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असली हाथी राजनीतिक पार्टियां हैं : योगेन्द्र

नगर संवाददाता, जंतर मंतर कालेधन से लड़ाई में केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी के 41 दिनों बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। कैश की समस्या से जनता जूझ ...

नवभारतटाइम्स.कॉम 19 Dec 2016, 8:00 am

नगर संवाददाता, जंतर मंतर

कालेधन से लड़ाई में केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी के 41 दिनों बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। कैश की समस्या से जनता जूझ रही है। सरकार की तरफ से कालेधन के विरोध में उठाए गए इस कदम पर स्वराज अभियान के नेता प्रशांत भूषण ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में स्वराज इंडिया पार्टी के संस्थापक योगेंद्र यादव ने कालेधन के साथ-साथ नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी पर निशाना साधा। यादव ने कहा कि एक मोदी जी हैं जो संसद की जगह बाहर रैलियों में बोलते हैं और एक राहुल जी हैं जो सिर्फ संसद में ही बोलकर भूकंप लाना चाहते हैं।

वहीं कालेधन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने काला धन खत्म करने के लिए नोटबंदी का फैसला लिया, लेकिन कालेधन के असली हाथी तो राजनीतिक पार्टियां है। उन्होंने कहा कि अभी हाथी की सिर्फ पूंछ ही पकड़ी जा सकी है, हाथी को पकड़ना अभी बाकी है। सरकार को चाहिए कि राजनीतिक पार्टियों के खातों की विशेष जांच की जाए। प्रदर्शन के दौरान योगेंद्र यादव मोदी सरकार के साथ-साथ अन्य राजनीतिक पार्टियों पर खूब बरसें। उन्होंने कहा कि कालेधन के खिलाफ सच्ची लड़ाई की यह मांग है कि पार्टियों को 20,000 रुपये से कम के किसी भी चंदे को गुप्त रखने की छूट तत्काल रद्द हो। अन्य किसी भी संगठन की तरह पार्टियों को भी अपने हर पैसे का स्त्रोत बताना जरूरी हो। 30 दिसंबर तक पार्टियों द्वारा 1000 और 500 रुपये के नोट में जितना भी पैसा बैंकों में जमा करवाया जाए, उसे सार्वजनिक किया जाए। पार्टियों को अपने अकाउंट चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित आईएसीए के मानदंड के अनुसार देना अनिवार्य बनाया जाए।

यादव ने कालेधन को रावण बताते हुए कहा कि इसके भी दस सिर हैं। इसमें कैश, सोना, मिट्टी (जमीन), बिल्डिंग, शेयर बाजार हैं। वहीं अन्य पांच विदेशों में बेनामी प्रॉपर्टी, स्विस अकाउंट, सिंगापुर और मॉरिशय की कंपनियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने ना तो नोटबंदी पर होमवर्क किया और ना ही सही से प्लानिंग की। नोटबंदी से जनता परेशान है, सरकार और राजनीतिक पार्टियां दिखावटी आरोप प्रत्यारोप का दौर चला रही हैं।

रैली में कालेधन को कोढ़ बताते हुए इसे समाप्त करने का संकल्प भी लिया गया। इससे संबंधित एक प्रस्ताव भी रैली में पारित किया गया। प्रस्ताव में कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कुल चार मांगों को शामिल किया गया। इनमें राजनीतिक पार्टियों, सांसद-विधायकों के खातों की जांच, 20 हजार से कम के चंदे को सार्वजनिक करने जैसी मांगे शामिल हैं।

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