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पीएफ की रकम का ‘ईपीएफ कमिश्नर’ के जरिए होगा निवेश

जानकारी मिली है कि ट्रस्ट ने बैंक कार्मिकों की भविष्य निधि का 21 करोड़ रुपये डीएचएफएल के सिक्योर्ड बॉन्ड में जमा किया था। बैंक ट्रस्ट ने भी 2016-17 से ही डीएचएफएल में निवेश किया था।

नवभारत टाइम्स 3 Dec 2019, 7:52 am
लखनऊ
नवभारतटाइम्स.कॉम सांकेतिक तस्‍वीर
सांकेतिक तस्‍वीर

आर्थिक तंगी से जूझ रही उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक के कर्मचारियों की भविष्य निधि का 21 करोड़ रुपया डीएचएफएल (दीवान हाउसिंग फाइनैंस लिमिटेड) में निवेश किए जाने की जानकारी के बाद शासन ने सख्त रवैया अपनाया है। शासन ने जहां बैंक से अपने पीएफ के पैसे के लिए मुम्बई हाई कोर्ट में क्लेम दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, फैसला किया है कि विभाग की सभी संस्थाओं में कर्मचारियों की भविष्य निधि का पैसा अब ईपीएफ कमिश्नर के जरिए निवेश किया जाएगा।

पावर कॉरपोरेशन के पीएफ घोटाले के बाद अब उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड का सामने आया है। यहां के कार्मिकों के भविष्य निधि का 21 करोड़ रुपया भी डीएचएफएल में निवेश किया गया था। जो अब फंस गया है। इस संबंध में प्रमुख सचिव सहकारिता एमवीएम रामीरेड्डी ने बताया कि बैंक में ईपीएफ ट्रस्ट कर्मचारियों का ही है। धनराशि कहां जमा की जानी है, यह फैसला ट्रस्ट ही लेता है। जानकारी मिली है कि ट्रस्ट ने बैंक कार्मिकों की भविष्य निधि का 21 करोड़ रुपये डीएचएफएल के सिक्योर्ड बॉन्ड में जमा किया था। बैंक ट्रस्ट ने भी 2016-17 से ही डीएचएफएल में निवेश किया था।

ट्रस्ट का दावा : नहीं हुआ घोटाला
बैंक कर्मचारी भविष्य निधि ट्रस्ट के सचिव राज कुमार यादव ने बताया कि डीएचएफएल के सिक्योर्ड बॉन्ड में पीएफ का निवेश भारत सरकार के दिशा निर्देशों के तहत किया गया है। इसमें कोई बिचौलिया या ब्रोकर नहीं है। इन निवेशों से जून 19 तक लगभग 3 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में मिल चुके हैं। फंसी धनराशि की वापसी के लिए प्रबंधन के सहयोग से विधिक कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके पूर्व मध्य प्रदेश डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन के बॉन्ड मे 2003 में किए गए तीन करोड़ रुपये के निवेश की धनराशि लिक्वीडेटर के जरिए प्राप्त की गई है। उन्होंने बताया कि छह सदस्यीय बोर्ड ऑफ ट्रस्ट का संचालन तीन सेवायोजक प्रतिनिधि (जिसमें मुख्य लेखाधिकारी, महाप्रबंधक और उप महाप्रबंधक/सहायक महाप्रबंधक लेखा) और तीन चुने हुए कर्मचारी प्रतिनिधियों द्वारा संचालित किया जाता है। ट्रस्ट आयकर विभाग से मान्यता प्राप्त है और आयकर विभाग द्वारा वर्ष 2017-18 तक ट्रस्ट की बैलेंसशीट और निवेशों की जांच की जा चुकी है।

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