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आशीष खेतान ने किया हत्या की धमकी का दावा, सुप्रीम कोर्ट में लगाई गुहार

आप नेता आशीष खेतान ने दक्षिणपंथी संगठनों से मौत की धमकी मिलने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। खेतान ने अदालत से सुरक्षा की गुहार लगाई है। खेतान के वकील सुनील फर्नांडीस ने इस मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की...

नवभारत टाइम्स 25 May 2017, 6:02 am
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम आशीष खेतान
आशीष खेतान

आप नेता आशीष खेतान ने दक्षिणपंथी संगठनों से मौत की धमकी मिलने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। खेतान ने अदालत से सुरक्षा की गुहार लगाई है। खेतान के वकील सुनील फर्नांडीस ने इस मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की, जिसके बाद जस्टिस एल नागेश्वर राव और नवीन सिन्हा की वेकेशन बेंच ने मामले की सुनवाई के लिए 5 जून की तारीख तय की।

डायलॉग ऐेंड डिवेलपमेंट कमिशन दिल्ली के वाइस चेयरमैन खेतान ने अपनी याचिका में दक्षिणपंथी संगठन सनातन संस्था पर बैन की मांग की है। साथ ही, जान से मारने को लेकर कथित तौर पर मिल रही धमकियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की भी मांग की है।

इस याचिका में तमाम दक्षिणपंथी संगठनों से मिली धमकियों के बाद पुलिस संरक्षण और ऐसी धमकी प्राप्त करने वाले लोगों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए दिशा-निर्देश बनाने का भी अनुरोध किया है। याचिका के अनुसार, देश में अनेक दक्षिणपंथी चरमपंथी संगठन हैं। इनमें सनातन संस्था, अभिनव भारत, हिन्दू जनजागृति समिति, हिन्दी रक्षक समिति, बजरंग दल, दुर्गा वाहिनी, श्री राम सेना और विश्व हिन्दू परिषद अहम हैं।

याचिका में कहा गया है कि 2014 से ऐसे संगठनों को महत्व मिला जबकि केंद्र सरकार और पुलिस स्वतंत्रता और बोलने की आजादी की रक्षा करने के अपने कर्तव्य का प्रभावी तरीके से पालन करने में विफल रहे। खेतान ने कहा कि उन्होंने इस धमकी के बारे में दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से भी शिकायत की थी, लेकिन अभी तक उन्होंने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।

उन्होंने कहा कि उनके ऑफिस में 9 मई को हिन्दी में लिखा धमकी भरा एक पत्र आया, जिसमें दावा किया गया है कि उनकी हत्या कर दी जाएगी। खेतान ने दावा किया कि 13 मई को उन्होंने गृह मंत्री राजनाथ सिंह को एक पत्र लिखा था और इसकी प्रति भी दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को भेजी थी। इसमें डॉ नरेन्द्र दाभोलकर और गोविन्द पनसारे की हत्या के लिए जिम्मेदार आरोपियों को गिरफ्तार करने में सरकार की निष्क्रियता के बारे में भी सूचित किया था।

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