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जीटीबी में इलाज की किसी को मनाही नहीं: दिल्ली सरकार

आप सरकार ने गुरुवार को हाई कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे जीटीबी अस्पताल में किसी भी...

नवभारत टाइम्स 5 Oct 2018, 1:53 am
नई दिल्ली
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आप सरकार ने गुरुवार को हाई कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे जीटीबी अस्पताल में किसी भी मरीज को इलाज देने से मना नहीं किया जाएगा, जहां उसने हाल ही में अपने पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत संबंधित अस्पताल में इलाज के लिए बाहरी मरीजों के मुकाबले दिल्लीवासियों को प्राथमिकता दिए जाने के लिए कहा गया है।

चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वी के राव की बेंच को दिल्ली सरकार की ओर से बताया गया कि इमरजेंसी, ओपीडी और टेस्टिंग की सुविधाएं देने से किसी को मना नहीं किया जा रहा है, जैसा कि जनहित याचिका में आरोप लगाए गए।

ये दलीलें देते हुए दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने हाई कोर्ट से अपील की कि उन्हें जवाब देने के लिए सोमवार तक का समय दिया जाए। कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि वह तब तक के लिए अपने संबंधित प्रोजेक्ट को होल्ड पर क्यों नहीं रख देती। इसके बाद बेंच ने सुनवाई 8 अक्टूबर तक के लिए टाल दी, जिसने पहले सरकार के संबंधित सर्कुलर को लेकर नाराजगी जताई थी।

गुरुवार सुबह जब यह याचिका सुनवाई के लिए आई तो बेंच ने संबंधित प्रॉजेक्ट को लेकर नाखुशी जताई और सरकार से कहा कि वह इस पर रोक लगा देगा। सुनवाई दोपहर तक के लिए टालते हुए बेंच ने सरकारी वकील से कहा कि वह बताएं कि सरकार संबंधित प्रोजेक्ट के साथ ही आगे बढ़ना चाहती है या कोर्ट इस पर रोक लगा दे। शाम होते-होते कोर्ट के पास समय नहीं बचा और उसने इस मुद्दे पर शुक्रवार को सुनवाई करने के लिए कहा। इस बीच याचिकाकर्ता के वकील अशोक अग्रवाल ने सुनवाई के लिए जोर दिया और कहा कि मामला कई मरीजों से जुड़ा है। जवाब में मेहरा ने हाई कोर्ट को भरोसा दिलाया कि किसी भी मरीज को तब तक के लिए इलाज देने से मना नहीं किया जाएगा।

सोशल ज्यूरिस्ट नाम के एनजीओ ने यह जनहित याचिका दायर की है। एनजीओ ने आप सरकार के 1 अक्टूबर के उस सर्कुलर को चुनौती दी है, जिसके तहत दिलशाद गार्डन स्थित जीटीबी हॉस्पिटल में दिल्ली से बाहर रहने वाले लोगों को इलाज देने से रोका गया है।

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