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CAA विरोध: लखनऊ हिंसा के 2 मास्टरमाइंड गिरफ्तार, मिले भड़काऊ दस्तावेज

लखनऊ पुलिस के मुताबिक पीएफआई ने 17 वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर सैकड़ों लोगों को उनमें जोड़ा था। इसके बाद लोगों से नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में परिवर्तन चौक पर पहुंचकर उग्र प्रदर्शन करने की अपील की गई थी।

नवभारत टाइम्स 24 Dec 2019, 10:29 am
लखनऊ
नवभारतटाइम्स.कॉम CAA LUCKNOW VIOLENCE
प्रेस कॉन्फ्रेंस करते एसएसपी कलानिधि नैथानी

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के दौरान 19 दिसंबर को लखनऊ में हुई हिंसा की साजिश विवादित संगठन पीएफआई (पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया) ने रची थी। लखनऊ पुलिस ने यह दावा किया है। पुलिस ने संगठन के दो पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद को पुलिस 20 दिसंबर को ही जेल भेज चुकी है। पुलिस तीनों को हिंसा का मास्टरमाइंड मान रही है।

हजरतगंज पुलिस ने सोमवार को पीएफआई के प्रदेश कोषाध्यक्ष- बाराबंकी निवासी नदीम और डिविजन प्रेजिडेंट अशफाक को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन से विवादित वॉट्सऐप चैट के अलावा भड़काऊ नारों वाली 36 तख्तियां, 100 पैम्फलेट, पोस्टर, सीडी, झंडे व कई दस्तावेज बरामद किए हैं। दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। वहीं, माहौल की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने इंटरनेट पर प्रतिबंध बुधवार रात 8 बजे तक बढ़ा दिया है।

प्रदेश में पुलिस का ऐक्शन
इस बीच उपद्रवियों पर यूपी पुलिस का ऐक्शन तेज हो गया है। पुलिस के मुताबिक अबतक 925 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। 120 संदिग्ध उपद्रवियों को सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट के कारण गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही पुलिस ने कुल 213 केस दर्ज किए हैं। लखनऊ में 15 और गिरफ्तारियां की गई हैं। इसके अलावा 7 नए मुकदमे दर्ज किए गए हैं। यूपी के डीजीपी ओपी सिंह का कहना है, 'मुकदमों में भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर विवेचक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोई नामजद खुद पर लगाए आरोपों के खिलाफ साक्ष्य दे रहा है तो उसकी पड़ताल की जाए।'

गांधी प्रेक्षागृह में हुई थी मीटिंग
पीएफआई ने रिहाई मंच व कई अन्य संगठनों के साथ मिलकर कैसरबाग स्थित गांधी प्रेक्षागृह में 4 नवंबर को एक मीटिंग की थी। एसएसपी कलानिधि नैथानी के मुताबिक, पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष वसीम ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि मीटिंग के दौरान उग्र प्रदर्शन करने को लेकर चर्चा हुई थी। हालांकि साझा विरोध करने वाले कई संगठनों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई थी। सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा के मुताबिक हिंसक प्रदर्शन की साजिश में शिया पीजी कॉलेज में संविदा शिक्षक रॉबिन वर्मा की भी अहम भूमिका थी। वह रिहाई मंच के सदस्य हैं। इसके अलावा रिहाई मंच के मोहम्मद शोएब ने भी हिंसा भड़कवाई। दोनों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

17 वॉट्सऐप ग्रुप बनाए
लखनऊ पुलिस के मुताबिक पीएफआई ने 17 वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर सैकड़ों लोगों को उनमें जोड़ा था। इसके बाद लोगों से नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में परिवर्तन चौक पर पहुंचकर उग्र प्रदर्शन करने की अपील की गई थी। इंस्पेक्टर हजरतगंज धीरेंद्र प्रताप कुशवाहा ने बताया पीएफआई के लोगों ने खदरा और पुराने लखनऊ के कई मोहल्लों में व्यक्तिगत तौर पर लोगों से संपर्क किया था। संगठन के लोगों ने योजना के तहत अलग-अलग यह काम किया। पुलिस या खुफिया तंत्र की नजर से बचने के लिए पीएफआई के सदस्य कहीं भी एकसाथ नहीं गए। वॉट्सऐप पर मेसेज किए गए कि पीएफआई, सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी ऑफ इंडिया के साथ मिलकर एनआरसी व सीएए का विरोध कर रही है।

सबका काम बंटा हुआ था
पुलिस के मुताबिक वसीम पूरी योजना की मॉनिटरिंग कर रहा था। वहीं नदीम को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह सोशल मीडिया पर लोगों को जोड़ेगा। उसे हिदायत थी कि अधिकतर लोगों को वॉट्सऐप के जरिए ही जोड़े। ऐसा इसलिए कहा गया था, क्योंकि वॉट्सऐप को जल्दी ट्रेस नहीं किया जा सकता है। अशफाक को जनसंपर्क कर टीम बनाने के लिए कहा गया था। उसी ने टीम को ट्रेनिंग भी दी थी। ट्रेनिंग के बाद टीम के सदस्यों को अलग-अलग लोगों से संपर्क करने का टारगेट देना भी अशफाक का ही काम था।

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