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बावरिया गिरोह: वक्त के साथ बदला डकैती का तरीका, वॉट्सऐप पर करते हैं अपडेट

बावरिया गैंग के चार सदस्यों ने पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाली बातों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उनका गैंग कई राज्यों में सक्रिय है और...

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 17 Feb 2018, 11:03 am
लखनऊ
नवभारतटाइम्स.कॉम सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

बावरिया गैंग के चार सदस्यों ने पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाली बातों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उनका गैंग कई राज्यों में सक्रिय है और उनकी जनजाति के लोग की गई वारदातों को अपने वॉट्सऐप ग्रुप में अपडेट भी करते रहते हैं। पुलिस ने बताया कि इन सदस्यों ने लूटे गए परिवारों की जानकारी भी साझा की।

बावरिया गैंग खानाबदोश लोगों की जनजाति है जो समूह में रहकर मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लूट और डकैती को अंजाम दे रहे हैं। गैंग ने राजधानी लखनऊ में डकैती की शुरुआत 23 दिसंबर,2017 को बाराबंकी सीमा से की। उसके बाद दो बार चिनहट और फिर काकोरी और मलिहाबाद में 23 जनवरी को और फर्रुखाबाद में 26 जनवरी को ऐसी ही वारदात को अंजाम दिया। एसएचओ कृष्णानगर अंजनी पांडेय ने कहा कि उत्तर प्रदेश में यह गैंग तो नब्बे के दशक से ही सक्रिय था लेकिन इतने वक्त में इनके काम करने के तरीके और रणनीति में बहुत बदलाव आया है। अब इन लोगों ने खुद को कई समूहों में बांट लिया है और अलग तरह से वारदातों को अंजाम देते हैं।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि अपने काम के हिसाब से ये कई हिस्सों में बंटे हैं। इस हिसाब से ये तीन तरह के होते हैं, लोहपीटा, तेलचा और उधडना। लोहपीटा स्लम में रहते और लोहे का काम करते हैं, इसी तरह तेलचा तेल बेचने का काम करते हैं और उधडना कपड़े बेचने का काम करते हैं। इस सभी समूहों के लोग लूट और डकैतियां करते हैं।

डीएसपी अभय मिश्रा ने कहा कि गिरोह के ज्यादातर सदस्य 26 से 30 साल के बीच के हैं और कुछ डकैतियां करने के बाद ही पुरुष को शादी के लायक माना जाता है। आईजी (लखनऊ रेंज) सुजीत पांडेय ने कहा कि इन सदस्यों का एक डेटाबेस तैयार किया जाएगा और पुलिस द्वारा राज्य और अंतरराज्यीय स्तरों पर इसका इस्तेमाल किया जाएगा।

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