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प्रदूषण कंट्रोल करने के लिए क्या कदम उठाया गया, बताएं: सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली और एनसीआर इलाके में एयर पल्यूशन मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता आदित्य दूबे के वकील विकास सिंह ने कहा कि 14 सदस्यों वाली कमिटी का गठन किया गया है, लेकिन अभी तक एयर पल्यूशन के मामले में कमिटी ने कुछ भी कदम नहीं उठाया है।

नवभारत टाइम्स 15 Dec 2020, 8:43 am
विशेष संवाददाता, सुप्रीम कोर्ट
नवभारतटाइम्स.कॉम SC

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह बताए कि एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट कमिशन ने प्रदूषण से निपटने के लिए अभी तक क्या कदम उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया है कि अदालत को बताया जाए कि प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए क्या कदम उठाया गया है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली बेंच ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्य भाटी से कहा है कि वह अगली सुनवाई से पहले समग्र हलफनामा दायर कर उठाए गए कदम के बारे में जानकारी दें।

अदालत ने कहा कि आप हलफनामा दायर कर बताएं कि अभी तक कमिशन ने क्या-क्या कदम उठाए हैं। दिल्ली और एनसीआर इलाके में एयर पल्यूशन मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता आदित्य दूबे के वकील विकास सिंह ने कहा कि 14 सदस्यों वाली कमिटी का गठन किया गया है, लेकिन अभी तक एयर पल्यूशन के मामले में कमिटी ने कुछ भी कदम नहीं उठाया है। प्रदूषण से निपटने के लिए कुछ भी नहीं हुआ है। पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटना का मुद्दा उठाया गया था और कहा गया कि इस कारण भी प्रदूषण फैल रहा है। तब ऐश्वर्य भाटी ने कहा कि हमारा हलफनामा तैयार है हमें कुछ वक्त चाहिए। हम समग्र हलफनामा पेश करेंगे।

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अदालत ने सुनवाई 17 दिसंबर के लिए टाल दी है। 6 नवंबर को दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने बताया था कि एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट के लिए कमिशन का गठन कर दिया गया है और कमिशन ने काम करना शुरू कर दिया है। तब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि प्रदूषण रोकने के लिए तमाम लोग काम कर रहे हैं। कई कमिशन हैं, लेकिन ये सुनिश्चित होना चाहिए कि दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण न हो। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया था कि दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी एमएम कुट्टी को कमिशन का चेयरपर्सन बनाया गया है। पर्यावरण व वन मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी अरविंद कुमार नौटियाल को स्थायी सदस्य बनाया गया है। आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर मुकेश खरे पूर्णकालीन तकनीकी सदस्य बनाए गए हैं। साथ ही आईएमडी के पूर्व महानिदेशक रमेश केजे को भी पूर्णकालीन सदस्य बनाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आपको सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि शहर में स्मॉग नहीं हो। कई कमिशन बने हैं और कई लोग काम कर रहे हैं हमें उससे मतलब नहीं है लेकिन आप सिर्फ ये सुनिश्चित करें कि शहर और आसपास प्रदूषण न हो स्मॉग न हो। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मामले में वॉर लेवल पर काम हो रहा है। पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि ऑर्डिनेंस जारी कर प्रदूषण फैलाने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया है। केंद्र सरकार ने नए अध्यादेश के जरिये प्रावधान किया है कि जो भी प्रदूषण के लिए जिम्मेदार होगा वह दोषी पाए जाने पर पांच साल तक कैद की सजा भुगतेगा। साथ ही, एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार ने ऑर्डिनेंस लाकर कानून बनाया है। इसके तहत कमिशन फॉर एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट भी बनाया गया है जो दिल्ली, एनसीआर और आसपास के इलाके को देखेगा।

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