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Corona: 20 दिन से एडमिट मरीज के 3 बार सैंपल लिए, रिपोर्ट न पॉजिटिव और न निगेटिव

राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में दो मरीजों के ऐसे केस सामने आए हैं कि डॉक्टरों के पास भी कोई जवाब नहीं है। हॉस्पिटल में एडमिट दो मरीजों का कहना है कि उनकी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट न तो पॉजिटिव आई है और न ही निगेटिव। इसके बावजूद हॉस्पिटल से उनकी छुट्टी नहीं की जा रही है।

Authored byराहुल आनंद | नवभारत टाइम्स 26 Jun 2020, 9:23 am

हाइलाइट्स

  • मरीज कहना है कि अब ठीक महसूस कर रहे हैं, लेकिन 20 दिनों बाद अस्पताल से छुट्टी नहीं मिली
  • एक और मरीज इंस्पेक्टर का कहना है कि उनकी रिपोर्ट भी न पॉजिटव है और न ही निगेटिव आई
  • अस्पताल का कहना है कि कोविड मरीजों को प्रोटोकॉल के हिसाब से ही छुट्टी दी जाती है
  • कोविड जांच रिपोर्ट के बारे में कहा कि ऐसा नहीं हो सकता है, मामले की जांच कराएंगे
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RML में भर्ती मरीज योगेश शर्मा (बाएं) और इंस्पेक्टर जय नारायण (दाएं)
नई दिल्ली
कोविड से पीड़ित योगेश शर्मा का इलाज राम मनोहर लोहिया अस्पताल में चल रहा है। 5 जून को एडमिट हुए योगेश कहते हैं कि मैं पूरी तरह ठीक महसूस कर रहा हूं, लेकिन इसके बाद भी मुझे छुट्टी नहीं मिल रही है। 18, 23 और 24 जून को मेरा कोविड का सैंपल लिया गया, लेकिन तीनों सैंपल न तो पॉजिटिव है और न ही निगेटिव। अब डॉक्टर कहते हैं कि मुझे एक हफ्ते और रहना होगा। योगेश का कहना है कि सैंपल की रिपोर्ट या तो पॉजिटिव होगी या निगेटिव। इसी वॉर्ड में एडमिट इंस्पेक्टर जय नारायण का भी आरोप है कि उनका सैंपल भी 24 जून को लिया गया है, उनका भी रिपोर्ट न तो पॉजिटिव और न निगेटिव है।
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लक्ष्मीनगर इलाके के 51 साल के योगेश शर्मा ने फोन से एनबीटी से बात की और अपनी परेशानी शेयर की। उन्होंने बताया कि 5 जून को कोविड की वजह से उन्हें आरएमएल के पुराने इमरजेंसी के वॉर्ड नंबर 20 के बेड नंबर 12 पर एडमिट किया गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें ब्रीदिंग समस्या थी। तीन चार दिनों तक उन्हें ऑक्सिजन की जरूरत महसूस हुई और उन्हें इसकी सुविधा मिली। लेकिन उसके बाद वो ठीक हो गए। उनका कहना है वह ठीक महसूस कर रहे हैं, 20 दिन हो गए उन्हें एडमिट हुए, लेकिन अभी भी उन्हें छुट्टी नहीं मिल रही है। मेरा तीन-तीन सैंपल लिया गया और तीनों बार सैंपल में कुछ नहीं आया। तीनों बार की रिपोर्ट में बताया गया कि न तो पॉजिटिव है और नही निगेटिव, अब एक हफ्ते और रहने की बात कर रहे हैं।

योगेश का आरोप है कि सैंपल कलेक्शन के बाद तुरंत जांच के लिए भेजते नहीं हैं, यहीं पर काफी समय तक छोड़ देते हैं, जिसकी वजह से ऐसा हो रहा है। अस्पताल में सीनियर डॉक्टर इलाज के लिए आते, जूनियर डॉक्टर में भी अधिकतर मरीज को छूना तक नहीं चाहते।

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वॉर्ड 20 में ही एडमिट मॉडल टाउन थाना के इंस्पेक्टर जय नारायण ने बताया कि 3 जून को उनका सैंपल लिया गया था, 5 जून को पता चला कि रिपोर्ट पॉजिटिव है। इन्होंने फोन पर ही मुझे होम आइसोलेशन में रहने को कहा। लेकिन 19 जून को मुझे चेस्ट में दिक्कत महसूस हुई तो फिर यहां पर एडमिट किया गया। लेकिन ऐसा कुछ इलाज नहीं हुआ। यहां तक कि अब हाथ से कनोला भी खोल लिया गया है। लेकिन फिर भी एडमिट किए हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनका सैंपल भी 24 जून को लिया गया था, लेकिन उन्हें भी बताया गया कि न तो पॉजिटिव है और निगेटिव। उन्होंने भी आरोप लगया कि सैंपल लेकर ये लोग बाहर छोड़ देते हैं, यही वजह है रिपोर्ट सही नहीं आ रहा है।

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इस बारे में अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर मीनाक्षी भारद्वाज ने कहा कि कोविड मरीजों को प्रोटोकॉल के अनुसार ही छुट्टी दी जाती है। लेकिन 20 दिनों के बाद योगेश को अब तक छुट्टी नहीं दिए जाने के बारे में कहा कि हो सकता है कि उन्हें खुद ठीक लग रहा हो, लेकिन कोई मडिकल कारण हो सकता है। लेकिन तीन-तीन बार रिपोर्ट न पॉजिटिव और न निगेटिव के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता है, इसकी जांच कराएंगे।
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राहुल आनंद

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