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स्मॉग टावर के लिए करना होगा 10 महीने का इंतजार

काउंसिल ऑफ एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर(CEEW) के अनुसार राजधानी की हवा को साफ करने के लिए कम से कम इस तरह के 25 लाख स्मॉग टावरों की जरूरत होगी। राजधानी को प्रदूषण का स्थाई समाधान चाहिए। 2019 में 241 दिन राजधानी के लोगों ने प्रदूषित हवा में सांस ली है।

Navbharat Times 18 Aug 2020, 8:48 am
विशेष संवाददाता, नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम SMOG-machine
स्मॉग मशीन

पिछले दो सालों से सर्दियां आते ही राजधानी में स्मॉग टावर लगाने की चर्चाएं जोर पकड़ लेती हैं। इसी बीच केंद्र सरकार और आईआईटी मुंबई के बीच हुए एक एमओयू के अनुसार राजधानी को स्मॉग टावर के लिए एक और सर्दी का इंतजार करना पड़ेगा। इस एमओयू के अनुसार इस काम को पूरा होने में करीब 10 महीने का समय लगेगा। ऐसे में इस बार भी स्मॉग टावर से मदद मिलने की उम्मीद नहीं है। हालांकि स्मॉग टावर पर एक्सपर्ट पहले ही सवाल उठा रहे हैं।

मौजूदा स्थिति की बात करें तो अभी राजधानी में एक स्मॉग टावर लाजपत नगर में लगा हुआ है। 20 फीट ऊंचा यह स्मॉग टावर स्थानीय व्यापारी असोसिएशन ने इसी साल जनवरी में लगवाया था। हालांकि एक्सपर्ट मानते हैं कि राजधानी के प्रदूषण की समस्या का समाधान स्मॉग टावर से नहीं हो सकता। स्मॉग टावर राजधानी में व्यावहारिक नहीं है। काउंसिल ऑफ एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर(CEEW) के अनुसार राजधानी की हवा को साफ करने के लिए कम से कम इस तरह के 25 लाख स्मॉग टावरों की जरूरत होगी। राजधानी को प्रदूषण का स्थाई समाधान चाहिए। 2019 में 241 दिन राजधानी के लोगों ने प्रदूषित हवा में सांस ली है।

सीईईडब्ल्यू की प्रोग्राम असोसिएट तनुश्री गांगुली के अनुसार जो फंड इन स्मॉग टावर में इस्तेमाल होगा, उसे कहीं और इस्तेमाल किया जा सकता है। थर्मल पावर स्टेशन पर इस फंड से काम किया जा सकता है, जो प्रदूषण की बड़ी वजह हैं। एक्सपर्ट के अनुसार राजधानी के लाजपत नगर में लगे स्मॉग टावर की कीमत करीब 7 लाख रुपये है। वहीं इसकी मेंटिनेंस पर प्रति माह 30 हजार रुपये के खर्च की जरूरत है। ऐसे में 25 लाख स्मॉग टावर लगाने के लिए दिल्ली के कुल बजट से भी ज्यादा पैसों की जरूरत होगी। यह टावर 250000 से 600000 क्यूबिक मीटर हवा को प्रतिदिन साफ करता है। सीईईडब्ल्यू के अनुसार इसका असर 50 मीटर रेडियस तक ही पड़ रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले सीपीसीबी नीरी के वायु उपकरण को भी फेल बता चुका है।

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