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पराली और पटाखे का धुआं दिल्ली की हवा में घोलेंगे 'जहर', राजधानी में 63% तक हो सकता है पराली का प्रदूषण

आईआईटीएम के नए सिस्टम की मदद से एजेंसियों को प्रदूषण के पीक और प्रदूषण के कारणों का पहले ही पताा चल रहा है। इस सिस्टम के अनुसार, नवंबर के पहले हफ्ते में पराली का प्रदूषण राजधानी में 65 प्रतिशत तक हो सकता है। बीते कुछ सालों में पराली का अधिकतम प्रदूषण 40 प्रतिशत के आसपास रहता है।

Authored byपूनम गौड़ | Edited byअनिल कुमार | नवभारत टाइम्स 28 Oct 2021, 7:30 am

हाइलाइट्स

बीते कुछ सालों में पराली का अधिकतम प्रदूषण 40 प्रतिशत के आसपास रहता है
नवंबर के पहले हफ्ते में पराली का धुआं 60 से 63 % तक राजधानी को प्रदूषित करेगा
बारिश की वजह से ज्यादातर जगहों पर किसान पराली का निपटान नहीं कर सके हैं
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नई दिल्ली
मॉनसून की विदाई में देरी और उसके बाद भी बारिश ने इस बार पराली जलाने से किसानों को रोक रखा है। एक्सपर्ट के अनुसार, मौसम लगातार शुष्क बना रहेगा। ऐसे में पराली जलाने का पीक दिवाली के आसपास रहेगा। इसकी वजह से दिवाली पर आतिशबाजी और पराली का धुआं मिलकर राजधानी को अधिक जहरीला कर सकते हैं। दिवाली 4 नवंबर को है। दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध है।
आईआईटीएम के नए सिस्टम की मदद से एजेंसियों को प्रदूषण के पीक और प्रदूषण के कारणों का पहले ही पता चल रहा है। इस सिस्टम के अनुसार, नवंबर के पहले हफ्ते में पराली का प्रदूषण राजधानी में 65 प्रतिशत तक हो सकता है। बीते कुछ सालों में पराली का अधिकतम प्रदूषण 40 प्रतिशत के आसपास रहता है। उत्तर भारत में दिवाली की आतिशबाजी और पराली का धुआं राजधानी में प्रदूषण को इमरजेंसी स्तर पर धकेलेंगे।

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पूर्वानुमान के अनुसार, पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की वजह से 28 अक्टूबर को धुआं राजधानी को 30 से 40 प्रतिशत तक प्रभावित कर सकता है। इसके बाद यह 65 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। नवंबर के पहले हफ्ते में पराली का धुआं 60 से 63 प्रतिशत तक राजधानी को प्रदूषित करेगा।

1 सितंबर से 26 अक्टूबर तक पराली जलाने के मामले
सालपंजाबहरियाणा
201616380 3990
2017116524112
201878512730
201985822855
2020126542231
202166782635
एक्सपर्ट के अनुसार, बारिश की वजह से ज्यादातर जगहों पर किसान पराली का निपटान नहीं कर सके हैं। अब इसके लिए दूसरे तरीकों का विकल्प कम है। पराली को घोल के माध्यम से खाद बनने में भी कुछ समय लगता है। यह समय किसानों के पास नहीं है। इस बार पराली अभी तक जल नहीं पाई है। आने वाले कुछ दिनों तक अब बारिश की संभावना नहीं है। सैटलाइट लगातार बता रहा है कि पराली जलाने के मामले बढ़ रहे हैं।

दिवाली पर कितना रहा प्रदूषण स्तर
  • 10 अक्टूबर 2016- 431
  • 19 अक्टूबर 2017- 319
  • 7 नवंबर 2018 - 281
  • 27 अक्टूबर 2019- 337
  • 14 नवंबर 2020 - 414


काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर (CEEW) की प्रोग्राम असोसिएट एल. एस. कुरिंजी के अनुसार, आने वाले दिनों में जहां उत्तर भारत में पराली का धुआं मुसीबत बढ़ाएगा वहीं दिवाली पर आतिशबाजी और गिरता तापमान भी हवा को काफी खराब कर सकता है। सरकारी डिपार्टमेंट को अभी से प्रदूषण के सभी कारणों पर सख्त निगरानी की जरूरत है। उन्होंने बताया कि अक्टूबर का अंतिम हफ्ता आ चुका है और अभी तक पंजाब में पराली जलाने के 6678 और हरियाणा में 2820 मामले एक सितंबर से 25 अक्टूबर तक सामने आए हैं। पिछले साल की तुलना में पराली के मामले काफी कम हैं। पिछले कुछ सालों में अक्टूबर के अंतिम हफ्ते और नवंबर के पहले हफ्ते में पराली जलने के करीब 3000 से 4000 मामले रोज सामने आते हैं।

आने वाले दिनों में पराली प्रदूषण का अनुमान
  • 31 अक्टूबर- 65 प्रतिशत
  • 1 नवंबर - 63 प्रतिशत
  • 2 नवंबर- 63 प्रतिशत
  • 3 नवंबर- 61 प्रतिशत
  • 4 नवंबर- 60 प्रतिशत

पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर से मिली जानकारी के अनुसार, एक सितंबर से 26 अक्टूबर तक पराली जलाने के 6463 मामले सामने आए हैं। अधिकारी के अनुसार इस बार अब तक पराली जलाने की घटनाएं कम हुई हैं। पराली जलाने के मामले 15 नवंबर तक सामने आते हैं। अभी स्पष्ट तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता।


सीएसई की इग्जेक्युटिव डायरेक्टर अनुमिता रायचौधरी के अनुसार पिछले कुछ सालों से सर्दियों का पहला स्मॉग एपिसोड दिवाली के आसपास ही देखने को मिलता है। अगले दो से तीन दिन काफी अहम होंगे, जो ट्रेंड को समझने में मदद करेंगे।
लेखक के बारे में
पूनम गौड़

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