहार फेज-1 के सामने फुट ओवरब्रिज के पास खंभे पर लगा एक साइनेज तो खतरनाक तरीके से उलटा लटक गया है और कभी भी किसी राहगीर के ऊपर गिर सकता है। समचार अपार्टमेंट के फ्लाईओवर के नीचे से गाजीपुर की तरफ जाने वाली रोड के कट पर लगा साइनेज भी टूटकर आधा रह गया है। अक्षरधाम से आगे आईटीओ की तरफ जाने वाली लूप रोड के कॉर्नर पर लगा साइनेज भी पेड़ों की टहनियों से ढंक गया है, जिसकी वजह से वह दूर से किसी को नजर ही नहीं आता है।

नई दिल्ली: पेड़-पौधों कवर हुए कई साइनेज

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने वाली सड़क हैवी ट्रैफिक सड़क हैं, लेकिन यहां लगे साइनेज बोर्ड आपको ढूंढने पर भी नजर नहीं आएंगे। साइन बोर्ड पेड़-पौधे के पीछे ऐसे छिपे हैं कि दूर से क्या एकदम नजदीक आ जाने पर भी नजर नहीं आते। न

लेखक के बारे में
सरोज सिंह
सरोज सिंह नवभारटाइम्स.कॉम में असिस्टेंट एडिटर हैं. 20 साल से पत्रकारिता में हैं और इनकी विशेषज्ञता ऑनलाइन मीडिया में है। लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट जुड़ी खबरों में इनकी रुचि है और ये फ़ीचर टीम को लीड कर चुकी हैं. फिलहाल यह न्यूज टीम का हिस्सा हैं.... और पढ़ें

अगला लेख

Metroकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर