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‘पीएम की लड़ाई में मजबूत दिखी कांग्रेस’

'मुस्लिम वोटर ऐन वक्त पर कांग्रेस की ओर शिफ्ट हो गया'-दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के इस बयान के बाद यह चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। ...

Navbharat Times 19 May 2019, 8:00 am

Khalid.Amin@timesgroup.com

नई दिल्ली : 'मुस्लिम वोटर ऐन वक्त पर कांग्रेस की ओर शिफ्ट हो गया'-दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के इस बयान के बाद यह चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। इससे पहले के दोनों चुनावों में मुस्लिम वोट काफी हद तक 'आप' की ओर शिफ्ट हो चुका था। मुस्लिम एक्सपर्ट्स और लीडरों का मानना था कि यह नैशनल इलेक्शन था और लड़ाई पीएम के लिए थी इसलिए मुसलमानों ने कांग्रेस को चुना जो देश में सरकार बना सकती है या कम से कम सबसे बड़ी अपोजिशन पार्टी बन सकती है।

ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिसे मुशवरात के अध्यक्ष नवेद हामिद से इस मसले पर बात हुई तो उन्होंने कई बातें सामने रखीं। उन्होंने कहा कि पहले तो यह कहना गलत है कि पूरा मुस्लिम वोट एकतरफा कांग्रेस को पड़ा। इतना जरूर कहा जा सकता है कि करीब 70:30 के रेश्यो में वोट कांग्रेस और 'आप' को गया है। मुस्लिम वोट के कांग्रेस की तरफ वापस जाने पर भी वो भी यही दलील देते हैं कि इलेक्शन नैशनल मुद्दों पर लड़ा गया था और मुस्लिम वोटर को कांग्रेस में ज्यादा मजबूती दिखी। नवेद यह भी कहते हैं कि इस वोट शिफ्ट के बाद केजरीवाल को भी यह सोचना होगा कि ऐसा क्यों हुआ। क्या उनकी पार्टी ने मुसलमानों को सही रिप्रेजेंटेशन दिया? क्या किसी मुसलमान को राज्यसभा में भेजा? किसी मुसलमान को दिल्ली की किसी सीट से टिकट क्यों नहीं दिया? हालांकि वह यह भी जोड़ते हैं कि केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में काम किया है और आने वाले विधानसभा इलेक्शन में जब लोकल मुद्दों पर चुनाव होगा तो शायद मुसलमान भी किसी अलग पैटर्न पर वोटिंग करे, लेकिन उसका भरोसा जीतने के लिए कुछ एक्स्ट्रा देना होगा।

ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के मेंबर और एमसीडी काउंसलर आले मोहम्मद इकबाल कहते हैं कि केजरीवाल का यह बयान अब विधानसभा चुनावों तक असर करेगा। उनका यह कहना कि सीएम का बयान यह दिखाता है कि वह मुसलमानों को वोट बैंक समझते हैं। वह कहते हैं कि मुसलमान ने किसी के कहने से वोट नहीं दिया बल्कि उसे दिखा कि यह लड़ाई नैशनल लेवल पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच है, इसलिए सोच समझकर वोट दिया। उन्होंने मुस्लिम वोट के शिफ्ट होने का एक जमीनी कारण भी बताया कि 'आप' के मुसलमान एमएलए खुलकर अपने इलाकों और मुसलमानों के मुद्दे नहीं उठा पाए, उन्हें किस बात का डर था, यह सब जानते हैं। यही वजह रही कि इलाके के लोगों को ये एमएलए अपनी पार्टी को वोट देने के लिए नहीं मना सके जबकि कांग्रेस के एमएलए तो असेंबली में अपनी मुख्यमंत्री से लड़ तक जाते थे अपने इलाके के मसलों के लिए। उन्होंने यह भी बताया कि कई मुस्लिम तंजीमें भी इस काम में लगी थीं कि मुस्लिम वोट बंटे नहीं, हालांकि किसी पार्टी के लिए वोट करने को उन्होंने नहीं कहा लेकिन धीरे-धीरे मुस्लिम वोटर ने कांग्रेस को ही मजबूत खिलाड़ी मानते हुए वोट किया। इसके अलावा, राहुल गांधी ने जिस तरह से लगातार पीएम नरेंद्र मोदी पर हमले किए उसका भी असर लोगों पर पड़ा।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि दिल्ली का मुस्लिम वोटर किसी एक पार्टी का होकर नहीं रहना चाहता और वह मुद्दों पर वोट करता है।

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