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...तो इसलिए है मनोज तिवारी का यह 'नया अवतार'

दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी के द्वारा सीलिंग के खिलाफ छेड़े गए नए अभियान से दिल्ली की राजनीति ही नहीं, बल्कि पार्टी की अंदरूनी राजनीति भी गरमा गई है। पार्टी के अंदर जो लोग तिवारी को एक कमजोर नेता मानते थे, वे अब यह देखकर हैरान हैं कि तिवारी ने न केवल सीलिंग तोड़ने जैसा कदम उठाकर एक बड़ा जोखिम मोल लेने का दम दिखाया

नवभारत टाइम्स 7 Oct 2018, 2:45 am
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम मनोज तिवारी (फाइल फोटो)
मनोज तिवारी (फाइल फोटो)

दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी के द्वारा सीलिंग के खिलाफ छेड़े गए नए अभियान से दिल्ली की राजनीति ही नहीं, बल्कि पार्टी की अंदरूनी राजनीति भी गरमा गई है। पार्टी के अंदर जो लोग तिवारी को एक कमजोर नेता मानते थे, वे अब यह देखकर हैरान हैं कि तिवारी ने न केवल सीलिंग तोड़ने जैसा कदम उठाकर एक बड़ा जोखिम मोल लेने का दम दिखाया, बल्कि इस मामले में अब वह सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई के जरिए मॉनिटरिंग कमिटी को ही कठघरे में खड़ा करके भी अपनी राजनीति चमकाने में लगे हुए हैं। सीलिंग मामले में तिवारी के ऐंग्री यंग मैन वाले अंदाज के सामने आने के बाद अब उन्हें एक नए हीरो के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है।

पिछले दो दिनों के दौरान दिल्ली के कई इलाकों में तिवारी का पोस्टर लगाया गया है। इसमें उनके फोटो के नीचे बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा गया है 'बंदे में है दम'। साथ में लिखा गया है कि 'मनोज तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा मॉनिटरिंग कमिटी करो भंग।' आमतौर पर पोस्टरों में तिवारी हमेशा मुस्कुराते नजर आते हैं, लेकिन इस पोस्टर में उनका ऐसा फोटो इस्तेमाल किया गया है, जिसमें वह बेहद गंभीर मुद्रा में नजर आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि इन पोस्टरों के जरिए तिवारी एक तीर से तीन शिकार कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि एक तरफ जहां वह यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि कोई उन्हें हल्के में न ले। वहीं दूसरी तरफ वह इसके जरिए आम लोगों तक यह संदेश भी पहुंचाना चाह रहे हैं कि बीजेपी सीलिंग के खिलाफ है। इसके अलावा पार्टी के अंदर अपने कद और कुर्सी को बचाने में भी उनका यह दांव काफी अहम साबित होता दिख रहा है। सीलिंग को लेकर उनकी पार्टी के जिन नेताओं ने आवाज उठाई थी, वे अब पूरी तरह चुप हो गए हैं।

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