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प्रमोशन के बाद भी बाबू की सीट से नहीं हट रहे अफसर

नगर निगम के लेखा विभाग में तीन लिपिकों के निलंबन के बाद खाली सीट पर कई की नजर, मंत्री से सिफारिश करवा रहे बाबू

नवभारत टाइम्स 7 Jun 2018, 6:48 am
रणविजय सिंह, लखनऊ
नवभारतटाइम्स.कॉम babu

नगर निगम के लेखा विभाग में बाबू का पद इतना अहम है कि प्रमोट होकर लेखाकार बन चुके अफसर भी पटल छोड़ने को तैयार नहीं। लेखा लिपिक की सीट से ही ठेकेदारों को भुगतान का चेक और निर्माण कार्यों का बिल जारी होता है। इसी कारण इस मलाईदार सीट को कोई प्रमोशन के बाद भी नहीं छोड़ना चाहता। यही नहीं, कमिशनखोरी के आरोप में निलंबित हुए तीन बाबुओं की जगह नए बाबुओं की तैनाती के लिए राज्यमंत्री तक की सिफारिशें आने लगी हैं।

नगर निगम के लेखा विभाग में बाबू की तैनाती के लिए अपर नगर आयुक्त को राज्यमंत्री अनिल राजभर की तरफ से पैरवी का पत्र भेजा गया है। इसमें आरआर विभाग में तैनात रामबाबू को लेखा विभाग में तैनात करने का अनुरोध है। पत्र के मुताबिक, लिपिक (द्वितीय श्रेणी) रामबाबू काफी मेहनती हैं और आरआर विभाग में काफी समय से तैनात हैं। ऐसे में उन्हें अब लेखा विभाग में तैनाती दे दी जाए। मंत्री अनिल राजभर का नगर निकाय या नगर विकास विभाग से कोई सीधा संबंध नहीं है। ऐसे में उनके इस पत्र पर विवाद खड़ा हो गया है।

लेखा विभाग में नौ ऐसे कर्मचारी भी हैं, जो पिछले साल प्रमोट होकर लेखाकार बन गए, लेकिन आज भी लेखा लिपिक के पटल पर चेक और भुगतान के बिल बनाने का ही काम कर हरे हैं। सूत्रों के मुताबिक, लेखा लिपिक से लेखाकार बने महेंद्र पांडेय, आशुतोष, विपुल, अविनाश, रमेश, सत्येंद्र सिंह, बहादुर सिंह, प्रमोद श्रीवास्तव और शैलेंद्र मिश्रा में से ज्यादातर 15 साल से एक ही पटल का काम देख रहे हैं।

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