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एक लाख से ज्यादा वोटर आईडी कार्ड फंसे

जून से लेकर 14 सितंबर तक मतदाता सूची में नाम शामिल करवाने और 15 सितंबर से शुरू हुए पुनरीक्षण में आवेदन करने वाले लोगों को अब दो जनवरी से पहले रंगीन वोटर कार्ड नहीं मिल पाएंगे...

नवभारत टाइम्स 25 Sep 2016, 10:30 am

लखनऊ

नवभारतटाइम्स.कॉम more than one lakh voter ids stuck due to lack of computers
एक लाख से ज्यादा वोटर आईडी कार्ड फंसे

जून से लेकर 14 सितंबर तक मतदाता सूची में नाम शामिल करवाने और 15 सितंबर से शुरू हुए पुनरीक्षण में आवेदन करने वाले लोगों को अब दो जनवरी से पहले रंगीन वोटर कार्ड नहीं मिल पाएंगे। इस अवधि के करीब एक लाख आवेदन फॉर्म अब भी पेंडिंग हैं। अब 15 सितंबर से अक्टूबर तक विशेष पुनरीक्षण अभियान चल रहा है। इसके अलावा पुणे और हैदराबाद की कंपनी ने राजधानी आकर रंगीन वोटर कार्ड बनाने से इनकार कर दिया है।

भारतीय निर्वाचन आयोग ने रंगीन वोटर कार्ड बनाने का सॉफ्टवेयर लखनऊ में बंद कर दिया है। ऐसा दावा है जिला प्रशासन के आला अधिकारियों का। उनका कहना है कि जब आयोग सॉफ्टवेयर खोलेगा और रंगीन वोटर कार्ड जारी करेगा वे तभी वितरण कर पाएंगे। जून से अब तक और 15 सितंबर से शुरू हुए पुनरीक्षण के बाद से लगभग 92 हजार आवेदन मतदाता सूची में नाम शमिल करवाने और रंगीन वोटर कार्ड के लिए राजधानी से मिले हैं। जून से पेंडिंग करीब एक लाख आवेदनकर्ताओं की फीडिंग ही नहीं हुई है, जो हुई भी है उनके नाम पते तक गलत कर दिए गए हैं। इसी वजह से भारत निर्वाचन आयोग ने पुणे की इस कंपनी को डिफॉल्टर घोषित कर दिया था।

इसके बाद यह काम हैदराबाद की कंपनी को सौंपा गया है। लेकिन ये कंपनी राजधनी में काम करने को तैयार नहीं है। राजधानी से ही डाटा ऑनलाइन भेजा जाता है और हैदराबाद से ही रंगीन वोटर कार्ड बनकर आने के बाद वितरण किया जाता है। इस वजह से तमाम दिक्कतें हो रही हैं।

कंप्यूटरों की कमी

स्थित यह है कि नौ विधानसभा के मतदाता पंजीकरण केंद्रों में (वीआरसी सेंटरों) पर अब तक कंप्यूटर और ऑपरेटरों की भी कमी है, ऐसे में काफी समय से पेंडिंग आवेदनों की फीडिंग नहीं हो पाई है। लोगों का कहना है कि बड़ी मुश्किल से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और मतदाता पहचान पत्र बनवाने के लिए फार्म जमा किए थे। दिन भर समय बर्बाद किया उसके बावजूद अब तक वोटर कार्ड ही नहीं दिए गए।

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