ऐपशहर

उपकरण मिले न दवाएं, चंदे से कर रहे इलाज

नगर निगम ने स्ट्रीट डॉग्स के इलाज के लिए ध्यान फाउंडेशन से किया करार, लेकिन नहीं दी वित्तीय मददइलाज और नसबंदी पर हर महीने खर्च होते हैं करीब एक ...

नवभारत टाइम्स 12 Feb 2019, 6:17 am
लखनऊ
नवभारतटाइम्स.कॉम Untitled-1

बीमार और घायल स्ट्रीट डॉग्स के इलाज और नसबंदी के लिए नगर निगम ने ध्यान फाउंडेशन से करार तो किया, लेकिन कोई उपरकण या दवाएं मुहैया नहीं करवाईं। ऐसे में फाउंडेशन के सदस्य चंदे के सहारे यह काम कर रहे हैं। फाउंडेशन ने पिछले एक साल में करीब 700 स्ट्रीट डॉग्स का इलाज और नसबंदी की है, लेकिन इसके लिए नगर निगम से कोई वित्तीय मदद नहीं मिली है। यही नहीं, फाउंडेशन के सेंटर पर साफ-सफाई का खर्च भी नगर निगम नहीं उठाता।

नगर निगम ने ध्यान फाउंडेशन के साथ 12 दिसंबर 2017 को करार किया था। इसके तहत नगर निगम ने संस्था को काम करने के लिए आरआर वर्कशॉप के पास अपनी इमारत दी। एग्रीमेंट की शर्तों के मुताबिक, इस सेंटर पर ऑपरेशन के उपकरण और दवाएं नगर निगम को मुहैया करवानी थीं, लेकिन एक साल बाद भी इनमें से कोई सुविधा नहीं मिली है। नगर निगम की ओर से सिर्फ कैटल कैचिंग की गाड़ी, ड्राइवर और इमारत की सुरक्षा के लिए एक चौकीदार मिला है।

वित्तीय मदद न देने के बावजूद नगर निगम स्ट्रीट डॉग्स से जुड़ी हर शिकायत संस्था के पास भेज रहा है। ऐसे में संस्था की सदस्य अपर्णा पाल, इरा कटियार, रूपाली साहा, अपर्णा वर्मा और प्रीति खरे अपने स्तर से बजट का इंतजाम कर काम कर रहे हैं। फाउंडेशन के सदस्यों के मुताबिक, स्ट्रीट डॉग्स के इलाज और नसबंदी पर हर महीने करीब एक लाख रुपये खर्च होते हैं।

फाउंडेशन के सदस्यों के मुताबिक, नगर निगम ने सेंटर की साफ-सफाई करवाने का भी वादा किया था, लेकिन यह काम भी नहीं हो रहा। संस्था ने अपने स्तर से यहां साफ सफाई करवा रही है, लेकिन नगर निगम ने इसका बिल भी पास नहीं किया है। ऐसी तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद संस्था यहां हर महीने 50 से 70 स्ट्रीट डॉग्स का इलाज कर रही है।

अगला लेख

Metroकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर